बैंक कर्मचारियों की देशव्यापी हड़ताल आज, बैंक परिसर में प्रदर्शन, एटीएम सेवाएं ठप

नई दिल्ली। देशभर में आज 27 जनवरी को बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। सरकारी बैंकों के अधिकांश शाखाओं में कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में बैंक परिसरों के बाहर कर्मचारी और अधिकारी प्रदर्शन करते नजर आए। इस हड़ताल का आह्वान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी बैंक यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा किया गया है, जिसमें सरकारी बैंकों और कुछ पुराने निजी बैंकों की यूनियनें शामिल हैं।
आर ब्लॉक परिसर में प्रदर्शन
दिल्ली के आर ब्लॉक कैंपस परिसर में सुबह से ही बड़ी संख्या में बैंककर्मी इकट्ठा होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते दिखे। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए कर्मचारी अपनी प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह हड़ताल उनकी मजबूरी है, क्योंकि सरकार लंबे समय से उनकी जायज मांगों को नजरअंदाज कर रही है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल भी तैनात रहा, हालांकि स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण बनी रही।
हड़ताल से बैंकिंग सेवाएं प्रभावित
हड़ताल के चलते भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बड़े सरकारी बैंकों में नकद जमा, नकद निकासी, चेक समाशोधन और पासबुक अपडेट जैसे काम पूरी तरह बंद रहे। कई जगहों पर बैंक शाखाएं बंद रहीं, जबकि कुछ स्थानों पर सीमित कर्मचारी होने के कारण आंशिक कामकाज ही हो सका। लगातार तीन दिन बैंक बंद रहने से बाजार और आम लोगों में नकदी की कमी साफ तौर पर देखने को मिली।
एटीएम सेवाओं पर भी असर
हड़ताल का असर स्वचालित नकद मशीन यानी एटीएम सेवाओं पर भी पड़ा है। कई इलाकों में एटीएम खाली हो गए या तकनीकी कारणों से बंद रहे। इससे लोगों को नकदी निकालने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खासकर छोटे दुकानदार, दैनिक मजदूर और ग्रामीण इलाकों से आए लोग सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आए। हालांकि कुछ स्थानों पर एटीएम चालू रहे, लेकिन उनमें भी सीमित नकदी उपलब्ध थी।
फाइव डे बैंकिंग की मुख्य मांग
बैंक कर्मचारियों की इस हड़ताल की सबसे बड़ी वजह सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग प्रणाली को लागू करने की मांग है। कर्मचारी चाहते हैं कि बैंकों में भी अन्य सरकारी कार्यालयों की तरह सोमवार से शुक्रवार तक काम हो और शनिवार तथा रविवार को अवकाश मिले। कर्मचारियों का कहना है कि मार्च 2024 में हुए समझौते में सभी शनिवार को छुट्टी देने पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक इसे लागू नहीं किया गया है।
सरकार से हुई बैठक के बाद फैसला
यूनियन नेताओं के अनुसार 23 जनवरी को सरकार और बैंक यूनियनों के बीच बैठक हुई थी, लेकिन उसमें कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। इसी के बाद यूनियन ने काम रोकने का फैसला लिया। कर्मचारियों का कहना है कि वे सोमवार से शुक्रवार तक ज्यादा समय तक काम करने के लिए तैयार हैं, लेकिन शनिवार की छुट्टी अब टाली नहीं जानी चाहिए। उनका मानना है कि लगातार बढ़ते कार्यभार और तनाव को देखते हुए यह फैसला कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता के लिए जरूरी है।
निजी बैंकों में कामकाज सामान्य
यह हड़ताल मुख्य रूप से सरकारी बैंकों तक सीमित रही। एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक जैसे बड़े निजी बैंकों की शाखाएं आज खुली रहीं और वहां कामकाज सामान्य रूप से चलता रहा। निजी बैंकों में ग्राहकों की भीड़ अपेक्षाकृत अधिक देखी गई, क्योंकि सरकारी बैंकों के ग्राहक मजबूरी में वहां सेवाएं लेने पहुंचे।
ग्राहकों की बढ़ी मुश्किलें
हड़ताल के कारण आम ग्राहकों को काफी परेशानी उठानी पड़ी। जिन लोगों को आज जरूरी बैंकिंग काम निपटाने थे, उन्हें निराश लौटना पड़ा। पेंशनधारकों, वेतनभोगी कर्मचारियों और व्यापारियों ने सबसे ज्यादा दिक्कत महसूस की। कई लोगों का कहना था कि पहले से कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें परेशानी झेलनी पड़ी।
यूनियन का पक्ष
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस का कहना है कि यह हड़ताल किसी दबाव या राजनीति के तहत नहीं, बल्कि मजबूरी में की गई है। यूनियन नेताओं का साफ कहना है कि जब अन्य सरकारी विभागों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है, तो बैंक कर्मचारियों को इससे वंचित क्यों रखा जा रहा है। उनका दावा है कि सरकार अगर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे, तो भविष्य में ऐसे आंदोलन की जरूरत नहीं पड़ेगी।
आगे क्या होगा
फिलहाल सरकार या वित्त मंत्रालय की ओर से इस हड़ताल पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अगर बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता है, तो बैंक यूनियन आगे और कड़े कदम उठाने का संकेत दे रही हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बैंकिंग व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है। आम जनता की नजर अब इस पर टिकी है कि सरकार और यूनियन के बीच समझौता कब होता है और बैंकिंग सेवाएं पूरी तरह कब सामान्य होंगी।

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