बिहार में स्कूलों में आधार केंद्र खोलने की योजना अटकी, 40 लाख छात्रों पर असर

  • विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की मंजूरी नहीं मिलने से 1068 स्कूलों में केंद्र शुरू नहीं हो सके
  • नई एजेंसी चयन के निर्देश, छात्रवृत्ति और योजनाओं के लाभ में आ रही बाधा

पटना। बिहार में स्कूली बच्चों के लिए आधार कार्ड बनवाने की महत्वाकांक्षी योजना एक बार फिर अटक गई है। राज्य सरकार द्वारा 1068 सरकारी स्कूलों में आधार सेवा केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण से मंजूरी नहीं मिलने के कारण इस योजना पर फिलहाल रोक लग गई है। इससे राज्य के करीब 40 लाख से अधिक छात्रों को सीधा नुकसान हो रहा है, जिनका आधार कार्ड अभी तक नहीं बन पाया है या उसमें सुधार की आवश्यकता है। शिक्षा विभाग ने इस योजना को बच्चों और उनके अभिभावकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया था। उद्देश्य यह था कि स्कूल परिसर में ही आधार नामांकन और अद्यतन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि छात्रों को आधार बनवाने के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े। इसके तहत राज्य के विभिन्न प्रखंडों में दो-दो स्कूलों को चिन्हित कर वहां आधार सेवा केंद्र खोलने की योजना थी। हालांकि, इस योजना को लागू करने में तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनें सामने आ गईं। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने केंद्र संचालन के लिए चयनित एजेंसियों पर आपत्ति जताई और उनकी मंजूरी देने से इनकार कर दिया। प्राधिकरण का कहना है कि आधार सेवा केंद्र संचालित करने वाली एजेंसी को स्वयं काम करना चाहिए, न कि किसी अन्य संस्था या तीसरे पक्ष के माध्यम से सेवाएं प्रदान करनी चाहिए। इस संबंध में प्राधिकरण ने शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह एजेंसी चयन की प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करे और सभी निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करे। इसके बाद ही इस योजना को आगे बढ़ाया जा सकेगा। यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई है। इससे पहले भी करीब दो वर्ष पूर्व स्कूलों में आधार सेवा केंद्र शुरू किए गए थे, लेकिन संचालन प्रक्रिया पूरी नहीं होने और तकनीकी समस्याओं के कारण उन्हें बंद करना पड़ा था। इसके बाद विभाग ने दोबारा योजना बनाकर एजेंसियों का चयन किया और इस वर्ष इन केंद्रों को चालू करने का लक्ष्य रखा गया था। उम्मीद जताई जा रही थी कि वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों तक सभी चिन्हित स्कूलों में आधार सेवा केंद्र काम करने लगेंगे, लेकिन मंजूरी न मिलने के कारण यह योजना फिर अधर में लटक गई है। इस स्थिति का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। वर्तमान समय में आधार कार्ड कई सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति और शैक्षणिक प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य दस्तावेज बन चुका है। जिन छात्रों का आधार नहीं बना है या उसमें त्रुटियां हैं, उन्हें इन सुविधाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अभिभावकों का कहना है कि यदि स्कूलों में ही आधार बनाने की सुविधा मिल जाती, तो उन्हें काफी राहत मिलती। वर्तमान में आधार केंद्रों पर लंबी कतारों और सीमित संसाधनों के कारण बच्चों का नामांकन और सुधार कार्य समय पर नहीं हो पा रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि प्राधिकरण के निर्देशों के अनुरूप नई एजेंसी के चयन की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। इस बार सभी तकनीकी और प्रशासनिक मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की बाधा न आए और योजना को सफलतापूर्वक लागू किया जा सके। विभाग का यह भी कहना है कि योजना का उद्देश्य छात्रों को अधिकतम सुविधा प्रदान करना है और इसे जल्द से जल्द लागू करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल, इस योजना के ठप पड़ने से लाखों छात्र और उनके अभिभावक परेशान हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई एजेंसी के चयन के बाद आखिर कब तक स्कूलों में आधार सेवा केंद्र शुरू हो पाते हैं और छात्रों को इस समस्या से राहत मिलती है।

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