बाढ़ विधानसभा : 3 देवियों में शगुन सिंह पर राजद ने जताया विश्वास !, समर्थकों की चेतावनी
पटना/बाढ (संतोष कुमार)। बिहार विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग के मसले को महागठबंधन ने सुलझा लिया है। जहां कांग्रेस को 65 से 70 सीटें मिलने की बात सामने आ रही है। वहीं राजद 140 से 145 सीटों पर मान गया है। कांग्रेस द्वारा 6 सीटों की सूची जारी करने के बाद राजद ने भी पहले चरण के उम्मीदवारों की सूची तैयार कर ली है और संभवत आज राजद नेता तेजस्वी यादव उक्त सूची को जारी कर सकते हैं।

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पार्टी सूत्रों के अनुसार, राजद ने अपने पहले सूची में कई नए चेहरे को मौका दिया है, जिससे राजद में उथल पुथल की संभावना दिख रही है। अगर हम बात करें पटना जिला के बाढ़ विधानसभा की तो वहां राजद की ओर से तीन देवियां चुनावी समर में कूदने को लिए पिछले कई माह से पूरे दमखम के साथ उतरी। जिसमें राजद नेत्री एवं प्रभुनाथ सिंह की बेटी मधु सिंह ने चुनाव लड़ने को लेकर बाढ़ विधानसभा में कड़ी मेहनत की तो वही राजद नेत्री एवं पार्टी में महिला कमांडो के नाम से जाने जाने वाली एवं बाढ विधानसभा क्षेत्र में भाभी जी के नाम से प्रचलित नमिता नीरज सिंह भी अपने प्रतिद्वंदी को टक्कर देने के लिए ताबड़तोड़ सघन जनसंपर्क अभियान चलाई, लेकिन पिछले 16 जून को जदयू का दामन छोड़कर राजद में शामिल होने वाली एवं नालंदा के पूर्व विधायक रामनरेश सिंह की बेटी शगुन सिंह पूरे कोविड काल के दौरान बाढ़ विधानसभा क्षेत्र में ना के बराबर दिखी। इसके बावजूद राजद ने मात्र कुछ ही महीनों में शगुन सिंह पर विश्वास जताया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इन 3 देवियों में शगुन सिंह को बाढ़ विधानसभा से राजद द्वारा बतौर उम्मीदवार उतारने की खबरें सामने आ रही है, जिससे पिछले कई वर्षों से पार्टी के प्रति समर्पित मधु सिंह और नमिता नीरज सिंह की टिकट बाढ़ विधानसभा से कटने के कारण राजद में भूचाल आने की संभावना नजर आ रही है। उक्त दोनों संभावित प्रत्याशियों के समर्थक राजद के इस निर्णय से पूरी तरह खफा नजर आ रहे हैं। राजद समर्थकों का कहना है कि जिसने चुनाव के लिए महीनों पूर्व से ताबड़तोड़ जनसंपर्क अभियान चलायी और कोविड काल में लोगों के बीच मास्क एवं राशन का वितरण किया। आज उन्हीं की उपेक्षा पार्टी में हो रही है और जो मात्र कुछ महीने पहले राजद में शामिल हुई उन्हें सर माथे पर बैठाया जा रहा है। समर्थकों ने आरोप लगाया कि टिकट बंटवारे में पैसे का खेल हो रहा है, अगर पार्टी इस पर विचार नहीं करती है तो आगामी दिनों में भारी संख्या में समर्थक राजद छोड़ने को विवश होंगे।
इधर, मतदाताओं का कहना है कि राजद को स्थानीय नेता को मौका देना चाहिए। यहां बाहरी उम्मीदवार को मतदाता सिरे से खारिज करने के लिए बात कर रहे हैं। चाहे वह किसी पार्टी या जाति से हो।

