January 7, 2026

मधुबनी में मुस्लिम युवक को भीड़ ने बांग्लादेशी समझकर पीटा, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

मधुबनी। बिहार के मधुबनी जिले से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां एक मुस्लिम युवक को भीड़ ने बांग्लादेशी नागरिक समझकर बेरहमी से पीट दिया। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज में बढ़ती अफवाहों, नफरत और भीड़ की मानसिकता को भी उजागर करती है। बताया जा रहा है कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा से जुड़ी खबरों और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक सूचनाओं का असर अब बिहार तक पहुंच गया है। इसी माहौल के बीच यह घटना घटी, जिसने पूरे इलाके में तनाव और डर का माहौल पैदा कर दिया।
30 दिसंबर की घटना, अब सामने आया वीडियो
यह घटना 30 दिसंबर 2025 की दोपहर की बताई जा रही है, लेकिन इसका वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सामने आई। घटना मधुबनी जिले के राजनगर थाना क्षेत्र के चकदह गांव की है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग एक युवक को बांग्लादेशी कहकर घेर लेते हैं और उसके साथ मारपीट करते हैं। वीडियो में युवक की हालत बेहद खराब नजर आ रही है। मारपीट इतनी गंभीर थी कि युवक का चेहरा बुरी तरह सूज गया था। डॉक्टरों के अनुसार, अगर थोड़ी देर और पिटाई होती, तो उसकी जान भी जा सकती थी।
पीड़ित की पहचान और उसकी आपबीती
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पीड़ित युवक बांग्लादेशी नहीं है, बल्कि बिहार के सुपौल जिले का निवासी है। वह एक गरीब मजदूर है और मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता है। पीड़ित ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि वह एक दुकान पर खाना खाकर उठा ही था कि अचानक कुछ लोग उसके पास आए और उसे बांग्लादेशी बताने लगे। इसके बाद बिना उसकी बात सुने उसे पीटना शुरू कर दिया गया। युवक के मुताबिक, करीब 40 से 50 लोग वहां मौजूद थे और सभी ने मिलकर उसके साथ मारपीट की। पीड़ित ने बताया कि हमलावर उसे धमकी दे रहे थे कि उसे काली मंदिर ले जाकर चढ़ा देंगे और जिंदा गाड़ देंगे। वह लगातार कहता रहा कि वह बांग्लादेशी नहीं है, गरीब मजदूर है और उसके छोटे-छोटे बच्चे हैं, लेकिन भीड़ ने उसकी एक नहीं सुनी। उसने कहा कि अगर उसके साथ कुछ हो जाता, तो उसके परिवार का क्या होता।
जय श्री राम बोलने को लेकर भी आरोप
गांव के कुछ लोगों ने बताया कि मारपीट की एक वजह यह भी बताई जा रही है कि युवक से जय श्री राम बोलने को कहा गया था। जब उसने मना किया, तो उसके साथ हिंसा की गई। हालांकि कुछ ग्रामीणों का कहना है कि युवक ने जय श्री राम बोल भी दिया था, इसके बावजूद उसे पीटा गया। एक ग्रामीण रामबाबू साह ने बताया कि उन्होंने खुद युवक से पूछा था कि क्या वह बंगाल या बांग्लादेश का है। युवक ने साफ कहा कि वह यहीं का रहने वाला है। इसके बाद भी कुछ लोग उसे पाकिस्तानी और बांग्लादेशी कहकर धमकाते रहे।
ग्रामीणों और महिलाओं की प्रतिक्रिया
घटना के बाद गांव के कई लोगों ने इस मारपीट की निंदा की है। गांव की महिलाओं ने कहा कि एक गरीब आदमी को इस तरह पीटना गलत है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या धर्म या नारा बोलने के नाम पर किसी की जान लेना सही है। एक महिला ने कहा कि वह लगातार चिल्लाता रहा, लेकिन डर के कारण कोई भी उसे बचाने आगे नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि युवक मेहनती और शांत स्वभाव का था, अपने काम से काम रखता था।
ठेकेदार के अंडर में काम करने की बात
कुछ ग्रामीणों ने बताया कि गांव में मनीष नाम का एक ठेकेदार काम करवा रहा था और सभी मजदूर उसी के अधीन काम करते थे। आशंका जताई जा रही है कि मजदूरों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ होगा, जिसने बाद में सांप्रदायिक रंग ले लिया। हालांकि पुलिस इस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए मधुबनी पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। पीड़ित के बयान के आधार पर राजनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। एसपी योगेंद्र कुमार ने बताया कि मारपीट करने वालों की पहचान कर ली गई है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की जाएगी। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर-02 के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई है, जो आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। फिलहाल इलाके की स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
पुलिस की जनता से अपील
मधुबनी पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की भ्रामक, उकसाने वाली या असत्य जानकारी साझा न करें। पुलिस का कहना है कि ऐसी अफवाहें समाज में आपसी सौहार्द को नुकसान पहुंचाती हैं और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ सकती हैं। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
समाज के लिए गंभीर चेतावनी
यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि अफवाहों, नफरत और भीड़ की मानसिकता किस तरह निर्दोष लोगों की जान के लिए खतरा बन सकती है। किसी की पहचान, धर्म या भाषा के आधार पर कानून हाथ में लेना न सिर्फ अपराध है, बल्कि इंसानियत के खिलाफ भी है। जरूरत इस बात की है कि लोग संयम बरतें, सच और झूठ में फर्क समझें और किसी भी संदिग्ध स्थिति में पुलिस को सूचना दें, न कि खुद न्यायाधीश बनने की कोशिश करें।

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