पटना में एका-एक धूप के बीच बढ़ी कनकनी, बर्फीली हवाओं से जनजीवन अस्त-व्यस्त
पटना। राजधानी पटना में मौसम कुछ हद तक राहत भरा नजर आया। आसमान साफ था और धूप निकलने से लोगों को लगा कि कड़ाके की ठंड से थोड़ी निजात मिलेगी। सुबह-सुबह बाजारों, सड़कों और दफ्तर जाने वाले रास्तों पर सामान्य चहल-पहल दिखी। लोग गर्म कपड़ों के साथ अपने काम पर निकले और कई दिनों बाद धूप सेंकने का अवसर पाकर बुजुर्गों और बच्चों के चेहरों पर भी सुकून नजर आया। खेतों में मजदूरों ने भी धूप को देखते हुए काम की रफ्तार बढ़ाने की कोशिश की।
दोपहर बाद बदला मौसम का मिजाज
हालांकि यह राहत ज्यादा देर तक टिक नहीं पाई। दोपहर होते-होते अचानक मौसम का रुख बदल गया। धूप के बीच ही तेज और बर्फीली पछुआ हवाएं चलने लगीं। इन ठंडी हवाओं ने कनकनी को इतना बढ़ा दिया कि लोगों को फिर से कड़ाके की ठंड का एहसास होने लगा। जो लोग हल्के कपड़ों में निकले थे, उन्हें अचानक ठिठुरन महसूस होने लगी। सड़कों पर लोग गर्दन और हाथ ढंकते हुए जल्दी-जल्दी चलते नजर आए।
शाम और सुबह में घने कोहरे का असर
देर शाम होते ही ठंड का असर और तेज हो गया। रात और सुबह-सुबह घना कोहरा छाने से दृश्यता काफी कम हो गई, जिसका सीधा असर आवागमन पर पड़ा। सड़कों पर वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। कई जगहों पर कोहरे के कारण गति धीमी हो गई, जिससे लोगों को दफ्तर, स्कूल और बाजार पहुंचने में अतिरिक्त समय लगा। कोहरे और ठंडी हवाओं के इस दोहरे असर ने जनजीवन को एक बार फिर अस्त-व्यस्त कर दिया।
मजदूरों और किसानों की बढ़ी परेशानी
अचानक बढ़ी ठंड का सबसे ज्यादा असर खेत-खलिहानों में काम करने वाले मजदूरों पर पड़ा है। तेज ठंडी हवाओं के बीच खुले खेतों में काम करना बेहद कठिन हो गया है। कई जगहों पर मजदूरों को बार-बार काम रोककर अलाव के पास हाथ सेंकते देखा गया। ठंड के कारण काम की गति धीमी पड़ गई है, जिससे कृषि कार्य प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि अगर यही हाल रहा, तो फसलों की देखभाल और कटाई के काम में देरी हो सकती है।
पशुपालकों की चिंता बढ़ी
ग्रामीण इलाकों में ठंड का असर पशुपालन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सुबह के समय पशुपालक अपने पशुओं को देर से घरों से बाहर निकाल रहे हैं, ताकि उन्हें ठंडी हवा और कोहरे से बचाया जा सके। शाम ढलते ही लोग गौशालाओं में अलाव जलाकर पशुओं को ताप देने में जुट जा रहे हैं। पशुपालकों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम और बर्फीली हवाओं के कारण पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, जिससे दूध उत्पादन में भी कमी आ सकती है।
पोल्ट्री व्यवसाय पर शीतलहर का दबाव
शीतलहर का असर पोल्ट्री फार्म पर भी नजर आने लगा है। ठंड के कारण कई जगहों पर मुर्गियां बीमार पड़ रही हैं। फार्म संचालकों को तापमान नियंत्रित रखने के लिए अतिरिक्त हीटर और लाइट की व्यवस्था करनी पड़ रही है, जिससे लागत बढ़ गई है। पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर ठंड का यह सिलसिला लंबा चला, तो उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
मछली पालन पर भी प्रतिकूल प्रभाव
केवल पशुपालन ही नहीं, बल्कि मछली पालन भी इस मौसम से प्रभावित हो रहा है। तालाबों का पानी अत्यधिक ठंडा होने से मछलियों की सक्रियता कम हो गई है। मछली पालकों का कहना है कि ठंड के कारण मछलियां कम चारा खा रही हैं, जिससे उनके विकास और उत्पादन पर असर पड़ सकता है। यदि तापमान इसी तरह गिरता रहा, तो आने वाले दिनों में मछली उत्पादन में कमी आने की आशंका है।
पूरे बिहार में एक जैसा हाल
यह स्थिति केवल पटना तक सीमित नहीं है। बिहार के लगभग सभी हिस्सों में मौसम का यही बदला हुआ मिजाज देखने को मिल रहा है। कहीं धूप निकल रही है तो कहीं अचानक तेज ठंडी हवाएं चलने लगती हैं। दिन और रात के तापमान में उतार-चढ़ाव से लोग असमंजस में हैं कि मौसम किस करवट बैठेगा। मौसम के इस अनिश्चित व्यवहार ने साफ कर दिया है कि फिलहाल ठंड से राहत की उम्मीद कम ही है।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी सावधानी
अचानक बढ़ी ठंड के कारण सर्दी, खांसी और बुखार के मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। डॉक्टरों की सलाह है कि लोग गर्म कपड़े पहनें, ठंडी हवा से बचें और सुबह-शाम विशेष सावधानी बरतें। बच्चों और बुजुर्गों को खास तौर पर ठंड से बचाने की जरूरत बताई जा रही है।
आगे भी सतर्क रहने की जरूरत
मौसम के इस बदले मिजाज ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में भी ठंड अपना असर बनाए रख सकती है। धूप भले ही कुछ समय के लिए राहत दे, लेकिन बर्फीली हवाओं के कारण कनकनी से पूरी तरह छुटकारा मिलना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसे में लोगों को सतर्कता बरतते हुए अपने दैनिक जीवन और कामकाज को आगे बढ़ाना होगा। पटना और पूरे बिहार में धूप और ठंडी हवाओं के इस खेल ने जनजीवन को एक बार फिर प्रभावित कर दिया है। सुबह की धूप ने थोड़ी राहत जरूर दी, लेकिन दोपहर बाद चली बर्फीली हवाओं ने कनकनी बढ़ाकर ठंड का अहसास फिर से गहरा कर दिया। मजदूरों, किसानों, पशुपालकों और आम लोगों सभी के लिए यह मौसम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। फिलहाल यही संकेत मिल रहे हैं कि ठंड से राहत के लिए लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा।


