बिहार से नितिन नवीन नहीं जाएंगे राज्यसभा, पवन सिंह को बीजेपी भेज सकती है उच्च सदन, कुशवाहा पर जाने पर संशय
नई दिल्ली/पटना। बिहार से राज्यसभा की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने राज्यसभा की 37 सीटों के चुनाव की तारीखों का एलान कर दिया है। इसके तहत 26 फरवरी को अधिसूचना जारी होगी, जबकि 16 मार्च को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक मतदान कराया जाएगा। उसी दिन शाम पांच बजे से मतगणना भी होगी। बिहार की राजनीति में इन चुनावों को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि कई बड़े नेताओं का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है और नए समीकरण उभरते दिख रहे हैं।
किन सांसदों का हो रहा है कार्यकाल समाप्त
9 अप्रैल को बिहार से राज्यसभा के पांच सांसदों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इनमें अमरेंद्र धारी सिंह, प्रेमचंद गुप्ता, उपेंद्र कुशवाहा, रामनाथ ठाकुर और हरिवंश नारायण सिंह शामिल हैं। इन सीटों पर नए चेहरों की एंट्री होगी या पुराने नेताओं को दोबारा मौका मिलेगा, इस पर सियासी चर्चाएं तेज हैं। खास तौर पर भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड की रणनीति को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।
एक सीट के लिए कितने विधायकों का समर्थन जरूरी
बिहार राज्यसभा चुनाव में इस बार एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। यह गणना विधानसभा की कुल 243 सीटों को चुनावी फॉर्मूले के तहत छह से भाग देने पर निकलती है। इस संख्या के आधार पर राष्ट्रीय जनता दल के लिए अपने दम पर एक भी उम्मीदवार को जिताना मुश्किल माना जा रहा है। जनता दल यूनाइटेड के पास 85 विधायक हैं, जिससे वह अपनी दो सीटें सुरक्षित रख सकती है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के पास 89 विधायक हैं, जिससे उसके लिए दो सीटों पर जीत आसान मानी जा रही है।
नितिन नवीन के राज्यसभा जाने पर विराम
पटना के बांकीपुर से विधायक और पूर्व मंत्री नितिन नवीन को लेकर लंबे समय से यह चर्चा थी कि उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है। हालांकि अब इन अटकलों पर विराम लग गया है। नितिन नवीन को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के साथ ही दिल्ली के अति विशिष्ट इलाके मोतीलाल नेहरू मार्ग पर टाइप-आठ का सरकारी आवास आवंटित किया गया है। डायरेक्टरेट ऑफ एस्टेट के नियमों के अनुसार किसी राष्ट्रीय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को, यदि वह केंद्रीय मंत्री या संसद सदस्य नहीं है, तो इस श्रेणी का आवास दिया जाता है। इससे यह संकेत मिल गया है कि नितिन नवीन फिलहाल राज्यसभा नहीं जा रहे हैं।
पवन सिंह को मिल सकता है बड़ा मौका
लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी और गायक-अभिनेता पवन सिंह के रिश्तों में तल्खी जरूर आई थी, लेकिन इसके बाद विधानसभा चुनाव 2025 से पहले उन्होंने भाजपा जॉइन कर पार्टी के लिए जोरदार प्रचार किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उन्हें किसी बड़े पद से नवाजे जाने की संभावना है और राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा भी इसी कड़ी में देखी जा रही है। वरिष्ठ भाजपा नेता मनोज तिवारी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि पवन सिंह के लिए पार्टी में सब कुछ तय है, हालांकि इस पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जदयू के वरिष्ठ नेताओं पर नजर
जनता दल यूनाइटेड के जिन दो नेताओं का कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह और केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर शामिल हैं। दोनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी और पार्टी के वरिष्ठ चेहरे माने जाते हैं। नीतीश कुमार ने परंपरागत रूप से किसी नेता को दो से अधिक बार राज्यसभा भेजने से परहेज किया है, लेकिन दोनों नेताओं की अहम भूमिका को देखते हुए उन्हें एक बार फिर मौका मिलने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
उपेंद्र कुशवाहा को लेकर संशय
उपेंद्र कुशवाहा को लेकर स्थिति सबसे ज्यादा उलझी हुई मानी जा रही है। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान उन्हें एक लोकसभा सीट और एक विधान परिषद सीट का वादा किया गया था। वह काराकाट से लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। इसके बाद उन्हें विधान परिषद भेजने की बात हुई, मगर सहमति नहीं बन पाई। बाद में 2 जुलाई 2024 को सम्राट चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी की ओर से उन्हें राज्यसभा भेजने का एलान किया था। अब विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने अपने बेटे को मंत्री बनवाया है। ऐसे में पत्नी विधायक, बेटा मंत्री और खुद राज्यसभा सदस्य रहने पर परिवारवाद के आरोप से बचने के लिए पार्टी उन्हें आगे मौका न दे, ऐसी चर्चाएं भी हैं।
विपक्ष के सामने कठिन चुनौती
विपक्षी दलों के सभी विधायकों की संख्या जोड़ने पर यह आंकड़ा ठीक 41 बनता है, जिससे वे मिलकर एक नेता को राज्यसभा भेज सकते हैं। इनमें सबसे ज्यादा 25 विधायक राष्ट्रीय जनता दल के हैं, कांग्रेस के छह, वाम दलों के तीन, आईआईपी का एक, एआईएमआईएम के पांच और बहुजन समाज पार्टी का एक विधायक शामिल है। महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव यदि सभी सहयोगियों को साथ लाते हैं, तो एक सीट संभव हो सकती है। हालांकि विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद विपक्ष के लिए यह राह भी आसान नहीं मानी जा रही है।
आगे के चुनाव और सियासी तस्वीर
बिहार से कुल 16 राज्यसभा सीटें हैं। 2026 के बाद अगला चुनाव 2028 की शुरुआत में होगा, जबकि इसके बाद 2030 में फिर से चुनाव होंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मौजूदा संख्या बल को देखते हुए आने वाले वर्षों में महागठबंधन के लिए राज्यसभा में अपनी मौजूदगी बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। बिहार राज्यसभा चुनाव केवल सीटों की लड़ाई नहीं हैं, बल्कि यह आने वाले विधानसभा चुनाव और राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला संकेत भी माने जा रहे हैं।


