January 28, 2026

विपक्ष के बिहार बंद पर जदयू का बड़ा हमला, तेजस्वी को बताया गुंडा, एआई के वीडियो से लोगों को किया सावधान

पटना। बिहार में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर छिड़ी राजनीतिक जंग अब बेहद तीखी होती जा रही है। बुधवार को विपक्षी महागठबंधन द्वारा आहूत ‘बिहार बंद’ के जवाब में सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने अब विरोधियों पर हमला बोलते हुए राजनीतिक भाषा और तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। खासकर राजद नेता तेजस्वी यादव पर जदयू ने निशाना साधा है और उन्हें ‘गुंडों का शहजादा’ तक कह दिया है।
बंद के दौरान हुए प्रदर्शन से नाराज जदयू
बिहार बंद के तहत विपक्षी दलों ने पूरे राज्य में चक्का जाम किया। पटना समेत कई जिलों में ट्रेनें रोकी गईं, सड़कें जाम की गईं, टायर जलाए गए और बाजार बंद करवाए गए। इन घटनाओं के चलते आम जनजीवन प्रभावित हुआ। जदयू ने इन गतिविधियों को ‘जनविरोधी’ करार देते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष ने जानबूझकर आम जनता की परेशानी को नजरअंदाज किया।
जदयू का कहना है कि बंद के नाम पर स्कूल जाने वाले बच्चों, अस्पताल जाने वाले मरीजों और रोज कमाकर खाने वाले मजदूरों को तकलीफ दी गई। इन तमाम घटनाओं को लेकर पार्टी का गुस्सा विपक्ष के नेतृत्व पर खुलकर सामने आ गया।
तेजस्वी यादव पर व्यक्तिगत हमला
जदयू ने इस पूरे विरोध प्रदर्शन के लिए सीधे तेजस्वी यादव को जिम्मेदार ठहराया और उन पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘गुंडों का शहजादा’ कहा। पार्टी ने तेजस्वी को 9वीं फेल बताते हुए यह तंज कसा कि “एक नाकाम राजकुमार अपनी गुंडावाहिनी के साथ पटना की सड़कों पर निकल पड़ा है।” जदयू ने यह भी आरोप लगाया कि तेजस्वी को शायद यह भी समझ नहीं है कि उनके बंद के कारण कितने गरीबों की रोजी-रोटी छिन गई। खासतौर पर मजदूर, बुजुर्ग और मरीज इस बंद से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। पार्टी ने तेजस्वी को जनता को डराने वाला नेता बताया और कहा कि वह लोकतंत्र की जगह अराजकता को बढ़ावा दे रहे हैं।
एआई जनरेटेड वीडियो से सोशल मीडिया हमला
जदयू ने इस बार अपने विरोध में नई तकनीक का भी सहारा लिया है। पार्टी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक एआई जनरेटेड वीडियो साझा किया, जिसमें तेजस्वी यादव को हाथ में पिस्टल और लालू यादव को डंडा लिए दिखाया गया है। इस वीडियो के जरिए जदयू ने विपक्ष पर व्यंग्य करते हुए कहा कि लोकतंत्र को डराने और जनता को धमकाने की राजनीति की जा रही है। वीडियो में व्यंग्यात्मक लहजे में कहा गया कि “एक 9वीं फेल राजकुमार पटना की सड़कों पर बंद कराने निकला है, जिससे न बसें चल पा रही हैं, न ऑटो। जनता के सामने कोई विकल्प नहीं बचा है, क्योंकि विपक्ष ने तानाशाही का चोला ओढ़ लिया है।”
लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की मर्यादा पर सवाल
हालांकि, जदयू की इस तीखी प्रतिक्रिया और एआई आधारित वीडियो को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत हमले की श्रेणी में मान रहे हैं, तो कुछ इसे एक नई डिजिटल राजनीतिक शैली के रूप में देख रहे हैं। विपक्ष की ओर से भी यह सवाल उठाया जा सकता है कि क्या इस तरह के वीडियो लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुकूल हैं? साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि राजनीतिक दल अब सोशल मीडिया पर छवि निर्माण और विरोधियों को नीचा दिखाने के लिए नई तकनीकों का भरपूर इस्तेमाल कर रहे हैं।
सत्ता-विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ने के आसार
बिहार में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव की तारीख नजदीक आएगी, वैसे-वैसे इस तरह की बयानबाजी और हमलों में तेजी आने की संभावना है। एक ओर विपक्ष सरकार पर लोकतंत्र विरोधी नीतियों का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्ताधारी दल विपक्ष को अराजकता फैलाने वाला करार दे रहा है। इस राजनीतिक घमासान में आम जनता फिलहाल तमाशबीन बनी हुई है, लेकिन आने वाले समय में जनता ही तय करेगी कि कौन सच्चा और कौन झूठा। बिहार की सियासत फिलहाल धुआंधार हमलों और जवाबी रणनीतियों के दौर से गुजर रही है, और इसकी दिशा अगले कुछ हफ्तों में और स्पष्ट होगी।

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