पीएम मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति को लिखा पत्र, कहा- मुसीबत में हम साथ खड़े, हरसंभव मदद का दिया भरोसा
नई दिल्ली। चक्रवात दित्वाह के बाद श्रीलंका को भारी मानवीय और भौतिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। ऐसे कठिन समय में भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी और मित्रता का परिचय दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके को एक पत्र लिखकर न केवल संवेदना व्यक्त की, बल्कि हरसंभव सहायता का भरोसा भी दिलाया। यह पत्र भारत की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें संकट की घड़ी में पड़ोसी देशों के साथ खड़े रहने को प्राथमिकता दी जाती है।
प्रधानमंत्री मोदी का भावनात्मक संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि भारत और श्रीलंका के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और ऐतिहासिक जुड़ाव पर आधारित हैं। उन्होंने लिखा कि चक्रवात के कारण जिन परिवारों और समुदायों को नुकसान हुआ है, उनके प्रति भारत की गहरी संवेदना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में श्रीलंका के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और जीवन को फिर से सामान्य पटरी पर लाने में हरसंभव सहयोग करेगा।
ऑपरेशन सागर बंधु की भूमिका
पत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सागर बंधु का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत भारतीय नौसेना, वायुसेना और अन्य एजेंसियों ने मिलकर राहत और बचाव कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। भारतीय जहाजों, विमानों और हेलिकॉप्टरों के माध्यम से राहत सामग्री, आपातकालीन उपकरण और आवश्यक वस्तुएं श्रीलंका पहुंचाई गईं। इस अभियान का उद्देश्य केवल तत्काल सहायता देना नहीं था, बल्कि संकट के समय भरोसेमंद साझेदार के रूप में खड़ा होना था।
खोज, बचाव और चिकित्सा सहायता
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में यह भी रेखांकित किया कि भारतीय दलों ने श्रीलंका में खोज और बचाव अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कई प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में भारतीय टीमों ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम किया। इसके साथ ही चिकित्सा आपात स्थितियों से निपटने में भी भारत की ओर से मदद पहुंचाई गई। दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और विशेषज्ञों की सहायता से घायलों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली।
संचार और संपर्क व्यवस्था बहाल करने में सहयोग
चक्रवात के बाद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक संपर्क और संचार व्यवस्था का ठप हो जाना था। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में बताया कि भारतीय दलों ने संचार नेटवर्क को बहाल करने में भी अहम भूमिका निभाई। इससे राहत कार्यों को तेजी मिली और प्रभावित इलाकों तक मदद पहुंचाना आसान हुआ। उन्होंने कहा कि इस सहयोग से न केवल तत्काल संकट से निपटने में मदद मिली, बल्कि पुनर्निर्माण की प्रक्रिया के लिए भी आधार तैयार हुआ।
पड़ोसी पहले और पहले प्रतिक्रिया देने की नीति
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र में भारत की पड़ोसी पहले नीति और पहले प्रतिक्रिया देने की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सागर बंधु इसी नीति का प्रत्यक्ष उदाहरण है। भारत मानता है कि पड़ोसी देशों की सुरक्षा और समृद्धि से ही पूरे क्षेत्र की स्थिरता सुनिश्चित होती है। इसी सोच के तहत भारत ने बिना किसी देरी के श्रीलंका की मदद के लिए कदम उठाया और आगे भी यह सहयोग जारी रहेगा।
पुनर्निर्माण में दीर्घकालिक साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की भूमिका केवल आपात राहत तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने लिखा कि अब जब श्रीलंका पुनर्निर्माण के अगले चरण की ओर बढ़ रहा है, तब भारत एक भरोसेमंद साझेदार और सच्चे मित्र के रूप में हर स्तर पर सहयोग करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि श्रीलंका इस संकट से उबरकर पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरेगा और विकास व प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगा।
आर्थिक सहायता पैकेज का संकेत
प्रधानमंत्री मोदी के पत्र में व्यापक सहायता पैकेज का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भारत श्रीलंका को आर्थिक और तकनीकी सहायता प्रदान करेगा, ताकि पुनर्निर्माण कार्यों को गति मिल सके। इसी संदर्भ में विदेश मंत्री एस जयशंकर का हालिया बयान भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने बताया कि भारत ने चक्रवात के बाद श्रीलंका के पुनर्निर्माण के लिए 45 करोड़ अमेरिकी डॉलर के सहायता पैकेज का प्रस्ताव रखा है।
भारत-श्रीलंका संबंधों की मजबूती
प्रधानमंत्री का यह पत्र केवल एक औपचारिक संवाद नहीं, बल्कि भारत-श्रीलंका के मजबूत और भरोसेमंद रिश्तों का प्रतीक है। संकट के समय दिया गया सहयोग दोनों देशों के बीच विश्वास को और गहरा करता है। यह संदेश भी स्पष्ट करता है कि भारत क्षेत्रीय सहयोग और मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि मानता है।
भविष्य की राह और सहयोग की उम्मीद
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पत्र के अंत में यह विश्वास व्यक्त किया कि श्रीलंका जल्द ही इस आपदा से उबरकर विकास के नए अध्याय की शुरुआत करेगा। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में भारत हमेशा उसके साथ रहेगा। यह पत्र न केवल श्रीलंका के लिए संबल है, बल्कि दक्षिण एशिया में सहयोग, एकजुटता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम भी माना जा रहा है।


