पटना में गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा पहुंचे सीएम नीतीश, टेका मत्था, देश विदेश से आए श्रद्धालु
पटना। सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज का प्रकाश पर्व पटना सिटी स्थित तख्त श्री हरमंदिर साहिब में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ मनाया जा रहा है। यह पावन स्थल गुरु गोविंद सिंह जी की जन्मस्थली होने के कारण सिख श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। प्रकाश पर्व के अवसर पर न केवल बिहार, बल्कि देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पटना साहिब पहुंच रहे हैं, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया है।
कीर्तन-गुरबाणी से गूंजता तख्त श्री हरमंदिर साहिब
प्रकाश पर्व के दूसरे दिन तख्त श्री हरमंदिर साहिब में विशेष कीर्तन-गुरबाणी का आयोजन किया गया। विभिन्न रागी जत्थों ने गुरु ग्रंथ साहिब की पावन वाणी का मधुर गायन प्रस्तुत किया। कीर्तन की स्वर लहरियों ने संगत को आध्यात्मिक शांति और भक्ति रस से सराबोर कर दिया। गुरुद्वारा परिसर में मौजूद श्रद्धालु पूरे मनोयोग से गुरुबाणी का श्रवण करते नजर आए। वातावरण में ऐसी अनुभूति थी मानो गुरु साहिब स्वयं अपनी संगत को आशीर्वाद दे रहे हों।
भव्य शोभा यात्रा और श्रद्धालुओं का उत्साह
प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में एक भव्य शोभा यात्रा भी निकाली गई, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। शोभा यात्रा के दौरान ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। धार्मिक झांकियां, गतका के साहसी प्रदर्शन और रागी जत्थों के कीर्तन ने शोभा यात्रा को और भी आकर्षक बना दिया। यह शोभा यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक थी, बल्कि गुरु गोविंद सिंह जी के शौर्य, त्याग और मानवता के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम भी बनी।
देश-विदेश से आए श्रद्धालु और व्यापक व्यवस्थाएं
प्रकाश पर्व के अवसर पर देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए तख्त श्री हरमंदिर साहिब प्रबंधन, विभिन्न गुरुद्वारों और बिहार सरकार द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन, स्नान और विश्राम की समुचित व्यवस्था की गई है। विशेष रूप से बाल लीला गुरुद्वारा में आने वाली संगतों के लिए 24 घंटे लंगर की सेवा निरंतर जारी है। लंगर में बिना किसी भेदभाव के सभी श्रद्धालुओं को प्रेम और सेवा भाव से भोजन कराया जा रहा है, जो सिख धर्म की समानता और सेवा की भावना को दर्शाता है।
लंगर सेवा और स्वयंसेवकों की भूमिका
बाल लीला गुरुद्वारा प्रबंधन ने स्वयंसेवकों की विशेष तैनाती की है, जो श्रद्धालुओं की हर संभव सहायता कर रहे हैं। कश्मीर सिंह भूरी वाले बाबा जी ने जानकारी दी कि प्रकाश पर्व के लिए देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रहने, खाने और पीने की पूरी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि पटना के कंगन घाट पर एक विशाल लंगर हॉल स्थापित किया गया है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु लंगर ग्रहण कर रहे हैं। यह सेवा भावना गुरु गोविंद सिंह जी के उस संदेश को साकार करती है, जिसमें उन्होंने मानवता की सेवा को सर्वोपरि माना।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गुरुद्वारा आगमन
प्रकाश पर्व के दूसरे दिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सुबह अचानक पटना सिटी स्थित तख्त श्री हरमंदिर साहिब पहुंचे। उन्होंने गुरुद्वारा में मत्था टेका और श्रद्धालुओं से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं के ठहरने और अन्य सुविधाओं का जायजा लिया तथा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उनकी उपस्थिति से श्रद्धालुओं में उत्साह और विश्वास का भाव देखने को मिला। तख्त श्री हरमंदिर साहिब के महासचिव इंद्रजीत सिंह ने जानकारी दी कि 27 दिसंबर को भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पटना साहिब गुरुद्वारा आने का कार्यक्रम है।
सरकारी इंतजाम और सुरक्षा व्यवस्था
प्रकाश पर्व को शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए बिहार सरकार की ओर से विशेष इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार निगरानी रखे हुए हैं, वहीं सफाईकर्मी और स्वास्थ्यकर्मी भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन व्यवस्थाओं के कारण श्रद्धालु निश्चिंत होकर गुरुपर्व में शामिल हो पा रहे हैं।
भक्ति, सेवा और एकता का संगम
प्रकाश पर्व के दूसरे दिन पटना सिटी में भक्ति, सेवा और एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। गुरु गोविंद सिंह जी के जीवन, उनके बलिदान और उनके आदर्शों का स्मरण करते हुए श्रद्धालुओं ने आपसी भाईचारे और मानवता के संदेश को आत्मसात किया। यह पर्व न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि समाज को समानता, साहस और सेवा का मार्ग दिखाने वाला प्रेरणास्रोत भी है। पटना साहिब में मनाया जा रहा यह प्रकाश पर्व गुरु गोविंद सिंह जी के आदर्शों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता नजर आया।


