बैठक : काले कानून का डर दिखाकर वंचित तबकों पर किया जा रहा अत्याचार
फुलवारी शरीफ। बिहार में सीएए, एनपीआर व एनआरसी के खिलाफ चल रहे आंदोलन को मजबूत करने के लिए इमारत ए शरिया में अहम बैठक हुई। कार्यवाहक नाजिम इमारत ए शरिया मौलाना शिब्ली कासमी के साथ बामसेफ के राष्ट्रीय कोआर्डिनेटर बीएल मतंग, जन अधिकार पार्टी लो के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव एजाज अहमद, बामसेफ के राज्य प्रभारी रामलगन मांझी और सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता मो. मसीहुद्दीन सहित अन्य लोगों के साथ विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
वक्ताओं ने कहा कि जिस तरह से आज केंद्र सरकार के द्वारा काले कानून का डर दिखाकर वंचित तबकों पर अत्याचार किया जा रहा है, यह किसी भी दृष्टिकोण से ठीक नहीं है और इसके लिए दलित और मुस्लिम के साथ पिछड़ा वर्ग और अतिपिछड़ा वर्ग के नेताओं के साथ-साथ आम लोगों की भी भागीदारी इस आंदोलन से जुड़नी चाहिए। मुल्क की अमन पसंद विभिन्न संस्कृतियों धर्मों के लोगों को राजनीतिक, सामाजिक एवं हर तरह के अधिकार से वंचित करके इन्हें राष्ट्र की मुख्यधारा से अलग करने का भाजपा-आरएसएस का एक साजिश है और इसी साजिश के तहत ही यह सारी कार्रवाई चल रही है इसलिए सभी लोगों को एक साथ होकर ऐसे काला कानून का विरोध करना चाहिए, जो ना तो देश हित में है और ना ही भारत के संविधान के हित में है। दरअसल भाजपा इस मुद्दे को वोट बैंक के तौर पर इस्तेमाल करना चाहती है। केंद्र सरकार की जो भूमिका देखी जा रही है, उसमें सभी वंचित तबकों को बारी-बारी से उनके अधिकारों को छीनने की साजिश चल रही है और उनको समाज की मुख्यधारा से काटने के लिए बारी-बारी से इस्तेमाल किया जा रहा है। जहां एक तरफ मुसलमानों को डिटेंशन सेंटर का डर दिखाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर धर्म के नाम पर दलितों और पिछड़ों को गुमराह किया जा रहा है।


