January 29, 2026

पटना नगर निगम के चतुर्थवर्गीय कर्मियों ने चौक-चौराहों पर कचरे फेंक जताया विरोध, मौर्यालोक पर किया प्रदर्शन

पटना। पटना नगर निगम के अन्तर्गत लगभग 5000 सफाई कर्मचारी दैनिक मजदूर के आधार पर कार्य कर रहे हैं। राज्य सरकार ने उसे स्थाई करने का आश्वासन दिया था, लेकिन नगर विकास विभाग ने 1 फरवरी को सेवा से हटा दिया। सेवा से हटने के बाद सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल कर दी है। पटना नगर निगम के चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की हड़ताल से पटना शहर की सूरत बिगड़ने लगी है। अपनी मांग को लेकर नगर निगम के चतुर्थवर्गीय कर्मी सोमवार की सुबह से ही सड़क पर उतर हंगामा करने लगे। आक्रोशित कर्मियों ने राजधानी के मुख्य चौराहों डाकबंगला और इनकम टैक्स पर कूड़ा-कचरा फेंक कर विरोध का इजहार किया और हजारों की संख्या में मौर्यालोक पहुंच कार्यालय का घेराव किया। आक्रोशित कर्मियों ने चेतावनी दी है कि हमारी मांगें नहीं पूरी हुईं तो हड़ताल जारी रहेगी। वहीं सीपीएम ने सफाई कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन करते हुए कहा है कि सफाई कर्मचारी की सेवा स्थाई किया जाये। सफाई कर्मचारी बहुत ही नीचे तबके से आते हैं, उन्हें नौकरी से हटाने से लोग भूखमरी के शिकार हो जाएंगे। राज्य सरकार अविलंब उनकी मांगों को मांग कर आंदोलन समाप्त कराये।
उल्लेखनीय है कि लोकायुक्त न्यायालय के आदेश पर नगर विकास और आवास विभाग के निर्देश पर नगर निकायों में दैनिक मजदूरी पर कार्यरत कर्मियों को हटाने पर पटना नगर निगम के मेयर और डिप्टी मेयर ने विरोध जताया है। मेयर का कहना है कि निगम में आउटसोर्सिंग और एजेंसियों के जरिये निगम द्वारा कर्मियों की सेवाएं ली जा रही हैं। निगम में दस सालों से अधिक समय से काम कर रहे कर्मियों को नियमित करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि वे लोकायुक्त न्यायालय का सम्मान करते हैं। लगता है कि लोकायुक्त न्यायालय में बहुत सारे तथ्यों को छिपा कर गुमराह करने का प्रयास किया गया है। निगम अपना पक्ष रखेगी। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि कैसे बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 में दिये गये प्रावधानों को एक-एक कर संकल्प के माध्यम से समाप्त किया जा रहा है। अगर अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता है तो सरकार सभी नगर निगम, नगर निकाय के प्रतिनिधियों की बैठक बुला कर सुझाव ले।

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