मोतिहारी में डॉक्टर की लापरवाही से महिला की मौत, ऑपरेशन के बाद पेट में कैंची छोड़ी, अस्पताल परिसर में हंगामा
मोतिहारी। मोतिहारी जिले से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने न सिर्फ एक परिवार को गहरे शोक में डुबो दिया है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को भी उजागर कर दिया है। आरोप है कि एक निजी क्लिनिक में किए गए ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से महिला के पेट में कैंची छूट गई, जिसका खामियाजा उसे डेढ़ साल तक दर्द सहकर भुगतना पड़ा और अंततः उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ और लोगों में आक्रोश फैल गया।
प्रसव के दौरान हुआ ऑपरेशन और शुरुआती स्थिति
मृतका की पहचान जितना थाना क्षेत्र के मणिभूषण कुमार की 25 वर्षीय पत्नी उषा देवी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, करीब डेढ़ साल पहले उषा देवी गर्भवती थीं। प्रसव के लिए उन्हें मोतिहारी शहर की एक निजी डॉक्टर संगीता कुमारी के क्लिनिक में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद डॉक्टर ने सामान्य प्रसव के बजाय ऑपरेशन से डिलीवरी कराने की सलाह दी। परिजनों ने डॉक्टर पर भरोसा जताते हुए ऑपरेशन के लिए सहमति दी। ऑपरेशन के बाद उषा देवी ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। शुरुआत में परिवार को लगा कि सब कुछ सामान्य है और महिला जल्द ही पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगी। लेकिन कुछ ही दिनों बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और पेट में लगातार दर्द की शिकायत शुरू हो गई।
लगातार दर्द और इलाज के नाम पर खानापूर्ति
परिजनों का कहना है कि उषा देवी के पेट का दर्द समय के साथ बढ़ता गया। वे कई बार उसी डॉक्टर और अन्य चिकित्सकों के पास गए। अल्ट्रासाउंड समेत कई जांच कराई गईं, लेकिन हर बार रिपोर्ट सामान्य बताई जाती रही। डॉक्टरों की ओर से केवल दर्द निवारक दवाइयां दी जाती थीं, जिससे कुछ समय के लिए राहत मिल जाती थी। इस तरह उषा देवी लगभग डेढ़ साल तक असहनीय दर्द सहती रही। इस दौरान उसने कई बार परिजनों से अपनी परेशानी साझा की, लेकिन सही बीमारी का पता नहीं चल सका। परिवार का आरोप है कि अगर समय रहते गंभीर जांच की गई होती, तो यह सच्चाई बहुत पहले सामने आ सकती थी।
अचानक बिगड़ी हालत और चौंकाने वाला खुलासा
बीते दिनों उषा देवी की हालत अचानक बेहद खराब हो गई। पेट में असहनीय दर्द होने लगा और वह चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गई। परिजन घबराकर उसे डॉक्टर कमलेश कुमार के पास ले गए। यहां डॉक्टर ने स्थिति को गंभीर बताते हुए एमआरआई जांच की सलाह दी। एमआरआई रिपोर्ट सामने आने के बाद सभी लोग स्तब्ध रह गए। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि उषा देवी के पेट के अंदर एक कैंची मौजूद है। डॉक्टरों ने इसे बेहद गंभीर मामला बताया और तत्काल ऑपरेशन की जरूरत बताई। परिजनों को कहा गया कि अगर देर हुई तो महिला की जान भी जा सकती है।
दूसरा ऑपरेशन और महिला की मौत
इसके बाद परिजन उषा देवी को रहमानिया मेडिकल सेंटर लेकर पहुंचे। वहां ऑपरेशन की तैयारी की गई और डॉक्टरों ने पेट के अंदर मौजूद कैंची को निकालने की प्रक्रिया शुरू की। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान या उसके तुरंत बाद उषा देवी की हालत तेजी से बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। महिला की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। परिजन और स्थानीय लोग आक्रोशित हो उठे और चिकित्सकों पर गंभीर आरोप लगाने लगे। अस्पताल में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही।
परिजनों का दर्द और आरोप
मृतका के देवर त्रिलोकीनाथ ने बताया कि यह पूरी तरह डॉक्टर की घोर लापरवाही का मामला है। उनका कहना है कि अगर पहले ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर ने सावधानी बरती होती और कैंची पेट के अंदर नहीं छोड़ी होती, तो आज उषा देवी जिंदा होती। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल तक वह महिला दर्द में तड़पती रही और परिवार इलाज के लिए दर-दर भटकता रहा। परिजनों का यह भी कहना है कि उषा देवी की डेढ़ साल की बच्ची अब मां के बिना हो गई है। एक खुशहाल परिवार उजड़ गया और इसका जिम्मेदार लापरवाह चिकित्सा व्यवस्था है।
पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। परिजनों की ओर से दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठते सवाल
यह मामला निजी क्लिनिकों और अस्पतालों में हो रही कथित लापरवाहियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान औजारों की गिनती और बाद की जांच एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसी घटनाएं मरीजों के भरोसे को गहरा आघात पहुंचाती हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों की मांग है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वालों को सख्त सजा मिले, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न झेलना पड़े। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि चिकित्सा क्षेत्र में जवाबदेही और निगरानी कितनी जरूरी है।


