ई-मेल से बम धमकी देने वाला आरोपी गिरफ्तार, देशभर में फैला था साइबर नेटवर्क

  • पटना समेत कई अदालतों, हवाई अड्डों और संस्थानों को उड़ाने की दी थी धमकी
  • विदेशी आभासी नेटवर्क का इस्तेमाल कर छिपाता था पहचान, अब साइबर आतंकवाद में केस दर्ज

पटना/नई दिल्ली। पटना सिविल न्यायालय और उच्च न्यायालय सहित बिहार-झारखंड की विभिन्न अदालतों, हवाई अड्डों, शैक्षणिक संस्थानों और ट्रेनों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपी श्रीनिवास लुईस को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया है। दिल्ली की साइबर पुलिस ने उसे कर्नाटक के मैसूर स्थित वृंदावन लेआउट इलाके से दबोचा है। आरोपी की उम्र 47 वर्ष बताई जा रही है और वह लंबे समय से देशभर में ई-मेल के माध्यम से धमकियां देकर सुरक्षा एजेंसियों को चुनौती दे रहा था। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कानून की पढ़ाई की थी, लेकिन अंतिम वर्ष की परीक्षा पास नहीं कर सका और पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। इसके बाद वह बेरोजगार हो गया और अपनी मां के साथ मैसूर में रहने लगा। उसकी मां एक सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह न्यायिक व्यवस्था से नाराज था और इसी कारण उसने अदालतों को निशाना बनाकर धमकी देने का सिलसिला शुरू किया। साइबर पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि आरोपी देशभर में अब तक 1100 से अधिक मामलों में ई-मेल के जरिए धमकी भेज चुका है। इनमें बिहार के विभिन्न जिलों में ही लगभग 50 मामले दर्ज हैं। आरोपी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को भी धमकी भरा संदेश भेजा था, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई थीं। श्रीनिवास लुईस अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाता था। वह आभासी निजी नेटवर्क का उपयोग करता था, जिससे उसका इंटरनेट पता विदेश का दिखाई देता था। हालांकि, साइबर सेल ने तकनीकी जांच के दौरान डोमेन नाम प्रणाली लीक और सर्वर से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर उसके वास्तविक भारतीय इंटरनेट पते का पता लगाया। इसके बाद उसकी सटीक लोकेशन का पता चल सका और गिरफ्तारी संभव हो पाई। पुलिस ने आरोपी के पास से एक लैपटॉप और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। आशंका है कि इन उपकरणों में कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मौजूद हो सकते हैं, जो उसके नेटवर्क और गतिविधियों के बारे में और जानकारी देंगे। पटना पुलिस के सिटी एसपी दीक्षा ने बताया कि एक-दो दिनों के भीतर पटना पुलिस की टीम दिल्ली जाएगी और आरोपी को प्रोडक्शन वारंट पर लेकर पटना लाया जाएगा। उसके खिलाफ धमकी देने, शांति भंग करने और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत साइबर आतंकवाद का मामला दर्ज किया गया है। आरोपी पहले भी कई बार अदालतों को उड़ाने की धमकी दे चुका है। हाल ही में 9 मार्च को उसने पटना सिविल न्यायालय और बाढ़ न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। इससे पहले 9 फरवरी को पटना, भागलपुर और औरंगाबाद के न्यायालयों को भी निशाना बनाया गया था। हर बार ऐसे ई-मेल मिलने के बाद अदालत परिसरों में अफरा-तफरी का माहौल बन जाता था और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करनी पड़ती थी। पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता प्रभात भारद्वाज ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 351 और 353 के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66एफ के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि धारा 66एफ साइबर आतंकवाद से संबंधित है और इसमें आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, आपराधिक धमकी के मामले में दो से सात वर्ष तक की सजा हो सकती है, जबकि अफवाह फैलाने के आरोप में तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की एक अन्य धारा के तहत भी आरोपी को तीन वर्ष तक की जेल हो सकती है। फिलहाल, पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क भी सक्रिय है। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही हैं और देशभर में साइबर सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।

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