February 12, 2026

भारत के संविधान की आत्मा पर कुठाराघात है सीएए तथा एनआरसी: साहू

सीएए तथा एनआरसी को खत्म करने के लिए अमित शाह का पुतला दहन

पटना। आम आदमी पार्टी के द्वारा ऐतिहासिक कारगिल चौक पटना में सीएए कानून को वापस करने तथा एनआरसी को खत्म करने के लिए गृहमंत्री अमित शाह का पुतला फूंका गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पटना जिला अध्यक्ष चौधरी ब्रह्म प्रकाश सिंह यादव ने की।
पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष शत्रुघ्न साहू ने कहा कि सीएए (सिटीजन एमेंडमेंट एक्ट) भारत के संविधान की आत्मा “प्रस्तावना” पर कुठाराघात है। संविधान की प्रस्तावना में पंथ निरपेक्षता, धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्ति की गरिमा पर यह कानून सीधा वार किया है। समय रहते यदि इस कानून को वापस नहीं लिया गया तो देश और आम आवाम को भारी नुकसान पहुंचेगा। अच्छे दिन का सपना दिखाकर बहुमत हासिल करने वाली सरकार ने इस कानून से भारत के संघीय ढांचा पर हमला कर जनादेश के पीठ में छूरा भोंका है। साहू ने कहा कि सीएए कानून से सबसे ज्यादा बिहार वासियों को घाटा होगा क्योंकि असम में एनआरसी से बाहर किए गए 19 लाख लोगों में से 7 लाख मुसलमानों को छोड़ कर 12 लाख लोगों में ज्यादातर बिहारी हैं, उसमें भी अधिकांश गरीब लोग हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा की माने तो वंशवादी-भ्रष्टाचारी कांग्रेस की डॉ मनमोहन सिंह की सरकार में जब कच्चे तेल की किमत अधिकतम स्तर पर थी तब जीडीपी का दर 10.50% था लेकिन अब ईमानदार राष्टÑवादी सरकार में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत न्यूनतम स्तर पर होने के बावजूद जीडीपी दर 4.5 पर पहुंच जाना एक भयानक आर्थिक संकट तथा आर्थिक त्रासदी है। इससे उबरने के लिए भारत सरकार के पास कोई ठोस उपाय नहीं है। साहू ने कहा कि नोटबंदी एवं जीएसटी के दंश से व्यवसायी और जनता सभी कराह रहे हैं और सरकार के पास अच्छे दिन बताने या इन समस्याओं के निराकरण का कोई उपाय नहीं है। बेबस सरकार भावनात्मक मुद्दे उछाल कर देश को गुमराह करना चाहती है और नौजवानों को भटकाव के रास्ते पर छोड़ दी है। सीएए कानून इसी कडी का हिस्सा है। इस कानून से हिंदू, मुसलिम, सिख, ईसाई में से किसी का भी भला नहीं होने वाला है। यह कानून समाज एवं राष्ट्र में विद्वेष फैला कर केंद्र की सरकार समाज को बांटना चाहती है और देश को तोड़ना चाहती है, जो ठीक नहीं है। भारत सरकार को देश की उबलती हुई परिस्थितियों और चुनौतियों को गंभीरता एवं संवेदनापूर्वक विचार करना चाहिए तथा विशेष संसद सत्र बुलाकर उक्त कानून को वापस कर लेना चाहिए।
मौके पर प्रदेश सचिव ई. उमा शंकर, लोकेश सिंह, कार्यालय प्रभारी कृष्ण मुरारी, गुल्फिशां यूसुफ, अंजुम बारी, शाहनवाज, धर्मेंद्र कुमार सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद थे।

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