February 18, 2026

2026 में 44 हजार से अधिक एएनएम की होगी नियुक्ति, स्वास्थ्य विभाग ने की बड़ी घोषणा

पटना। बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। वर्ष 2026 के भीतर स्वास्थ्य विभाग में 44 हजार से अधिक एएनएम की नियुक्ति की जाएगी। इससे ग्रामीण और शहरी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को और सुदृढ़ करने की उम्मीद जताई जा रही है। यह घोषणा विधानसभा के उच्च सदन में स्वास्थ्य विभाग के बजट पर हुई चर्चा के बाद सरकार की ओर से दी गई।
स्वास्थ्य विभाग में बड़े पैमाने पर बहाली
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि अगले एक वर्ष के अंदर कुल 44 हजार 321 एएनएम की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इनमें 5 हजार 6 एएनएम की बहाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत की जाएगी। उन्होंने सदन को जानकारी दी कि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 7 हजार 468 एएनएम की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है।
रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि वर्तमान में विभिन्न संवर्गों के अंतर्गत 39 हजार 95 नियमित पद और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 5 हजार 226 पद रिक्त हैं। इस तरह कुल 44 हजार 321 पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। सरकार का लक्ष्य है कि यह पूरी प्रक्रिया एक वर्ष के भीतर पूरी कर ली जाए, ताकि राज्य के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक कर्मचारियों की कमी को दूर किया जा सके।
स्वास्थ्य बजट को मिली मंजूरी
विधान परिषद में स्वास्थ्य विभाग के लिए 21 हजार 270 करोड़ 41 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। सरकार का कहना है कि इस बजट का उपयोग बुनियादी ढांचे के विकास, मानव संसाधन की बहाली और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर नीति
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए एक ठोस नीति बनाई जा रही है। इसके साथ ही निजी प्रतिष्ठित संस्थानों को राज्य में अस्पताल स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन नीति पर भी काम चल रहा है। सरकार का मानना है कि इससे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच संतुलन बनाकर स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार का दावा
सरकार ने दावा किया है कि बीते वर्षों में बिहार की स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। शिशु मृत्यु दर घटकर प्रति एक हजार जन्म पर 23 हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर बताई जा रही है। मातृ मृत्यु दर भी 334 से घटकर 104 पर आ गई है। इसके अलावा कुल प्रजनन दर 4.2 से घटकर 2.8 हो गई है, जिसे स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
संस्थागत प्रसव और मुफ्त दवा योजना
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि राज्य में संस्थागत प्रसव की दर बढ़कर 76.2 प्रतिशत हो गई है। इसके साथ ही पिछले 16 महीनों से बिहार मुफ्त दवा वितरण के मामले में देश में पहले स्थान पर बना हुआ है। सरकार का कहना है कि इससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिली है।
बीमारियों के उन्मूलन पर जोर
राज्य में कालाजार, यक्ष्मा और चमकी बुखार जैसी गंभीर बीमारियों के उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाए गए हैं। इसके अलावा सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए बच्चियों को टीका लगाया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इन प्रयासों से भविष्य में गंभीर बीमारियों के मामलों में कमी आएगी।
शिक्षा विभाग में भी बड़ी घोषणाएं
स्वास्थ्य के साथ-साथ शिक्षा विभाग से जुड़ी कई अहम जानकारियां भी सदन में दी गईं। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि स्कूलों की निगरानी और शिक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हर 10 पंचायत पर एक सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी की बहाली की जाएगी। इसके लिए कुल 935 पदों का सृजन किया गया है और इन पर बहाली के लिए बिहार लोक सेवा आयोग की ओर से विज्ञापन प्रकाशित किया जा रहा है।
शिक्षकों की बहाली और सुविधाएं
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता 45 हजार से अधिक शिक्षकों की बहाली है। इसके बाद विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि विशिष्ट शिक्षकों को राज्य के सरकारी कर्मियों की तरह सभी सुविधाएं दी जा रही हैं और 90 प्रतिशत शिक्षकों की वेतन संबंधी विसंगतियां दूर कर ली गई हैं।
मध्याह्न भोजन और निगरानी व्यवस्था
मध्याह्न भोजन योजना को लेकर मंत्री ने कहा कि एक करोड़ से अधिक बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण है। इसलिए गैर सरकारी संगठनों की मदद ली जा रही है, लेकिन उनकी थर्ड पार्टी जांच कराई जाती है। गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित संस्था की सेवा समाप्त कर दी जाती है। सरकार का कहना है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन देना उसकी प्राथमिकता है। स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बहाली और सुधार की योजनाओं के साथ सरकार ने विकास की दिशा में मजबूत संदेश दिया है। आने वाले एक वर्ष में इन घोषणाओं के धरातल पर उतरने से बिहार की सार्वजनिक सेवाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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