देश में पैदा हुआ बड़ा एलपीजी संकट, कई राज्यों में लंबी लाइन, पुलिस ने मोर्चा संभाला

  • गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें, कई राज्यों में कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बंद, कालाबाजारी शुरू
  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित, ईरान-अमेरिका युद्ध का असर

नई दिल्ली। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब भारत सहित कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय हालातों के कारण एलपीजी गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिसके चलते देश के कई राज्यों में गैस सिलेंडर को लेकर संकट की स्थिति बन गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और कई जगहों पर उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति फिलहाल रोक दी गई है। इस निर्णय का सबसे अधिक असर होटल, रेस्तरां और खानपान के व्यवसाय पर पड़ा है, क्योंकि वाणिज्यिक सिलेंडरों के बिना भोजन तैयार करना मुश्किल हो गया है। कई होटल संचालकों का कहना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो उन्हें अस्थायी रूप से अपना कारोबार बंद करना पड़ सकता है। इसी बीच घरेलू रसोई गैस को लेकर भी लोगों की परेशानी बढ़ गई है। गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। कई शहरों में उपभोक्ता तड़के तीन बजे से ही एजेंसियों के बाहर लाइन में लग रहे हैं, लेकिन सीमित आपूर्ति के कारण कई लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और सिद्धार्थनगर जैसे क्षेत्रों में गैस वितरण पुलिस सुरक्षा के बीच किया जा रहा है ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो। वहीं बिहार के पटना, गोपालगंज, खगड़िया और औरंगाबाद समेत कई जिलों में भी गैस एजेंसियों के बाहर भीड़ देखी गई। कई एजेंसियों में कर्मचारियों के अनुपस्थित रहने के कारण वितरण कार्य प्रभावित हुआ है। इस संकट का असर शादी-विवाह के आयोजनों पर भी पड़ रहा है। भोपाल जैसे शहरों में आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में शादियां तय हैं, ऐसे में कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों ने गैस की कमी को गंभीर समस्या बताया है। उनका कहना है कि यदि गैस आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो समारोह आयोजित करना कठिन हो सकता है। ऊर्जा आपूर्ति पर संकट का मुख्य कारण फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला हॉर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बताया जा रहा है। लगभग 167 किलोमीटर लंबा यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम व्यापार का लगभग बीस प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। युद्ध की स्थिति के कारण इस मार्ग से तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। देश अपनी आवश्यकता का लगभग पचास प्रतिशत कच्चा तेल और बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस विदेशों से मंगाता है। कतर भारत को गैस आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। हाल ही में सुरक्षा कारणों से कतर ने अपने तरलीकृत प्राकृतिक गैस संयंत्रों का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया, जिससे भारत में गैस आपूर्ति कम हो गई है। संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने पूरे देश में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 लागू कर दिया है। इसके तहत गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। घरेलू गैस सिलेंडर की बुकिंग व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अब एक सिलेंडर की आपूर्ति के बाद अगली बुकिंग 25 दिन के बाद ही संभव होगी। गैस वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए उपभोक्ताओं की पहचान सत्यापन प्रक्रिया को भी सख्त किया गया है। सिलेंडर वितरण के समय अब एकबारगी पासवर्ड या जैविक पहचान सत्यापन अनिवार्य किया गया है। इससे अनियमित वितरण और जमाखोरी पर नियंत्रण रखने की कोशिश की जा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्थिति की समीक्षा के लिए तीन तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। यह समिति गैस आपूर्ति की स्थिति की निगरानी करेगी और आवश्यकतानुसार प्राथमिकता तय करेगी। इसके साथ ही सरकार अमेरिका, रूस और अल्जीरिया जैसे देशों से वैकल्पिक ऊर्जा आपूर्ति के विकल्पों पर भी विचार कर रही है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऊर्जा संकट को कम करने के लिए चर्चा जारी है। औद्योगिक देशों के समूह जी-7 के सदस्य देश अपने आपातकालीन तेल भंडार से अतिरिक्त आपूर्ति जारी करने पर विचार कर रहे हैं ताकि वैश्विक बाजार में ऊर्जा आपूर्ति संतुलित रह सके। फिलहाल सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराकर गैस की अनावश्यक बुकिंग न करें और उपलब्ध संसाधनों का संयम से उपयोग करें। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति सामान्य होने पर ऊर्जा आपूर्ति में सुधार आने की संभावना है।

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