मुकेश सहनी का केंद्र पर बड़ा हमला, कहा- मोदी और शाह बताएं की बिहार में फैक्ट्री कब लगेगी, पलायन कब रुकेगा
पटना। बिहार की राजनीति में चुनावी सरगर्मी जैसे-जैसे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नेताओं के बयान भी तीखे होते जा रहे हैं। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने हाल ही में केंद्र सरकार और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला बोला। उन्होंने बिहार के बुनियादी सवालों को उठाते हुए पूछा कि आखिर बिहार में फैक्ट्री कब लगेगी और पलायन कब रुकेगा।
पलायन को लेकर गंभीर सवाल
मुकेश सहनी ने कहा कि बिहार का सबसे बड़ा दर्द पलायन है। हजारों-लाखों लोग रोजगार की तलाश में बिहार छोड़कर दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों का रुख करते हैं। उन्होंने बताया कि कई गाँव तो ऐसे हैं जो पलायन के कारण पूरी तरह से युवकविहीन हो चुके हैं। सहनी ने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार बार-बार विकास की बात करती है, तब बिहार के लोगों के लिए रोजगार सृजन पर कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए?
बिहार को मजदूर सप्लाई वाला प्रदेश बनाने का आरोप
अपने बयान में सहनी ने केंद्र सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है मानो केंद्र की योजना ही यही है कि बिहार को सिर्फ मजदूर सप्लाई करने वाला प्रदेश बनाकर रखा जाए। लोग पढ़-लिखकर या तो दूसरे राज्यों में मजदूरी करें या वहीं नौकरी करें, लेकिन अपने राज्य में उन्हें अवसर न मिलें। यह स्थिति न केवल बिहार की आर्थिक कमजोरी को दिखाती है, बल्कि राज्य के गौरव और स्वाभिमान को भी ठेस पहुंचाती है।
उद्योग स्थापना को लेकर सरकार पर तंज
मुकेश सहनी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अब जब चुनाव का समय आ गया है, तब उद्योग लगाने की बातें की जा रही हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि इनकी चिंता उद्योग लगाने की नहीं, बल्कि वोट बटोरने की है। लोगों को फिर से सब्जबाग दिखाकर चुनाव जीतने की कोशिश की जा रही है। सहनी ने कहा कि बीते 20 साल से नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं, वहीं मोदी सरकार को भी 11 साल हो चुके हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि इतने लंबे कार्यकाल में बिहार को क्या मिला और कितनी फैक्ट्रियां स्थापित की गईं?
महागठबंधन की नीति और नया बिहार का वादा
सहनी ने अपने संबोधन में महागठबंधन की नीतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की नीति और नियत साफ है। वे एक नए बिहार का सपना लेकर चल रहे हैं, जिसमें लोगों को रोजगार और नौकरी अपने ही जिलों में मिले। उन्होंने वादा किया कि अगर अवसर मिला तो बिहार के युवाओं को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर
सहनी ने केवल रोजगार और उद्योग की बात नहीं की, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बिहार के लोग इलाज और पढ़ाई के लिए आज भी बड़े पैमाने पर बाहर जाते हैं। चाहे दिल्ली के अस्पताल हों या कोटा और अन्य शहरों के कोचिंग संस्थान, बिहार के लाखों लोग मजबूरी में पलायन करते हैं। अगर राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्था मजबूत हो जाए, तो यह पलायन काफी हद तक रुक सकता है।
चुनावी माहौल और राजनीतिक चुनौती
मुकेश सहनी के इस बयान को आने वाले चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। उनका हमला साफ तौर पर भाजपा और जदयू की ओर था, जो लंबे समय से बिहार की सत्ता में साझेदार रहे हैं। उन्होंने जनता को यह संदेश देने की कोशिश की कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर भी बिहार को वह सम्मान और अवसर नहीं दे पाईं, जिसकी उसे जरूरत थी। मुकेश सहनी का बयान सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि बिहार की जमीनी हकीकत की ओर इशारा करता है। पलायन, बेरोजगारी, उद्योग की कमी, शिक्षा और स्वास्थ्य की बदतर स्थिति आज भी बिहार की सबसे बड़ी समस्याएं हैं। चुनावी समय में इन मुद्दों को उठाना यह दर्शाता है कि जनता के मन में ये सवाल कितने गहरे हैं। अब देखना यह होगा कि सहनी के सवालों का जवाब केंद्र और राज्य की सरकारें किस तरह देती हैं और क्या वाकई बिहार को वह विकास मिल पाता है जिसका सपना लोग दशकों से देख रहे हैं।


