February 16, 2026

प्रधानमंत्री को मणिपुर जाकर शांति बहाली की पहल करनी चाहिए : अशोक चौधरी

  • जदयू मुख्यालय में आयोजित हुआ जनसुनवाई कार्यक्रम, भवन निर्माण मंत्री और विज्ञान व प्रौद्योगिक मंत्री ने लोगों की सुनी समस्या

पटना। शुक्रवार को जदयू मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान बिहार सरकार के भवन निर्माण मंत्री श्री अशोक चौधरी और विज्ञान व प्रौद्योगिक मंत्री सुमित कुमार सिंह ने सभी जिलों से पहुंचे आमलोगों की समस्याओं को सुनकर त्वरित समाधान हेतु संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। कार्यक्रम में पत्रकारों से वार्ता करते हुए भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि मणिपुर की घटना से पूरा देश आक्रोशित है। भाजपा के लोग नारी सम्मान और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की बातें कहते हैं मगर उनकी सरकार में बेटियों के साथ जिस प्रकार का अमानवीय व्यवहार किया गया है वह काफी दुखद है। इस घटना पर मणिपुर के मुख्यमंत्री जी का बयान यह दर्शाता है कि उनकी संवेदनशीलता समाप्त हो चुकी है। विगत 2 महीने से मणिपुर में अशांति प्रकाष्ठा पर है। प्रदेश की सरकार स्थिति को नियंत्रित करने में पूरी तरह से विफल दिखाई दे रही है इसलिए प्रधानमंत्री जी को स्वयं मणिपुर में जाकर शांति बहाली की ओर प्रयास करना चाहिए ताकि मानवता की रक्षा हो सके। पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए अशोक चौधरी ने कहा कि बिहार और देश की जनता अच्छे से जानती है कि भाजपा में कितने भ्रष्टाचारी और परिवारवादी नेता हैं। सदन में उपमुख्यमंत्री श्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने भी विस्तार से भाजपा के परिवारवाद पर अपनी बात रखने का काम किया है। भाजपा में जो भी भ्रष्टाचारी जाते हैं उन्हें डिटर्जेंट पाउडर से धोकर सदाचारी बना दिया जाता है, महाराष्ट्र के जिन नेताओं पर भाजपा कभी भ्रष्टाचार के संगीन आरोप लगाती थी आज उन्हीं लोगों को मंत्रालय में शामिल कर लिया गया है। भ्रष्टाचार पर भाजपा के इस दोहरी नीति को जनता अच्छे से की समझ रही है। अशोक चौधरी ने कहा कि भाजपा के नेताओं ने विजय सिंह जी के मृत्यु पर बिहार की जनता को बरगलाने का काम किया। सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के कथनानुसार यही साबित होता है कि उनकी मौत लाठीचार्ज से नहीं हुई थी और भाजपा के लोगों को इस बात का भी जवाब देना चाहिए की जब जेएनयू में छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ, एनआरसी और सीएए के विरोध में सड़क पर बैठी महिलाओं पर लाठीचार्ज हुआ और जब किसानों पर लाठीचार्ज हुआ तब जांच समिति का गठन क्यों नहीं गया था ? जब भाजपा की सरकार में लाठीचार्ज होता है तो उसे न्यायसंगत कहा जाता है मगर जब दूसरे पार्टी के सरकार में लाठीचार्ज किया जाता है तब उसपर जांच कमेटी गठित कर दी जाती है, यह दोहरापन नहीं चलेगा।

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