कानपुर में साइबर ठगी का बड़ा मामला, मार्क जुकरबर्ग बनकर शिक्षिका से 1.57 करोड़ की ठगी

  • सोशल मीडिया पर दोस्ती कर स्कूल खोलने का झांसा, 13 महीने में अलग-अलग खातों में जमा कराए रुपये
  • राशि वापसी के नाम पर भी ठगे लाखों, पुलिस ने दर्ज किया मामला, कुछ खाते सीज

कानपुर। कानपुर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां खुद को अमेरिकी उद्योगपति मार्क जुकरबर्ग बताकर ठगों ने एक सेवानिवृत्त शिक्षिका से 1.57 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। यह घटना चकेरी थाना क्षेत्र के आनंदनगर की रहने वाली एलिसन वीम्स के साथ हुई, जो एक प्रतिष्ठित विद्यालय से सेवानिवृत्त हैं। इस मामले ने साइबर अपराध के बढ़ते खतरे और ठगों के नए तरीकों को उजागर कर दिया है। पीड़िता के अनुसार, उनकी पहचान एक व्यक्ति से सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर हुई। उस व्यक्ति ने खुद को फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम का मालिक मार्क जुकरबर्ग बताया और उनसे बातचीत शुरू की। धीरे-धीरे उसने विश्वास जीतकर उन्हें कानपुर में एक स्कूल खोलने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद कथित जुकरबर्ग के सहयोगियों ने भी उनसे संपर्क करना शुरू किया। इसी दौरान जॉश टर्नर नामक एक अन्य व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया, जिसने खुद को उद्योगपति एलन मस्क का सहयोगी बताया। ठगों ने शिक्षिका को नौकरी, निवेश और विभिन्न प्रक्रियाओं के नाम पर रकम जमा कराने के लिए प्रेरित किया। 25 जनवरी 2025 से 20 फरवरी 2026 के बीच करीब 13 महीनों में अलग-अलग बैंक खातों में उनसे कुल 1.57 करोड़ रुपये जमा कराए गए। जब शिक्षिका को संदेह हुआ, तब तक वह अपनी सेवानिवृत्ति निधि, जीवन भर की बचत और पारस्परिक निधि निवेश की बड़ी राशि गंवा चुकी थीं। इसके बाद ठगों ने एक और चाल चलते हुए उनसे कहा कि उनकी जमा राशि एक पैकेज के रूप में भेजी गई है, जिसके लिए शिपिंग शुल्क, कस्टम शुल्क, वाहन मरम्मत, पैकेज रिलीज और संचालन अनुपालन शुल्क के नाम पर और पैसे जमा कराने पड़े। इसके बाद एक अन्य गिरोह सक्रिय हुआ, जिसने खुद को साइबर रिपोर्टिंग सहायता ऑनलाइन ठगी रिपोर्टिंग केंद्र भारत से जुड़ा बताया। इस टीम ने एक कथित अधिवक्ता के माध्यम से शिक्षिका को भरोसा दिलाया कि उनकी राशि विजडम कैपिटल नाम की कंपनी में निवेश की गई है। उनके नाम से एक व्यापारिक खाता भी दिखाया गया, जिसमें उनकी रकम बढ़कर 2.23 करोड़ रुपये बताई गई। राशि निकालने के लिए टैक्स, सत्यापन शुल्क, स्टांप शुल्क और पुनर्संतुलन शुल्क के नाम पर उनसे फिर पैसे जमा कराए गए। ठगों ने उन्हें आश्वासन दिया कि 20 फरवरी 2026 तक पूरी राशि वापस कर दी जाएगी और अतिरिक्त ब्याज भी मिलेगा। लेकिन जैसे ही अंतिम भुगतान हुआ, सभी आरोपियों ने संपर्क समाप्त कर लिया। इस दौरान कथित साइबर पुलिस अधिकारी बनकर भी उनसे संपर्क किया गया और उन्हें भरोसे में लेने की कोशिश की गई। अंततः ठगी का एहसास होने पर शिक्षिका ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और अब तक करीब 30.42 लाख रुपये विभिन्न खातों में होल्ड कराए गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित साइबर ठगी का मामला है, जिसमें कई स्तरों पर अलग-अलग गिरोह सक्रिय थे। जांच जारी है और आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यह घटना लोगों को सतर्क रहने और सोशल मीडिया पर अजनबियों से संपर्क करते समय सावधानी बरतने का संदेश देती है।

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