होली पर बिहार आने वाली सभी ट्रेनें फुल, वेटिंग लिस्ट 100 के पार, केवल स्पेशल ट्रेन ही सहारा
पटना। होली का पर्व नजदीक आते ही बिहार लौटने वाले प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। देश के अलग-अलग महानगरों से बिहार आने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनें पहले ही फुल हो चुकी हैं। हालात ऐसे हैं कि जिन ट्रेनों में बुकिंग की थोड़ी-बहुत गुंजाइश बची है, वहां वेटिंग लिस्ट 100 के पार पहुंच गई है। ऐसे में होली पर घर पहुंचने की तैयारी कर रहे लोगों के सामने अब केवल स्पेशल ट्रेन ही एकमात्र उम्मीद के रूप में बची है।
महानगरों से बिहार आने वाली ट्रेनों में नो रूम
दिल्ली, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, बेंगलुरु और सिकंदराबाद जैसे बड़े शहरों से बिहार आने वाली ट्रेनों में सीटों की भारी कमी देखने को मिल रही है। रेलवे की वेबसाइट और टिकट काउंटरों पर 25 फरवरी से 3 मार्च तक की तारीखों के लिए कंफर्म टिकट मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है। काउंटर खुलते ही टिकट चंद मिनटों में बुक हो जा रहे हैं। जो यात्री समय रहते टिकट नहीं ले पाए, उन्हें लंबी वेटिंग सूची के सहारे ही सफर की उम्मीद करनी पड़ रही है।
वेटिंग लिस्ट ने बढ़ाई यात्रियों की चिंता
कई ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट 100 से भी ऊपर पहुंच चुकी है। इसका मतलब यह है कि टिकट कंफर्म होने की संभावना बेहद कम है। वापसी की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। होली के बाद बिहार से बाहर लौटने वाले यात्रियों को 5 से 10 मार्च के बीच की तारीखों में ही वेटिंग टिकट मिल पा रहा है। इससे प्रवासियों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि त्योहार के बाद उन्हें काम पर भी समय पर लौटना होता है।
प्रमुख ट्रेनों में टिकट पूरी तरह फुल
दिल्ली और अन्य शहरों से बिहार आने वाली कई प्रमुख ट्रेनें पूरी तरह भर चुकी हैं। तेजस राजधानी एक्सप्रेस, सीमांचल एक्सप्रेस, विक्रमशिला एक्सप्रेस, संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल, नंदनकानन एक्सप्रेस और अवध आसाम एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में 26 फरवरी से 3 मार्च तक कंफर्म टिकट उपलब्ध नहीं हैं। कुछ ट्रेनों में होली के बाद 10 मार्च के आसपास से सीटें मिलने की संभावना दिख रही है। तेजस राजधानी एक्सप्रेस में 4 मार्च के बाद टिकट उपलब्ध होने की जानकारी मिल रही है, जबकि बिहार में होली 4 मार्च को ही मनाई जाएगी।
स्पेशल ट्रेन की घोषणा का इंतजार
अब तक रेलवे की ओर से होली स्पेशल ट्रेनों की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हर साल होली, दीपावली और छठ जैसे बड़े त्योहारों पर बड़ी संख्या में प्रवासी बिहार लौटते हैं और रेलवे अतिरिक्त ट्रेनें चलाता है। इस बार भी यात्रियों को इसी घोषणा का इंतजार है। अगर जल्द ही स्पेशल ट्रेनों का ऐलान नहीं हुआ, तो लाखों लोगों के लिए घर पहुंचना बेहद कठिन हो जाएगा।
तत्काल टिकट भी नहीं बन पा रहा सहारा
जिन यात्रियों के पास कंफर्म टिकट नहीं है, उनके सामने तत्काल टिकट का विकल्प जरूर है, लेकिन इसमें भी सीटों की संख्या बहुत सीमित होती है। कई बार तत्काल टिकट खुलते ही कुछ ही मिनटों में खत्म हो जाते हैं। पटना निवासी समुन कुमार ने बताया कि उनके एक दोस्त को मुंबई से पटना आना है, लेकिन कंफर्म टिकट नहीं मिल सका। उन्होंने लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस में 126 वेटिंग पर टिकट लिया है। अब उनकी उम्मीद तत्काल टिकट और ऑनलाइन बुकिंग पर टिकी हुई है।
मजदूर और आम वर्ग सबसे ज्यादा परेशान
साधन-संपन्न लोग निजी वाहन, फ्लाइट या महंगे विकल्पों से किसी तरह घर पहुंच सकते हैं, लेकिन आम लोग और मजदूर वर्ग पूरी तरह से ट्रेनों पर निर्भर रहता है। टिकट नहीं मिलने पर कई लोग मजबूरी में जनरल टिकट लेकर स्लीपर या एसी कोच में भी सफर करते हैं। इससे न सिर्फ उन्हें परेशानी होती है, बल्कि रिजर्वेशन करा चुके यात्रियों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
हर त्योहार पर दोहराई जाती है वही कहानी
बिहार में हर साल दीपावली, छठ और होली के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी घर लौटते हैं। इसके बावजूद हर बार टिकटों की भारी किल्लत देखने को मिलती है। बढ़ती आबादी और प्रवासियों की संख्या के मुकाबले ट्रेनों और सीटों की संख्या काफी कम है। यही वजह है कि हर त्योहार पर यात्रियों को इसी तरह की परेशानी झेलनी पड़ती है।
यात्रियों के लिए सलाह और उम्मीद
रेलवे विशेषज्ञों का कहना है कि जिन यात्रियों ने अभी तक टिकट नहीं कराया है, उन्हें लगातार बुकिंग की कोशिश करते रहनी चाहिए। वेटिंग टिकट होने पर भी समय से स्टेशन पहुंचना और तत्काल टिकट के विकल्प पर नजर रखना जरूरी है। साथ ही यात्रा के दौरान धैर्य बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। प्रवासियों को अब सरकार और रेलवे प्रशासन से यही उम्मीद है कि जल्द से जल्द होली स्पेशल ट्रेनों की घोषणा होगी, ताकि त्योहार पर घर लौटने की उनकी मुश्किलें कुछ हद तक कम हो सकें।


