कैंसर रोगियों को कोरोना होने की संभावना अधिक, बिहार में कोरोना से मरने वालों में अधिकांश कैंसर ग्रस्त थे
फुलवारी शरीफ। कैंसर की बीमारी के कारण अधिकतर मरीज कमजोर होते हैं, जिसकी वजह से उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। कोरोना वायरस की वजह से बिहार में जिन मरीजों की मौत हुई है, उसमें अधिकतर मरीज पहले से ही कैंसर की बीमारी से ग्रसित थे।
मालूम हो कि दिनांक: 10 मई को आलमगंज पटना में एक महिला कोरोना से संक्रमित पाई गई। वह महावीर कैंसर संस्थान में 03 एवं 04 मई को आयी थी। मरीजों की सुरक्षा के लिए इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए आज चिकित्सकों की आपात बैठक में कई निर्णय लिये गये। जिनमें एम्बुलेंस से आने वाले गंभीर मरीजों को बुखार एवं सांस फूलने जैसी तकलीफ रहने पर कोरोना जांच करवाना अनिवार्य है। उसके बिना अस्पताल में भर्ती नहीं ली जायेगी। इसकी पूरी जानकारी संस्थान की स्क्रीनिंग टीम द्वारा ली जाएगी। संस्थान के स्क्रीनिंग ओ.पी.डी. में चिकित्सकों द्वारा अगर कोविड-19 जांच के आदेश दी जाती है तो कोविड-19 की रिपोर्ट निगेटिव आने के उपरांत ही इलाज की प्रक्रिया शुरू की जायेगी। संस्थान में मरीजों को दिखाने एवं भर्ती के लिए समय सीमा अगले आदेश तक प्रात: 9 बजे से अपराह्न 3 बजे तक रहेगा। 3 बजे के बाद गंभीर अवस्था एवं एम्बुलेंस से आये मरीजों को कोविड-19 की जांच कराए भर्ती नहीं ली जा सकती है। इसके लिये मरीज को अगले दिन ओ.पी.डी. में चिकित्सक से संपर्क करना होगा। बहुत जल्द ही महावीर कैंसर संस्थान में संदिग्ध कोरोना वायरस के मरीजों की जांच, पटना एम्स में शुरू हो जाएगी।


