महिलाओं को स्तन एवं बच्चेदानी के कैंसर के प्रति किया गया जागरुक एवं परीक्षण

पटना। आब्सट्रेटिक एवं गायनोकॉलोजिकल सोसायटी की ओर से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला पुलिस कर्मी और पुलिस परिवार की महिलाओं के लिए स्तन एवं बच्चेदानी के कैंसर के प्रति जागरुकता एवं परीक्षण शिविर का आयोजन राज्य भर में आयोजित किया गया ।
भारत में स्तन और बच्चेदानी के मुंह के कैंसर के रोगियों की बहुत बड़ी संख्या है। प्रति वर्ष सर्वाइकल कैंसर के लगभग एक लाख नये रोगी मिलते हैं और 2017 के आंकड़ों के अनुसार लगभग 68000 मरीजों की मृत्यु इस कैंसर से प्रति वर्ष हो जाती है। सच तो यह है कि यदि उपरोक्त कैंसर की पहचान और उपचार समय रहते हो जाये तो इससे होने वाली मृत्यु दर को बहुत कम किया जा सकता है।
शिविरों में महिलाओं को टेलीविजन एवं चित्रों के माध्यम से स्तन कैंसर की जांच स्वयं करने के तरीके बताये गये, साथ ही उनकी जांच भी की गयी। बच्चेदानी के कैंसर की जांच के लिए पीआईए और पीएपी का उपयोग किया गया। उक्त कार्यक्रम पटना जिÞला के पुलिस लाइन अस्पताल, उत्तरी गांधी मैदान, कमांड अस्पताल बीएमपी, एयरपोर्ट, रेलवे अस्पताल करबिगहिया, गुरु गोविंद सिंह अस्पताल पटना सिटी, होम गार्ड अस्पताल आनंदपुर, बिहटा, केंद्रीय रिजर्व पुलिस हेड क्वार्टर आशियाना-दीघा रोड में किया गया। इस दौरान 500 से अधिक महिलाओं की जांच की गयी और जिनमें अधिक जांच की जरूरत थी उन्हें आईजीआईएमएस में भेजा गया। पटना के अलावा अन्य जगहों जैसे हाजीपुर, मुजफ़्फरपुर, कटिहार, समस्तीपुर, आरा, लखीसराय, नालन्दा, बेगूसराय, सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, भागलपुर, मुंगेर, सिवान, छपरा, औरंगाबाद, सासाराम, गया, नवादा, बरबीघा, लखीसराय और मोतीहारी में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया।
पूरे देश के हर राज्य के जिले में फॉग्सी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अल्पेश गांधी के आह्वान पर पुलिस कर्मियों के लिए नि:शुल्क किया गया। पुलिस, बीएमपी, सीआरपीएफ, होम गार्ड के विभिन्न कार्यालयों से संपर्क कर उक्त कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें 30-65 वर्ष की महिलाओं की जांच की गयी, क्योंकि देखा गया है कि इसी उम्र में कैंसर होने की संभावना सबसे अधिक होती है। कार्यक्रम में डॉ. अनिता सिंह, डॉ. नीलम, डॉ. आभा रानी सिन्हा, डॉ. प्रज्ञा मिश्रा चौधरी, डॉ. निभा मोहन, डॉ. अमिता सिन्हा, डॉ. रंजना, डा. विभा वर्मा, डॉ. रजनी शर्मा तथा पटना आॅब्सट्रेटिक एवं गायनोकॉलोजिकल सोसायटी के अन्य ख्याति प्राप्त स्त्री रोग विशेषज्ञों ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।