चुनाव के लिए जदयू की दूसरी लिस्ट जारी: 44 उम्मीदवारों को टिकट, राजवल्लभ की पत्नी और चेतन आनंद को मैदान में उतारा
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच जनता दल (यूनाइटेड) ने गुरुवार को अपनी दूसरी उम्मीदवार सूची जारी कर दी। इस सूची में कुल 44 नाम शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही पार्टी ने 101 सीटों पर अपने सभी प्रत्याशियों की घोषणा पूरी कर ली है। इस लिस्ट में कई नए चेहरे हैं, तो कुछ पुराने नेताओं को दोबारा मौका मिला है। वहीं कुछ विवादित और चर्चित नामों ने भी इस सूची में जगह बनाई है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
प्रमुख उम्मीदवार और चर्चित नाम
दूसरी सूची में सबसे ज्यादा चर्चा उस वक्त हुई जब नीतीश कुमार ने राजवल्लभ यादव की पत्नी को टिकट दिया। राजवल्लभ यादव वही नेता हैं जिन्होंने कभी तेजस्वी यादव की पत्नी राजश्री की तुलना “जर्सी गाय” से की थी। अब उनकी पत्नी को चुनावी मैदान में उतारने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है।
इसके अलावा बाहुबली नेता आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद को भी टिकट मिला है। उन्हें औरंगाबाद के नवीनगर से उम्मीदवार बनाया गया है। चेतन आनंद 2020 में शिवहर से विधायक चुने गए थे, लेकिन इस बार उन्हें नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस लिस्ट में 9 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है, जबकि 4 मुस्लिम चेहरों को भी शामिल किया गया है, जो जदयू के सामाजिक संतुलन की रणनीति को दर्शाता है।
पहली लिस्ट में पुराने विधायकों को मौका
इससे पहले बुधवार को जारी पहली सूची में 57 उम्मीदवारों के नाम थे। उस सूची में 18 मौजूदा विधायकों को दोबारा टिकट मिला था, जबकि 4 विधायकों का टिकट काट दिया गया। पहली लिस्ट में तीन बाहुबलियों को भी उम्मीदवार बनाया गया — मोकामा से अनंत सिंह, एकमा से धूमल सिंह और कुचायकोट से अमरेंद्र पांडेय।
जदयू ने 2020 में हिलसा से मात्र 12 वोटों से जीतने वाले कृष्ण मुरारी शरण उर्फ प्रेम मुखिया को एक बार फिर उसी सीट से मैदान में उतारा है। पार्टी का मानना है कि वह इस बार बड़ी जीत दर्ज करेंगे।
गठबंधन समीकरण और सीटों का बंटवारा
2025 के विधानसभा चुनाव में जदयू 101 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। भाजपा और जदयू के बीच बराबरी के आधार पर 101-101 सीटों का बंटवारा हुआ है, जबकि शेष 41 सीटें एनडीए के अन्य सहयोगी दलों में बांटी गई हैं। हालांकि, सीट शेयरिंग को लेकर अब विवाद की स्थिति बन गई है। नीतीश कुमार ने चिराग पासवान के दावे वाली पांच सीटों — सोनबरसा, अलौली, राजगीर, एकमा और मोरबा — पर अपने उम्मीदवार उतार दिए हैं। इससे यह संकेत मिल रहा है कि नीतीश कुमार ने एनडीए के तय फॉर्मूले को बदल दिया है। दरअसल, एलजेपी (रामविलास) को कुल 29 सीटें मिली हैं, लेकिन जिन पांच सीटों पर जदयू ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं, वहां चिराग पासवान भी दावेदारी जता चुके हैं। ऐसे में एनडीए के अंदर तनाव की स्थिति बनने की आशंका है।
भाजपा के लिए छोड़ी गई सीटें
नीतीश कुमार ने इस बार कुछ अहम सीटें भाजपा के लिए छोड़ दी हैं। उन्होंने अपनी सिटिंग सीट तारापुर को भाजपा के खाते में दे दिया है, जहां से डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी चुनाव लड़ेंगे। इसके अलावा परबत्ता सीट भी गठबंधन धर्म निभाते हुए भाजपा के लिए छोड़ी गई है। 2020 में ये दोनों सीटें जदयू के हिस्से में थीं।
चुनावी तारीखें और राजनीतिक माहौल
इस बार विधानसभा चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे। पहले चरण में 6 नवंबर को 121 सीटों पर मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को 122 सीटों पर होगा। मतगणना 14 नवंबर को होगी।
राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प होने वाला है। एक ओर एनडीए गठबंधन अपनी एकजुटता दिखाने की कोशिश में है, वहीं विपक्षी गठबंधन एनडीए के भीतर सीट बंटवारे के मतभेदों को मुद्दा बना रहा है।
महिला और अल्पसंख्यक उम्मीदवारों पर जोर
जदयू की इस बार की सूची में महिलाओं और अल्पसंख्यकों को प्राथमिकता देने की झलक स्पष्ट है। पार्टी ने 9 महिलाओं को टिकट देकर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया है। इसके साथ ही 4 मुस्लिम उम्मीदवारों को मौका देकर जदयू ने सामाजिक समरसता और अल्पसंख्यक समुदाय के समर्थन को बनाए रखने की कोशिश की है। जदयू की दूसरी सूची ने बिहार की चुनावी राजनीति को और गरमा दिया है। नीतीश कुमार जहां गठबंधन के भीतर संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं कुछ सीटों पर चिराग पासवान के साथ टकराव की स्थिति ने सियासी समीकरणों को जटिल बना दिया है। बाहुबली और चर्चित चेहरों को टिकट देकर जदयू ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह हर वर्ग और क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। अब देखना यह होगा कि नीतीश कुमार की यह रणनीति मतदाताओं को कितना रास आती है और 14 नवंबर को आने वाले नतीजे उनकी इस नीति को कितनी मजबूती प्रदान करते हैं।




