पटना से तेजस्वी का बड़ा ऐलान, कहा- केरल में लेफ्ट पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे, कांग्रेस को बड़ा झटका

पटना। बिहार में राज्यसभा चुनाव के बीच राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने एक ऐसा राजनीतिक बयान दिया है, जिससे विपक्षी राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है। पटना में मीडिया से बातचीत करते हुए तेजस्वी यादव ने घोषणा की कि उनकी पार्टी केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव में वाम दलों के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के साथ मिलकर तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। तेजस्वी यादव के इस बयान को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि केरल में कांग्रेस वाम दलों के खिलाफ मुख्य विपक्षी भूमिका में रहती है। ऐसे में राजद का वाम दलों के साथ चुनाव लड़ना कांग्रेस के साथ राजनीतिक दूरी का संकेत माना जा रहा है।
केरल में राजद के पुराने संबंधों का हवाला
तेजस्वी यादव ने कहा कि केरल में उनकी पार्टी का पहले से आधार रहा है और वहां पहले भी राजद के विधायक रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी कारण पार्टी ने एक बार फिर वहां चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है। उनका कहना था कि राजद केरल में वाम दलों के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी और यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी कि यह गठबंधन फिर से सत्ता में लौटे। तेजस्वी यादव ने कहा कि उनकी पार्टी केरल में सीमित सीटों पर चुनाव लड़ेगी, लेकिन गठबंधन के साथ मिलकर काम करेगी।
कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ने की स्थिति
तेजस्वी यादव के इस फैसले का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि केरल में मुख्य मुकाबला वाम दलों के नेतृत्व वाले गठबंधन और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा के बीच होता है। इस स्थिति में राजद का वाम दलों के साथ चुनाव लड़ना सीधे तौर पर कांग्रेस के खिलाफ खड़ा होने जैसा माना जा रहा है। बिहार में जहां राज्यसभा चुनाव के दौरान राजद को कांग्रेस के समर्थन की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर केरल में कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केरल में दो प्रमुख गठबंधनों के बीच मुकाबला
केरल की राजनीति लंबे समय से दो प्रमुख गठबंधनों के बीच घूमती रही है। एक ओर वाम दलों के नेतृत्व वाला वाम लोकतांत्रिक मोर्चा है, जबकि दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा है। इन दोनों गठबंधनों के बीच राज्य की सत्ता के लिए लगातार मुकाबला होता रहा है। केरल में लंबे समय तक यह परंपरा रही कि हर चुनाव में सत्ता परिवर्तन होता था और जनता एक बार वाम दलों को तो अगली बार कांग्रेस गठबंधन को सत्ता में लाती थी।
2021 में टूटी थी सत्ता परिवर्तन की परंपरा
हालांकि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में यह परंपरा टूट गई थी। उस चुनाव में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर सत्ता में वापसी की थी। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में वाम दलों का गठबंधन एक बार फिर सत्ता में आया और इस तरह केरल की राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ गया।
पिछले चुनाव के आंकड़े
यदि पिछले विधानसभा चुनाव के परिणामों की बात करें तो राज्य की 140 सीटों में से 97 सीटों पर वाम लोकतांत्रिक मोर्चा के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा को 41 सीटों पर सफलता मिली थी। इसके अलावा अन्य दलों को दो सीटों पर जीत मिली थी। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को उस चुनाव में एक भी सीट नहीं मिल सकी थी।
इस बार भी सत्ता बचाने की कोशिश
आगामी विधानसभा चुनाव में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा एक बार फिर सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में जुटा हुआ है। मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में गठबंधन तीसरी बार सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा भी इस बार सत्ता में वापसी के लिए पूरी ताकत लगा रहा है।
भारतीय जनता पार्टी की भी नजर
केरल में भारतीय जनता पार्टी भी अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही है। पार्टी राज्य में पहली बार उल्लेखनीय सफलता हासिल करने की उम्मीद लगाए हुए है। हालांकि अभी तक पार्टी को केरल की विधानसभा में बड़ी सफलता नहीं मिली है, लेकिन पार्टी लगातार अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
तेजस्वी के बयान से बढ़ी सियासी चर्चा
तेजस्वी यादव के इस ऐलान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल में राजद का वाम दलों के साथ जाना राष्ट्रीय स्तर की विपक्षी राजनीति में नए सवाल खड़े कर सकता है। एक ओर जहां विपक्षी दल राष्ट्रीय स्तर पर एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं।
चुनाव परिणामों पर टिकी निगाहें
केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हुए हैं। आगामी चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वाम लोकतांत्रिक मोर्चा अपनी सत्ता बरकरार रख पाता है या फिर राज्य में एक बार फिर सत्ता परिवर्तन की परंपरा लौट आती है। फिलहाल तेजस्वी यादव के इस बयान ने केरल चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभिन्न गठबंधन किस प्रकार चुनावी मैदान में उतरते हैं और मतदाताओं का समर्थन किसे मिलता है।

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