किसी हाल में अतिपिछड़ों का विकास नहीं चाहती भाजपा : राजीव रंजन

पटना। भाजपा नेताओं के अतिपिछड़ा विरोध को उजागर करते हुए JDU के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि जातिगत गणना में अतिपिछड़ा समाज को बहुसंख्यक देख कर भाजपा के नेता बदहवास हो चुके हैं। इसीलिए, झूठे बयानों और खोखले तर्कों से यह अभी तक इसकी खिलाफ़त करने में लगे हुए हैं। इनके बयानों से यह स्पष्ट है कि किसी भी हाल में भाजपा के नेता अतिपिछड़ों के हित में होने वाले काम का समर्थन नहीं करने वाले। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा के नेता शुरुआत से ही जातिगत गणना की राह में कांटे बो रहे हैं। जब विधानसभा से इसे पास कर दिया गया तब इन्होने अपने लोगों से इस गणना के खिलाफ हाईकोर्ट में केस करवा दिया। वहां मुंह की खाने के बाद यह लोग इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले गये। वहां इन्होने सोलिसिटर जनरल को खड़ा किया जो केंद्र सरकार की अनुमति के बिना संभव ही नहीं है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी इनके मंसूबों पर पानी फेर दिया और आज जब बिहार सरकार ने सफलतापूर्वक इसकी रिपोर्ट प्रकाशित कर दी है तब यह जाति-उपजाति का रोना रोने लगे हैं। भाजपा को बताना चाहिए कि जब सरकार ने जातिवार कोड निर्धारित किया था तब उन्होंने आपत्ति क्यों नहीं जतायी थी? उन्होंने आगे कहा कि यदि बीजेपी नेताओं को जातिगत गणना के नतीजों से कोई परेशानी है तो वह केंद्र सरकार को बोलकर खुद इसे क्यों नहीं करवा रहें हैं? जदयू महासचिव ने आगे कहा कि वास्तव में अतिपिछड़ा समाज के विरोध में अंधी बनी भाजपा इस समाज की भारी संख्या देख कर कुंठित हो चुकी है। जिस अतिपिछड़ा समाज को यह लोग मजदूर से अधिक नहीं समझते थे, उनके आगे बढ़ जाने की बात सोचकर ही इनके सीने पर सांप लोट रहे हैं। इनके नेता अभी भी इस गणना के खिलाफ माहौल बनाने में खून-पसीना एक किये हुए हैं। भाजपा यह जान जाए कि तीर कमान से निकल चुका है। अतिपिछड़ा समाज अब उनके रोके रुकने वाला नहीं है।

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