वैश्विक तनाव के बीच प्रधानमंत्री की अहम बैठक आज, राज्यों के साथ रणनीति पर होगा मंथन
- ईरान संकट और अमेरिका-इजरायल तनाव पर होगी समीक्षा, मुख्यमंत्रियों से लिया जाएगा फीडबैक
- एलपीजी आपूर्ति, व्यापार और खाड़ी देशों में भारतीयों की सुरक्षा प्रमुख मुद्दे, बिहार से नीतीश होंगें शामिल
नई दिल्ली/पटना। देश और वैश्विक स्तर पर तेजी से बदलते हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक विशेष रूप से ईरान से जुड़े मौजूदा संकट और अमेरिका-इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के मद्देनजर बुलाई गई है। बैठक का उद्देश्य देश की तैयारियों की समीक्षा करना और राज्यों के साथ समन्वय स्थापित कर आगे की रणनीति तय करना है। यह बैठक शाम 6 बजे आभासी माध्यम से आयोजित की जाएगी, जिसमें देश के अधिकांश राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे। इस अहम बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी हिस्सा लेंगे। वे पटना से वीडियो संवाद के माध्यम से बैठक में जुड़ेंगे। मुख्यमंत्री सचिवालय के अनुसार, बैठक को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में बिहार सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा भी मौजूद रह सकते हैं, ताकि राज्य स्तर पर आवश्यक सुझाव और जानकारी साझा की जा सके। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की विस्तृत समीक्षा करेंगे और केंद्र सरकार द्वारा अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी भी राज्यों को दी जाएगी। बैठक का मुख्य फोकस इस बात पर रहेगा कि यदि वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं, तो राज्यों को किस प्रकार तैयार रहना चाहिए। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया जाएगा। प्रशासनिक स्तर पर समन्वय को मजबूत करना इस बैठक का प्रमुख उद्देश्य माना जा रहा है। ईरान में जारी संकट का असर अब भारत के विभिन्न हिस्सों में दिखाई देने लगा है। बिहार भी इससे अछूता नहीं है। विशेष रूप से घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा समुद्री व्यापार में बाधा आने से निर्यात और आयात पर भी असर पड़ रहा है। बिहार से खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले कई उत्पाद इस संकट के कारण प्रभावित हो रहे हैं, जिससे व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है। व्यापारिक गतिविधियों में संभावित गिरावट को लेकर भी बैठक में चर्चा होने की संभावना है। केंद्र और राज्य मिलकर ऐसे उपायों पर विचार करेंगे, जिससे व्यापार को कम से कम नुकसान पहुंचे। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ी चिंता उन भारतीयों को लेकर है, जो खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं। बिहार के हजारों युवा इन देशों में रोजगार के लिए गए हुए हैं। मौजूदा तनाव के कारण उनकी सुरक्षा और रोजगार दोनों पर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में बैठक में इस मुद्दे पर विशेष ध्यान दिया जाएगा कि विदेशों में रह रहे भारतीयों, खासकर बिहार के लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। दिलचस्प बात यह है कि इस बैठक में पांच चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित नहीं किया गया है, जबकि अन्य सभी राज्यों को शामिल किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि बैठक का उद्देश्य पूरी तरह प्रशासनिक और रणनीतिक समन्वय पर केंद्रित है। बैठक के दौरान एलपीजी गैस की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने, व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित होने से बचाने और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इसके अलावा राज्यों को संभावित संकट से निपटने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जा सकते हैं। यह बैठक देश के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर उत्पन्न हालात का असर अब सीधे आम लोगों के जीवन और अर्थव्यवस्था पर पड़ने लगा है। ऐसे समय में केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत समन्वय ही इस चुनौती का सामना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


