January 30, 2026

बिहार के शरारती चूहों का एक और कारनामा: अब नियोजित शिक्षकों को डाला मुसीबत में, जांच के आदेश

पटना। बिहार के चूहे समय-समय पर गजब का कारनामा करते रहते हैं। कभी शराब पी ले लेते हैं तो कभी बाढ़ के सुरक्षा तटबंधों को हानि पहुंचाते हैं। अब इस बार बिहार के चूहों ने शिक्षकों को मुसीबत में डाल दिया है। फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर शिक्षक बने अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच की जा रही है तो पता चला कि उनके फोल्डरों को ये शरारती चूहे नेस्तानाबुद्ध कर चुके हैं। वहीं शिक्षा विभाग ने जांच के आदेश दे दिए हैं। लेकि न सवाल नियोजित शिक्षकों को बहाल करने वाली इकाइयों पर उठ रही हैं। एक बार फिर चूहों के सिर इल्जाम है कि उन्होंने लगभग 40 हजार नियोजित शिक्षकों के प्रमाणपत्र वाले फोल्डर ही कुतर डाले हैं। कुछ इकाइयां कह रहीं कि 10 हजार शिक्षकों के प्रमाणपत्र बाढ़ में खराब हो गए हैं। जिससे विजिलेंस टीम को पांच साल से एक लाख शिक्षकों का फोल्डर ही नहीं मिल रहे।
शिक्षा विभाग ने दिए जांच के आदेश
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन ने कहा कि मैंने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि शिक्षकों के प्रमाणपत्र फोल्डर देने होंगे। कोई बहानेबाजी नहीं चलेगी। बहानेबाजों के खिलाफ पूर्व में ही कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। जो भी दोषी हैं, वे बच नहीं सकते।
साढ़े तीन लाख शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की करनी है जांच
बता दें हाईकोर्ट के आदेश पर जांच की प्रक्रिया 2015 में शुरू हुई थी। बिहार में 3 लाख 52 हजार शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की जांच चल रही है। शिकायत मिली थी कि फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर बड़ी संख्या में लोग शिक्षक बने हैं। जांच का आदेश मिलने पर निगरानी ब्यूरो ने जिलों में अपने कार्यालय खोले। मकसद था कि संबंधित नियोजन इकाईयां निगरानी ब्यूरो के जिला कार्यालयों को प्रमाणपत्र मुहैया करा दें, ताकि समय की बर्बादी नहीं हो। इसके बावजूद विजिलेंस ब्यूरो को अब तक करीब एक लाख शिक्षकों के प्रमाणपत्र फोल्डर नहीं मिले हैं। सूत्रों का कहना है कि जिला और प्रखंड स्तर की अधिकांश नियोजन इकाइयों ने यह कहकर फोल्डर उपलब्ध कराने से इंकार कर दिया है कि उनकी इकाई में चूहे सैकड़ों शिक्षकों की फाइल कुतर चुके हैं। कुछ प्रमाणपत्र पिछले वर्ष दो बार आई बाढ़ में तबाह हो गए हैं। वहीं निगरानी ब्यूरो ने शिक्षा विभाग को जिला और प्रखंड नियोजन कार्यालयों के इंकार के बारे में शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को अवगत करा दिया है। विजिलेंस का कहना है कि बगैर सर्टिफिकेट फोल्डर के यह पता करना असंभव है कि शिक्षक का नियोजन असली प्रमाणपत्र के आधार पर हुआ या फिर फर्जी।

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