राजस्व अधिकारियों की हड़ताल से बिहार में 20 से अधिक सेवाएं ठप, छात्रों और आम लोगों की बढ़ी परेशानी

  • एक महीने से जारी आंदोलन के कारण 537 अंचलों में दाखिल-खारिज और प्रमाणपत्र संबंधी कार्य प्रभावित

पटना। बिहार में राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की जारी हड़ताल का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। बिहार राजस्व सेवा से जुड़े अंचल अधिकारी, राजस्व अधिकारी और कर्मचारी संघ के सदस्य पिछले एक महीने से अधिक समय से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस आंदोलन के कारण राज्य के 537 अंचलों में राजस्व विभाग से जुड़े करीब 20 महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हो गए हैं, जिससे लाखों लोगों के जरूरी काम अटक गए हैं। सबसे अधिक परेशानी छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और जमीन से जुड़े काम कराने वाले लोगों को हो रही है। आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज फिलहाल जारी नहीं किए जा रहे हैं। इन दस्तावेजों की आवश्यकता शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं के लिए होती है, जिसके कारण लोगों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार राजस्व कर्मचारी संघ ने 11 फरवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की थी। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी कई मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है। इसी कारण कर्मचारियों और अधिकारियों ने संयुक्त रूप से आंदोलन जारी रखने का फैसला किया है। हड़ताल के कारण जमीन और राजस्व से जुड़े कई अहम कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। प्रभावित सेवाओं में दाखिल-खारिज, भू-लगान भुगतान, भू-अभिलेख प्राप्त करना, विशेष भू-सर्वेक्षण, जमीन की मापी और परिमार्जन जैसे कार्य शामिल हैं। इसके अलावा राजस्व न्यायालय से जुड़े मामलों की सुनवाई भी प्रभावित हो रही है। भूमि उपयोग के प्रकार में परिवर्तन, राजस्व नक्शा उपलब्ध कराना और जमीन दखल-कब्जा प्रमाणपत्र जारी करने जैसे कार्य भी फिलहाल बंद पड़े हैं। इससे जमीन से जुड़े विवादों और लेन-देन से संबंधित मामलों में भी लोगों को कठिनाई हो रही है। सरकारी योजनाओं से जुड़े कई कार्य भी इस हड़ताल से प्रभावित हुए हैं। इनमें अभियान बसेरा 2.0, चकबंदी, कृषि गणना, जनगणना और अंचलों का निरीक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। इन योजनाओं के रुक जाने से प्रशासनिक कामकाज पर भी असर पड़ रहा है। राजस्व सेवाओं के बंद होने से छात्रों और युवाओं की परेशानी सबसे अधिक बढ़ गई है। कई प्रतियोगी परीक्षाओं, छात्रवृत्ति योजनाओं और महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए आय, जाति और निवास प्रमाणपत्र अनिवार्य होते हैं। हड़ताल के कारण ये दस्तावेज नहीं बन पा रहे हैं, जिससे छात्रों को आवेदन करने में कठिनाई हो रही है। इसी प्रकार कई युवाओं को नई नौकरी ज्वाइन करने के लिए भी इन प्रमाणपत्रों की आवश्यकता होती है। दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण उनकी नियुक्ति प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। राजस्व सेवा के अधिकारियों के दो प्रमुख संगठन बिरसा और बिरसा यूनाइटेड हैं। इन संगठनों का कहना है कि बिहार राजस्व सेवा नियमावली के गठन के समय डीसीएलआर और डीएलएओ जैसे कई पदों पर राजस्व सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान था। लेकिन बाद में नियमों में बदलाव कर इन पदों को बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए आरक्षित कर दिया गया, जिससे राजस्व सेवा के अधिकारियों के पदोन्नति और करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। संघों के अनुसार उनकी मांगों को लेकर 5 फरवरी को राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। बैठक में समस्या के समाधान पर मौखिक सहमति बनी थी, लेकिन अब तक उसे लिखित रूप में लागू नहीं किया गया है। इसी कारण कर्मचारी आंदोलन जारी रखे हुए हैं। इधर राज्य सरकार ने हड़ताल को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अधिकारियों को जल्द काम पर लौटने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि सरकार हड़ताल के दिनों की गिनती कर रही है और यदि अधिकारी शीघ्र कार्य पर वापस नहीं लौटते हैं तो उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल हड़ताल जारी रहने के कारण बिहार के लाखों लोगों के जरूरी काम रुके हुए हैं। अब सभी की नजर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच संभावित वार्ता पर टिकी हुई है, जिससे इस गतिरोध का समाधान निकल सके और राजस्व विभाग की सेवाएं फिर से सामान्य हो सकें।

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