January 16, 2026

पाकिस्तान में हिंदू युवक की हत्या: हमलावरों ने मारी दो गोलियां, इलाके में सनसनी

नई दिल्ली। दक्षिण एशिया में अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार गहराती जा रही है। हाल के दिनों में बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और हमलों की खबरों ने पहले ही माहौल को संवेदनशील बना दिया था। अब पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आई एक दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वहां अल्पसंख्यक वास्तव में सुरक्षित हैं। सिंध के बदीन जिले में 25 वर्षीय हिंदू युवक और किसान कैलाश कोहली की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिससे पूरे इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया है।
घटना का पूरा घटनाक्रम
यह घटना 4 जनवरी 2026 को बदीन जिले के तालुका तल्हार क्षेत्र के गोथ दाहो, पीरू लशारी इलाके के राही कोल्ही गांव में हुई। जानकारी के अनुसार, कैलाश कोहली अपने गांव में ही मौजूद थे, तभी हमलावर दिनदहाड़े उनके पास पहुंचे। आरोप है कि बेहद नजदीक से उनकी छाती में दो गोलियां मारी गईं। गोली लगते ही कैलाश कोहली की मौके पर ही मौत हो गई। इस निर्मम हत्या ने पूरे इलाके को दहला दिया। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस हत्या का आरोप एक प्रभावशाली जमींदार सरफराज निजामानी पर लगाया गया है। बताया जा रहा है कि विवाद जमींदार की जमीन पर झोपड़ी बनाने को लेकर हुआ था, जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले बैठा और इसका अंत एक युवक की जान जाने के साथ हुआ।
कैलाश कोहली की सामाजिक भूमिका
कैलाश कोहली केवल एक किसान ही नहीं थे, बल्कि वे इलाके में एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी जाने जाते थे। वे स्थानीय समस्याओं को उठाने, गरीब किसानों की आवाज बनने और हिंदू अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात करने के लिए पहचाने जाते थे। सिंध के ग्रामीण इलाकों में हिंदू समुदाय पहले से ही सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक रूप से हाशिए पर है। ऐसे माहौल में कैलाश जैसे लोगों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती थी। उनकी हत्या को स्थानीय हिंदू समुदाय सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि पूरे समुदाय पर हमला मान रहा है।
इलाके में फैला तनाव और विरोध प्रदर्शन
घटना के बाद बदीन जिले और आसपास के क्षेत्रों में भारी तनाव फैल गया। आक्रोशित ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। बदीन-हैदराबाद नेशनल हाईवे और बदीन-थार कोल रोड पर धरना देकर सड़क जाम कर दी गई। सैकड़ों वाहन घंटों तक फंसे रहे, जिससे आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। इससे पहले पीड़ित परिवार और समुदाय के लोगों ने कैलाश कोहली का शव पीरू लशारी स्टॉप पर रखकर प्रदर्शन किया था। उस दौरान बदीन के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने 24 घंटे के भीतर आरोपी की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया था। हालांकि, चार दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है।
सोशल मीडिया पर गूंजता आक्रोश
इस हत्या को लेकर सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। विभिन्न हैशटैग के जरिए लोग न्याय की मांग कर रहे हैं और सिंध सरकार से तुरंत कार्रवाई की अपील कर रहे हैं। अल्पसंख्यक अधिकार कार्यकर्ता और पाकिस्तान दरावर इत्तेहाद के अध्यक्ष शिवा कच्छी ने इस विरोध प्रदर्शन को ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि कैलाश कोहली के हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर चल रहा धरना बिना किसी रुकावट के जारी है। उनके अनुसार, यह आंदोलन सिर्फ एक दिन या कुछ घंटों का नहीं, बल्कि लगातार जारी रहने वाला संघर्ष बन चुका है।
समुदाय की पीड़ा और डर
स्थानीय हिंदू समुदाय का कहना है कि वे वर्षों से जबरन धर्मांतरण, अपहरण, जमीन विवाद और हिंसक धमकियों जैसी समस्याओं का सामना करते आ रहे हैं। कैलाश कोहली की हत्या ने उनके भीतर पहले से मौजूद डर को और गहरा कर दिया है। प्रदर्शन में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हो रहे हैं, जो यह दिखाता है कि यह दर्द पूरे समुदाय का है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका संघर्ष केवल एक हत्या के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है, जहां ताकतवर लोगों को संरक्षण मिलता है और कमजोर, गरीब तथा अल्पसंख्यक समुदायों को न्याय के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है।
सरकारी प्रतिक्रिया और मानवाधिकार पहलू
सिंध सरकार के प्रवक्ता और सिंध ह्यूमन राइट्स कमीशन के सदस्य सुखदेव हेमनानी ने इस हत्या को समाज की अंतरात्मा पर गहरा घाव बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ित परिवार के संपर्क में है और पुलिस को दोषियों की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले को सिंध मानवाधिकार आयोग के माध्यम से भी उठाया गया है और 13 जनवरी तक पुलिस कार्रवाई पर रिपोर्ट मांगी गई है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पाकिस्तान में अक्सर ऐसे मामलों में जांच और नोटिस तो जारी होते हैं, लेकिन दोषियों को सजा मिलने की घटनाएं बेहद कम होती हैं। इससे दंडहीनता का माहौल बनता है, जो भविष्य में ऐसे अपराधों को और बढ़ावा देता है।
बड़ा सवाल और चिंता
बांग्लादेश से लेकर पाकिस्तान तक सामने आ रही घटनाएं यह संकेत देती हैं कि भारत के बाहर दक्षिण एशिया के कई देशों में हिंदू अल्पसंख्यक लगातार असुरक्षा, भेदभाव और हिंसा का सामना कर रहे हैं। कैलाश कोहली की हत्या ने एक बार फिर यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या क्षेत्र के देश अपने सबसे कमजोर नागरिकों की सुरक्षा करने में असफल हो चुके हैं। जब तक दोषियों को सख्त सजा नहीं मिलेगी, तब तक ऐसे सवाल और डर यूं ही बने रहेंगे।

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