बिहार में जल्द एटीएम से मिलेगा राशन, ग्रेन एटीएम लगाने की योजना, पटना से होगी शुरुआत

पटना। बिहार में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार की पहल पर अब राशन दुकानों पर ग्रेन एटीएम लगाए जाने की योजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को बैंक एटीएम की तर्ज पर मशीन से सीधे चावल, गेहूं और दाल जैसे अनाज मिलेंगे। इसकी शुरुआत राजधानी पटना से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पटना शहरी क्षेत्र में तीन स्थानों पर ग्रेन एटीएम लगाने का प्रस्ताव है। एक-दो दिनों के भीतर इन स्थानों का चयन कर लिया जाएगा। इसके बाद एक से दो महीने के भीतर आम लोगों को इन मशीनों के जरिए राशन मिलने की संभावना है। ग्रेन एटीएम पूरी तरह ऑटोमैटिक मशीन होगी, जो चौबीसों घंटे काम करने में सक्षम रहेगी। यह मशीन केवल पांच मिनट में करीब 50 किलो तक अनाज देने की क्षमता रखती है, जिससे राशन वितरण की प्रक्रिया काफी तेज हो जाएगी। ग्रेन एटीएम से राशन प्राप्त करने के लिए लाभार्थी को मशीन में अपने राशन कार्ड का विवरण दर्ज करना होगा। इसके बाद आधार से लिंक फिंगरप्रिंट के जरिए बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन पूरा होते ही मशीन लाभार्थी के हिस्से का निर्धारित अनाज तौलकर बाहर निकाल देगी। पूरी प्रक्रिया डिजिटल होने के कारण मानव हस्तक्षेप न्यूनतम रहेगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गड़बड़ियों की गुंजाइश कम होगी। सरकार के विशेष सचिव उपेंद्र कुमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार पटना जिले के अधिकारी को इस परियोजना का राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। वे केंद्र सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर पायलट प्रोजेक्ट की निगरानी करेंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राशन वितरण को अधिक तेज, सटीक और भरोसेमंद बनाना है, ताकि राज्य के करीब आठ करोड़ राशन कार्डधारी लाभार्थियों को समय पर और सही मात्रा में अनाज मिल सके। खर्च और जिम्मेदारियों को लेकर भी रूपरेखा तय कर दी गई है। केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार विश्व खाद्य कार्यक्रम यानी डब्ल्यूएफपी ग्रेन एटीएम मशीनों की खरीद, स्थापना, एक साल की वारंटी और एक साल के रखरखाव का खर्च उठाएगा। वहीं मशीन लगाने के लिए जगह तैयार करना, बिजली और इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना, सीसीटीवी कैमरे लगाना, सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक मानव संसाधन की तैनाती जैसी जिम्मेदारियां राज्य सरकार की होंगी। इस तरह तकनीकी लागत केंद्र से जुड़े संस्थान वहन करेंगे, जबकि संचालन की पूरी जिम्मेदारी बिहार सरकार के पास रहेगी। ग्रेन एटीएम को राशन व्यवस्था में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इससे लंबी कतारों में खड़े होकर राशन लेने की मजबूरी काफी हद तक खत्म हो जाएगी। वजन में गड़बड़ी और कम अनाज मिलने जैसी शिकायतों पर भी प्रभावी रोक लगेगी। साथ ही चोरी और कालाबाजारी की संभावनाएं भी कम होंगी, क्योंकि पूरा सिस्टम डिजिटल और बायोमेट्रिक आधारित रहेगा। सबसे अहम बात यह है कि लाभार्थियों को उनका हक बिना किसी बिचौलिए के सीधे मिलेगा। ओडिशा, राजस्थान और हरियाणा के बाद बिहार देश का चौथा राज्य होगा, जहां ग्रेन एटीएम के माध्यम से राशन वितरण शुरू किया जाएगा। यदि पटना में लागू किया गया यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में इसे पूरे राज्य में विस्तार देने की योजना है। इससे बिहार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली देश की सबसे आधुनिक व्यवस्थाओं में शामिल हो सकेगी। राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से न केवल राशन वितरण में पारदर्शिता आएगी, बल्कि आम लोगों का समय भी बचेगा और व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा। आने वाले दिनों में जब ग्रेन एटीएम जमीन पर दिखाई देने लगेंगे, तब यह बदलाव लाखों परिवारों के लिए राहत और सुविधा लेकर आएगा।

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