प्रशांत किशोर की चुनावी मैनेजमेंट कंपनी पर ईडी का शिकंजा, आई-पैक के कई ठिकानों पर छापेमारी
- हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली में रणनीतिक संस्था के ठिकानों पर छापेमारी
- चुनावी समय में कार्रवाई से बढ़ा राजनीतिक तापमान, जांच पर उठे सवाल
नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कोयला तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए देश के कई शहरों में छापेमारी की। हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली में एक साथ की गई इस कार्रवाई से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार अभियान अपने चरम पर है। अधिकारियों के अनुसार, यह छापेमारी एक चुनावी रणनीति और प्रबंधन से जुड़ी संस्था के विभिन्न ठिकानों पर की गई। जांच एजेंसी ने इन स्थानों पर दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की गहन जांच की। बेंगलुरु में संस्था से जुड़े एक निदेशक ऋषि राज सिंह के आवास और कार्यालय को भी जांच के दायरे में लिया गया। बताया जा रहा है कि यह पूरी कार्रवाई पश्चिम बंगाल में कथित कोयला आपूर्ति घोटाले से जुड़े मामले के तहत की जा रही है। जांच एजेंसी को संदेह है कि इस प्रकरण में कुछ वित्तीय अनियमितताएं और अवैध लेन-देन हुए हैं, जिनकी कड़ी इस संस्था तक पहुंच सकती है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे पहले भी जनवरी माह में इसी संस्था के कोलकाता स्थित कार्यालय पर छापेमारी की गई थी। उस समय राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं मौके पर पहुंच गई थीं और उन्होंने जांच एजेंसी की कार्रवाई का विरोध किया था। उस घटना के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक रंग ले चुका था। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में इस समय विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर हैं। ऐसे में इस संस्था की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति और प्रचार प्रबंधन का कार्य करती रही है। वर्तमान में भी यह चर्चा है कि यह संस्था राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी के लिए चुनावी रणनीति तैयार कर रही है। इस मामले को लेकर हाल ही में उच्चतम न्यायालय में भी सुनवाई हुई थी। अदालत ने राज्य सरकार से जांच एजेंसी की याचिका को लेकर उठाए गए आपत्तियों पर सवाल किए थे। प्रवर्तन निदेशालय ने अपने पक्ष में यह आरोप लगाया था कि पूर्व में की गई छापेमारी के दौरान जांच में बाधा उत्पन्न की गई थी। यह संस्था देश के चर्चित चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित की गई थी। उनकी टीम ने कई राज्यों में विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार की है और उन्हें सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि हाल के समय में प्रशांत किशोर ने बिहार में ‘जन सुराज’ अभियान के माध्यम से अपनी राजनीतिक पहचान बनाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी समय में इस प्रकार की कार्रवाई का राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। जहां एक ओर सत्तारूढ़ दल इसे राजनीतिक दबाव की कार्रवाई बता सकता है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम के रूप में पेश कर सकता है। इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में इस पर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। फिलहाल जांच एजेंसी अपनी कार्रवाई जारी रखे हुए है और संबंधित दस्तावेजों तथा साक्ष्यों की जांच कर रही है। प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि चुनावी माहौल में इसके राजनीतिक मायने भी काफी गहरे हैं। आने वाले समय में इस मामले के नए पहलू सामने आने की संभावना है, जिससे राजनीतिक परिदृश्य और भी प्रभावित हो सकता है।


