रोहतास में छापेमारी करनी गई उत्पाद विभाग की टीम पर माफियाओं का हमला, इंस्पेक्टर गंभीर रूप से घायल
रोहतास। बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद शराब तस्करी और उसके इर्द-गिर्द अपराध लगातार सामने आते रहते हैं। हालिया घटना रोहतास जिले के बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के धारूपुर वार्ड नंबर 21 की है, जहां शराब माफियाओं ने उत्पाद विभाग की टीम पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में सब इंस्पेक्टर अजिताभ कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल स्थानीय क्लिनिक में भर्ती कराया गया। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि शराबबंदी के बावजूद माफियाओं का नेटवर्क अब भी मजबूत है और वे प्रशासन को चुनौती देने से पीछे नहीं हट रहे। मिली जानकारी के अनुसार, उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि धारूपुर इलाके में बड़े पैमाने पर अवैध शराब की तस्करी की जा रही है। इसी सूचना पर कार्रवाई करते हुए सब इंस्पेक्टर अजिताभ कुमार के नेतृत्व में एक टीम छापेमारी के लिए पहुंची। छापेमारी के दौरान शराब की बरामदगी भी हुई, लेकिन तभी अचानक माफियाओं और स्थानीय लोगों ने मिलकर टीम पर लाठी-डंडों और पथराव से हमला कर दिया। यह हमला इतना तेज था कि अन्य पुलिसकर्मी किसी तरह अपनी जान बचाकर मौके से भाग निकले। दुर्भाग्यवश, टीम का नेतृत्व कर रहे एसआई अजिताभ कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है और इलाके में लगातार छापेमारी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों की पहचान की जा रही है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उत्पाद विभाग ने भी इस हमले को गंभीरता से लिया है और आश्वासन दिया है कि अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। यह घटना एक बार फिर बिहार में शराबबंदी की नीति की वास्तविकताओं को उजागर करती है। सरकार ने शराबबंदी लागू कर समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर शराब माफियाओं का दबदबा अब भी कम नहीं हुआ है। वे न केवल अवैध कारोबार चला रहे हैं बल्कि सरकारी अधिकारियों और पुलिस बल पर हमला करने से भी पीछे नहीं हटते। इससे साफ होता है कि शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए केवल सख्त कानून पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसके लिए समाज के सहयोग और प्रशासन की सतत निगरानी भी जरूरी है। रोहतास की यह घटना प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती है। जहां एक ओर उत्पाद विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर माफिया इतने हिम्मतवर हो गए हैं कि वे सरकारी टीम पर जानलेवा हमला करने लगे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी शीघ्रता और कठोरता से कार्रवाई करता है। यदि दोषियों को जल्द पकड़कर सख्त सजा दी जाती है, तभी यह संदेश जाएगा कि कानून से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। कुल मिलाकर, यह घटना शराबबंदी लागू करने की जमीनी हकीकत और उससे जुड़ी चुनौतियों की एक स्पष्ट तस्वीर पेश करती है।


