मार्च की शुरुआत में ही देश में बढ़ी भीषण गर्मी, कई शहरों में तापमान 40 डिग्री के पार

  • पश्चिमी विक्षोभ की कमी और शुष्क हवाओं से बढ़ा तापमान, मौसम विभाग ने कई क्षेत्रों में लू की चेतावनी दी

नई दिल्ली। देशभर में मार्च महीने की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने तेज असर दिखाना शुरू कर दिया है। कई राज्यों में तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया जा रहा है और कुछ शहरों में तो पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष फरवरी महीना पिछले 125 वर्षों में सबसे अधिक गर्म और शुष्क महीनों में से एक रहा। अब मार्च में भी तापमान तेजी से बढ़ने के कारण लोगों को अप्रैल और मई जैसी गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। कई क्षेत्रों में लू चलने की भी संभावना जताई गई है, जिसके कारण लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
दिल्ली में टूटा कई वर्षों का रिकॉर्ड
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में भी मार्च की शुरुआत में ही तापमान ने कई वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। सफदरजंग वेधशाला के अनुसार यहां अधिकतम तापमान 35.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है, जो मार्च महीने में पिछले 15 वर्षों का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार वर्ष 2011 के बाद पहली बार मार्च के शुरुआती दिनों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचा है। इससे राजधानी में लोगों को समय से पहले तेज गर्मी का अनुभव होने लगा है।
कई राज्यों में बढ़ा तापमान
देश के कई राज्यों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। राजस्थान के बाड़मेर में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया है। वहीं जयपुर में अधिकतम तापमान 37.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। मध्य प्रदेश के रतलाम में तापमान 39.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि भोपाल में 36.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट, डीसा और कांडला जैसे शहरों में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र के जलगांव में तापमान 39.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। वहीं मुंबई में 35.9 डिग्री और पुणे में 37.7 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। हरियाणा के महेंद्रगढ़, नारनौल और चरखी दादरी जैसे क्षेत्रों में भी तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है।
कई क्षेत्रों में लू की चेतावनी
मौसम विभाग ने राजस्थान, गुजरात और आसपास के क्षेत्रों में लू चलने की चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में और अधिक क्षेत्रों में लू का प्रभाव देखने को मिल सकता है। लू की स्थिति में स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी गई है।
पश्चिमी विक्षोभ की कमी से बढ़ी गर्मी
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस असामान्य गर्मी के पीछे मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय न होना है। पश्चिमी विक्षोभ एक मौसम प्रणाली है जो भूमध्य सागर क्षेत्र से उत्पन्न होकर भारत के हिमालयी क्षेत्रों तक पहुंचती है। जब यह प्रणाली सक्रिय होती है तो पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी होती है, जिससे मैदानी इलाकों में तापमान नियंत्रित रहता है। लेकिन नवंबर 2025 के बाद से भारत में कोई सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ नहीं पहुंचा है, जिसके कारण तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है।
शुष्क हवाओं का भी असर
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार देश के अधिकांश हिस्सों में इस समय गर्म और शुष्क हवाएं चल रही हैं। इन हवाओं में नमी की मात्रा बहुत कम है, जिसके कारण तापमान तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही बारिश और बादलों की कमी के कारण सूर्य की सीधी किरणें धरती तक पहुंच रही हैं। इससे वातावरण में गर्मी और अधिक बढ़ रही है।
प्रतिचक्रवात प्रणाली भी बना रही असर
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों में प्रतिचक्रवात प्रणाली सक्रिय है। यह प्रणाली चक्रवात के विपरीत होती है और इसके सक्रिय होने पर आसमान साफ रहता है। आसमान साफ रहने से सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पहुंचती हैं और तापमान में तेजी से वृद्धि होती है। यही कारण है कि पश्चिमी भारत के कई हिस्सों में गर्मी तेजी से बढ़ रही है।
14 मार्च के बाद मिल सकती है राहत
मौसम विभाग के अनुसार 14 मार्च के आसपास उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके प्रभाव से तापमान में कुछ गिरावट आने की संभावना है। अनुमान है कि उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आ सकती है। हालांकि यह राहत अस्थायी हो सकती है।
आने वाले महीनों में और बढ़ सकती है गर्मी
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार मार्च से मई 2026 के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। इस दौरान लू चलने की घटनाएं भी सामान्य से ज्यादा हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती गर्मी का असर जनस्वास्थ्य, जल संसाधनों और बिजली की मांग पर भी पड़ सकता है। बुजुर्गों, बच्चों और बाहर काम करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
अल नीनो का भी हो सकता है असर
मौसम वैज्ञानिकों ने यह भी आशंका जताई है कि प्रशांत महासागर क्षेत्र में अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना है। अल नीनो बनने पर आमतौर पर भारत में वर्षा कम होती है और तापमान अधिक हो जाता है। यदि यह स्थिति बनी तो मानसून भी प्रभावित हो सकता है और देश के कई हिस्सों में वर्षा कम होने की संभावना बढ़ सकती है।
कृषि पर भी पड़ सकता है प्रभाव
मार्च में बढ़ती गर्मी का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक तापमान के कारण गेहूं की फसल के दानों के विकास पर असर पड़ सकता है। हालांकि जिन क्षेत्रों में गेहूं की फसल पहले ही पक चुकी है, वहां किसानों को ज्यादा चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि फसलों में पर्याप्त सिंचाई बनाए रखें ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे और गर्मी का प्रभाव कम किया जा सके। देश में मार्च की शुरुआत में ही बढ़ती गर्मी ने मौसम को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

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