September 14, 2026

प्रेमालोक मिशन स्कूल के बच्चों ने पड़ोसियों को दिया सम्मान, कहा- मित्र बदल सकता है पड़ोसी नहीं

फुलवारी शरीफ। कहते हैं मित्र बदल सकता है पड़ोसी नहीं। पड़ोसी हमारे सुख-दुख के साथी होते हैं। जब बच्चे प्रदेश में होते हैं तो घर के बुजुर्ग माता-पिता के तारणहार के रूप में पड़ोसी ही काम आते हैं। इतना ही नहीं किसी तरह के काम से घर से बाहर होने पर पड़ोसी ही हमारे घर बार का रखवाला होता है। संपत चक के मां शारदापुरम स्थित प्रेमालोक मिशन स्कूल के निदेशक गुरु प्रेम ने कहा कि स्कूल जब संस्कार की बात करता है तो वह अपने पड़ोसियो के साथ अपनी मित्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी याद रखता है। इसी कड़ी में बुधवार को प्रेमालोक मिशन स्कूल के द्वारा पड़ोसी मिलन का कार्यक्रम रखा गया, जिसमें विद्यालय के द्वारा अपने सभी आसपास के उपस्थित पड़ोसियों को सम्मानित किया गया। अचानक विद्यालय के बच्चों द्वारा सम्मानित होने को लेकर विद्यालय के पड़ोसी भी दंग रहे थे और बच्चों को अच्छे संस्कार पाने का खूब आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर विद्यालय की छात्रा अणु कृष्णा, पूजा एवं विभूति के द्वारा पड़ोसियों का तिलक लगाकर और पुष्प वर्षा करके भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर विद्यालय संस्थापक एवं शिक्षिका रंभा मिश्रा समेत अन्य शिक्षक व कर्मी भी उपस्थित रहे।

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