गया व मुजफ्फरपुर शहरों में भी डीजल चालित तीन पहिया वाहनों का संचालन प्रतिबंधित करना जरूरी : सुशील मोदी
पटना। बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी द्वारा राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद्, सीइइसीसी-एडीआरआई व सीएसटीईपी के सहयोग से गया व मुजफ्फरपुर शहरों के लिए तैयार किये गये व्यापक स्वच्छ वायु कार्य योजना का वर्चुअल विमोचन किया गया। इस मौके पर उप मुख्यमंत्री द्वारा ने विमोचन में शामिल सभी लोगों का स्वागत किया।
मोदी ने अपने संबोधन में बताया कि पटना व मुजफ्फरपुर से भिन्न गया के फल्गू नदी में जल-प्रवाह कम रहने से नदी के बालू से वायु प्रदूषण बढ़ने की संभावना अध्कि है। गया शहर एक पर्यटन स्थल भी है। प्रत्येक वर्ष पितृपक्ष के दौरान यहां काफी लोग जुटते हैं एवं सभी प्रकार की गतिविधियां बढ़ जाती है, फलत: वायु प्रदूषण भी बढता है। साथ ही, गया का तापमान भी पटना की तुलना में अलग रहता है। इन पहलुओं पर भी विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि राज्य में फसल अवशेष को जलाना राज्य सरकार द्वारा प्रतिबंधित है। ठोस कचरों को ढककर परिवहन के मामलों में नगर निकायों को और सक्रिय होना होगा। राज्य में पुराने डीजी सेट की संचालन न हो, यह देखना जरूरी है। पटना के समान गया व मुजफ्फरपुर शहरों में भी डीजल चालित तीन पहिया वाहनों का संचालन प्रतिबंधित किया जाना अपेक्षित होगा।
उन्होंने पर्षद् के अध्यक्ष डॉ. एके घोष के वक्तव्य से सहमति जताते हुए कहा कि वायु प्रदूषण से प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होगी, जिससे इस दौर में कोविड-19 संक्रमण की संभावना बढ सकती है। उन्होंने बताया कि कुल मिलाकर एक अच्छा प्रतिवेदन हमारे समक्ष है, जिसमें सुझाये गये उपायों पर अमल करना है।
इस अध्ययन पर चर्चा करते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह ने बताया कि एनसीएपी के कार्य के अनुश्रवण हेतु एक समिति गठित है, जिसकी अगली बैठक 25 सितम्बर को होगी। उन्होंने बताया कि अध्ययन में सुझाये गये उपाय हमारे संज्ञान में हैं, जिस पर कार्य जारी है। हालांकि प्रतिवेदन में अनुशंसित रोड किनारे पूर्ण-पेंविग से असहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि इससे रोड किनारे वृक्षारोपण की संभावना नहीं रहती है। यदि पेवर ब्लॉक लगा जगह-जगह पर खुली जमीन छोड़ी जाय तो वहां पौधरोपण किया जा सकता है।
वहीं बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार घोष ने बताया कि राज्य के तीन प्रदूषित शहरों में से गत वर्ष पटना के लिए व्यापक स्वच्छ वायु कार्य योजना पर कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि कोविड-19 संक्रमण के दौर में सूक्षम कण पदार्थ पीएम 2.5 की मात्रा को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है क्योंकि एक अनुसंधान में पाया गया है कि पीएम 2.5 हवा में कोविड-19 के संक्रमण के वहन में सहायक है। उन्होंने बताया कि राज्य में वर्तमान में सतत परिवेशीय वायु गुणवत्ता केन्द्रों की संख्या 11 है। वर्तमान वर्ष में 24 और केन्द्रों की स्थापना हेतु कार्य प्रारंभ किया गया है।
व्यापक स्वच्छ वायु कार्य योजना के संबंध में आद्री के प्रभात पी. घोष, आद्री के विशेषज्ञ डॉ. प्रतिमा सिंह, अध्ययन से जुड़े डॉ. जय असुंदी ने जानकारी साझा किए और अपने विचार रखें। कार्यक्रम के अंत में पर्षद् के सदस्य-सचिव आलोक कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
ज्ञात हो कि हाल के वर्षों में राज्य के तीन प्रमुख शहर पटना, गया व मुजफ्फरपुर में वायु प्रदूषण का स्तर निर्धरित मानक से ज्यादा पाया जाता रहा है। इन शहरों में वायु प्रदूषण की स्थिति में व्यापक सुधर हेतु राज्य पर्षद् द्वारा तैयार कार्य योजना के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु राज्य के सभी संबंध्ति विभागों का सहयोग लिया जा रहा है। गत वर्ष पटना शहर के लिए तैयार करायी गयी स्वच्छ वायु कार्य योजना का विमोचन किया गया था। इस कार्ययोजना में सुझाये गये उपायों पर अमल हेतु सरकार-राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् प्रयत्नशील है।


