January 29, 2026

बिहार में अप्रैल से लागू होगी नई कोचिंग नीति, कई नियमों का पालन अनिवार्य, विभाग से जल्द मिलेगी मंजूरी

पटना। बिहार में कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर लगाम लगाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और अनुशासित बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई नई कोचिंग नीति अगले शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत यानी अप्रैल से पूरे राज्य में लागू होने की संभावना है। शिक्षा विभाग ने इस नीति को संशोधित कर अंतिम रूप दे दिया है और अब इसे वित्त एवं विधि विभाग की सहमति के लिए भेजा गया है। इन विभागों से मंजूरी मिलते ही प्रस्ताव को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता वाली कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।
नीति को लेकर सरकार की मंशा साफ
राज्य सरकार का मानना है कि बीते कुछ वर्षों में कोचिंग संस्थानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन इनके संचालन को लेकर कोई ठोस नियमन नहीं था। इसके कारण अभिभावकों और छात्रों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। कहीं मनमानी फीस वसूली की शिकायतें थीं तो कहीं गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे थे। नई कोचिंग नीति के जरिए सरकार का लक्ष्य इन समस्याओं का समाधान करना और कोचिंग व्यवस्था को एक स्पष्ट ढांचे में लाना है।
कैबिनेट के निर्देश के बाद बदला ड्राफ्ट
जानकारी के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही कोचिंग नीति का प्रस्ताव कैबिनेट के पास भेजा गया था। उस समय कैबिनेट ने कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए संशोधन का निर्देश दिया था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने नीति में आवश्यक बदलाव किए और अब इसे दोबारा मंजूरी की प्रक्रिया में आगे बढ़ाया गया है। पहले इसे शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू करने की योजना थी, लेकिन संशोधन और स्वीकृति प्रक्रिया के कारण अब इसे अप्रैल 2026 से लागू करने की तैयारी है।
सरकारी शिक्षकों पर सख्त पाबंदी
नई नीति का सबसे अहम प्रावधान सरकारी शिक्षकों को लेकर है। अब कोई भी सरकारी शिक्षक किसी भी प्रकार के कोचिंग संस्थान में पढ़ा नहीं सकेगा। यदि कोई शिक्षक इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया तो शिक्षा विभाग साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। सरकार का मानना है कि सरकारी शिक्षक यदि निजी कोचिंग में पढ़ाते हैं तो इसका सीधा असर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ता है। इस नियम के जरिए सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और जिम्मेदारी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
सरकारी परिसरों में कोचिंग पर रोक
नई कोचिंग नीति के तहत किसी भी सरकारी स्कूल, कॉलेज या अन्य शैक्षणिक संस्थान के परिसर में कोचिंग संचालन की अनुमति नहीं होगी। कई जिलों में यह देखा गया था कि स्कूल भवनों या सरकारी संस्थानों के कमरों में निजी कोचिंग चलाई जा रही थी। इससे न केवल सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग हो रहा था, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की साख पर भी सवाल उठते थे। नई नीति में इस पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
जिला स्तर पर बनेगी निगरानी व्यवस्था
कोचिंग संस्थानों के संचालन को नियंत्रित करने के लिए जिला स्तर पर एक मजबूत व्यवस्था बनाई जाएगी। प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी। यही समिति जिले में कोचिंग संस्थानों के पंजीकरण और संचालन की अनुमति देगी। बिना पंजीकरण कोई भी कोचिंग संस्थान संचालित नहीं किया जा सकेगा। इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल मानकों पर खरे उतरने वाले संस्थान ही छात्रों को पढ़ा सकें।
फीस को लेकर पारदर्शिता अनिवार्य
नई नीति में फीस को लेकर भी सख्त नियम तय किए गए हैं। कोचिंग संस्थानों को पंजीकरण के समय अपने सभी पाठ्यक्रमों की फीस की पूरी जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही संस्थानों को अपनी फीस सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा, ताकि छात्रों और अभिभावकों को पहले से स्पष्ट जानकारी मिल सके। यदि किसी संस्थान के खिलाफ तय फीस से अधिक राशि वसूलने की शिकायत मिलती है तो अधिकारी स्तर की टीम इसकी जांच करेगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा लाभ
शिक्षा विभाग का दावा है कि इस नीति के लागू होने से छात्रों और अभिभावकों को सीधा फायदा मिलेगा। फीस में पारदर्शिता आने से आर्थिक शोषण रुकेगा और कोचिंग संस्थानों की गुणवत्ता पर भी नजर रखी जा सकेगी। इसके अलावा सरकारी शिक्षकों के निजी कोचिंग से दूर रहने से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर होने की उम्मीद है।
आगे की प्रक्रिया पर नजर
फिलहाल शिक्षा विभाग वित्त और विधि विभाग की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। यदि सब कुछ तय समय पर हुआ तो जल्द ही इसे कैबिनेट की स्वीकृति मिल सकती है। इसके बाद अधिसूचना जारी कर नई कोचिंग नीति को पूरे राज्य में लागू कर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि यह नीति बिहार की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगी और कोचिंग संस्थानों के लिए नए मानक तय करेगी।

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