जमुई में तीन बच्चों के साथ कुएं में कूदी महिला: दो मासूमों की दर्दनाक मौत, महिला और एक का किया गया रेस्क्यू
जमुई। जिले के सोनो थाना क्षेत्र के छपरडीह गांव में घटी यह घटना न सिर्फ दिल दहला देने वाली है, बल्कि पारिवारिक तनाव, आर्थिक दबाव और आपसी रिश्तों में आई दरार को भी उजागर करती है। एक महिला द्वारा अपने ही तीन मासूम बच्चों के साथ कुएं में छलांग लगाने की यह घटना पूरे इलाके को स्तब्ध कर गई। इस हादसे में दो बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि महिला और एक बच्ची को ग्रामीणों की तत्परता से बचा लिया गया।
घटना का विवरण
गुरुवार देर शाम छपरडीह गांव में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब ग्रामीणों ने गांव के एक कुएं के पास शोर-शराबा सुना। जानकारी मिलने पर लोग दौड़ते हुए वहां पहुंचे। पता चला कि 32 वर्षीय रुबेशां खातून ने अपने तीन बच्चों के साथ करीब 40 फीट गहरे कुएं में छलांग लगा दी है। ग्रामीणों ने बिना देर किए बचाव कार्य शुरू किया। रस्सियों की मदद से कुएं में उतरकर महिला और एक बच्ची को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक दो मासूम बच्चों की जान जा चुकी थी।
मृतकों और घायलों की पहचान
इस दर्दनाक घटना में पांच वर्षीय अमीर अंसारी और आठ वर्षीय अनीश खातून की डूबने से मौत हो गई। वहीं, रुबेशां खातून और उनकी एक बच्ची को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया और इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। चिकित्सकों के अनुसार महिला की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।
घटना के पीछे की पृष्ठभूमि
ग्रामीणों के अनुसार, रुबेशां खातून का अपने पति और ससुराल पक्ष से पारिवारिक विवाद चल रहा था। बताया गया कि महिला का पति शमशेर अंसारी सूरत में काम करता है और वह अक्सर बाहर ही रहता है। महिला अपने बच्चों के साथ गांव में सास-ससुर से अलग घर बनाकर रहती थी। गुरुवार को प्रॉपर्टी और पारिवारिक मुद्दों को लेकर उसकी सास से कहासुनी हुई थी। इसी दौरान फोन पर पति से भी बहस हुई, जिसमें कथित तौर पर पति ने गुस्से में उसे आत्मघाती बात कह दी। इसके बाद मानसिक रूप से आहत महिला बच्चों को लेकर घर से निकल गई।
ग्रामीणों की आंखों-देखी
गांव वालों का कहना है कि महिला कुछ देर तक कुएं के पास बैठी रही। किसी को अंदाजा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगी। अचानक उसने एक-एक कर बच्चों को कुएं में फेंक दिया और फिर खुद भी कूद गई। महिला के कुएं में कूदते ही गांव में हल्ला मच गया। लोगों ने बिना अपनी जान की परवाह किए कुएं में उतरकर बचाव की कोशिश की, लेकिन गहराई अधिक होने के कारण दो बच्चों को नहीं बचाया जा सका।
परिवार का पक्ष
घटना के बाद मृत बच्चों के दादा मोहम्मद मुलताज ने एक अलग ही कहानी बताई। उनके अनुसार, यह घटना आत्महत्या की नहीं बल्कि एक हादसे की थी। उन्होंने कहा कि रुबेशां खातून अपने बच्चों के साथ मायके जा रही थी। रास्ते में बच्चों के बीच आपसी झगड़ा हो गया, दौड़ते समय एक बच्ची का पैर फिसल गया और वह कुएं में गिर गई। उसे बचाने के लिए दूसरा बच्चा भी कुएं में कूद गया। कुआं गहरा होने के कारण दोनों बच्चे डूब गए। उन्होंने यह भी कहा कि पति-पत्नी के बीच कोई गंभीर विवाद नहीं था और दोनों के संबंध सामान्य थे।
आर्थिक और सामाजिक स्थिति
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। पति के बाहर रहने के कारण घर की जिम्मेदारियां महिला पर ही थीं। मायके वालों की मदद से किसी तरह घर का खर्च चलता था। आर्थिक तंगी और पारिवारिक दबाव के चलते पति-पत्नी के बीच तनाव बना रहता था, जो इस घटना की एक अहम वजह मानी जा रही है।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही सोनो थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। थाने के एसआई नन्हे कुमार दुबे ने बताया कि महिला और एक बच्ची को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है। दो बच्चों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। पुलिस परिवार वालों से पूछताछ कर रही है और महिला के स्वस्थ होने के बाद उसका बयान भी लिया जाएगा। वहीं थाना प्रभारी धरमेंद्र कुमार ने बताया कि परिजनों ने पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया है, हालांकि पुलिस अपने स्तर से मामले की जांच कर रही है।
समाज के लिए एक गंभीर संदेश
यह घटना समाज के सामने कई सवाल खड़े करती है। पारिवारिक विवाद, आर्थिक तनाव और मानसिक दबाव किस तरह इंसान को इस हद तक तोड़ सकते हैं कि वह ऐसा खौफनाक कदम उठा ले, यह सोचने पर मजबूर करता है। यह हादसा इस बात की भी याद दिलाता है कि समय रहते संवाद, सहयोग और मानसिक समर्थन कितना जरूरी है, ताकि किसी परिवार में हालात इतने बिगड़ने से पहले ही संभाले जा सकें।


