बांग्लादेश ने की रिश्ते सुधारने की पहल, खेल मंत्री बोले- बीसीसीआई से बात करना जरूरी, हम चाहते है दोस्ताना संबंध
नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के महीनों में खेल और राजनीति के मेल से रिश्तों में आई तल्खी के बीच अब सुधार की पहल होती नजर आ रही है। बांग्लादेश के नए खेल मंत्री अमीनुल हक ने भारत के साथ दोस्ताना संबंधों की इच्छा जताते हुए कहा है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड से बातचीत करना बेहद जरूरी है। उन्होंने साफ किया कि बांग्लादेश अपने सभी पड़ोसी देशों के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ते बनाए रखना चाहता है और मौजूदा विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के पक्ष में है।
नई कैबिनेट के बाद बदला रुख
आम चुनावों के बाद बांग्लादेश में नई कैबिनेट के शपथ ग्रहण के साथ ही सरकार का रुख पहले की तुलना में नरम नजर आ रहा है। शपथ लेने के बाद अमीनुल हक ने संसद भवन में भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर से मुलाकात की। इस बातचीत में उन्होंने टी-20 विश्व कप से जुड़े विवादों का जिक्र किया और कहा कि इस मुद्दे को जल्द सुलझाना जरूरी है। हक के मुताबिक बातचीत सकारात्मक रही और दोनों पक्षों ने भविष्य में बेहतर समन्वय की जरूरत पर सहमति जताई।
टी-20 विश्व कप से शुरू हुआ विवाद
विवाद की जड़ उस समय सामने आई, जब बांग्लादेश ने भारत में होने वाले टी-20 विश्व कप में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। इस टूर्नामेंट में बांग्लादेश को अपने मुकाबले मुंबई और कोलकाता में खेलने थे। बांग्लादेश सरकार और क्रिकेट बोर्ड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए टीम को भारत भेजने से मना कर दिया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद, यानी आईसीसी ने बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल करने का फैसला किया।
आईपीएल से जुड़ा बड़ा विवाद
भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में तनाव उस समय और बढ़ गया, जब बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को इंडियन प्रीमियर लीग से बाहर कर दिया गया। बांग्लादेश में हिंदुओं की लगातार हो रही हत्याओं के विरोध में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने मुस्तफिजुर को आईपीएल खेलने की अनुमति नहीं दी। इस फैसले के बाद कोलकाता नाइट राइडर्स ने तीन जनवरी को उन्हें टीम से रिलीज कर दिया।
बांग्लादेश में राजनीतिक प्रतिक्रिया
मुस्तफिजुर को आईपीएल से बाहर किए जाने का मुद्दा बांग्लादेश में तेजी से राजनीतिक रंग लेने लगा। वहां की कई राजनीतिक पार्टियों ने इसे भारत का पक्षपाती कदम बताया। इसके जवाब में बांग्लादेश सरकार ने अपने देश में आईपीएल मैचों के प्रसारण पर रोक लगा दी। इसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने भारत में टी-20 विश्व कप न खेलने की मांग तेज कर दी, हालांकि इसे आईसीसी ने ठुकरा दिया।
सुरक्षा को लेकर जताई गई चिंता
भारत में खेलने को लेकर सुरक्षा की चिंता भी बांग्लादेश की ओर से बार-बार उठाई गई। बांग्लादेश के पूर्व खेल मंत्री आसिफ नजरुल ने साफ कहा था कि उनकी सरकार विश्व कप खेलना चाहती है, लेकिन खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका है। उनका कहना था कि बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या के बाद माहौल तनावपूर्ण है और ऐसे में खिलाड़ियों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।
आईपीएल मिनी नीलामी से शुरू हुई कहानी
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि आईपीएल मिनी नीलामी से जुड़ी हुई है। 16 दिसंबर को कोलकाता नाइट राइडर्स ने मुस्तफिजुर रहमान को 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। इसके बाद बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्या की घटनाओं के चलते भारत में विरोध शुरू हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक सात हिंदुओं की हत्या हो चुकी थी, जिससे माहौल और संवेदनशील हो गया। इसी बीच बीसीसीआई ने मुस्तफिजुर को आईपीएल खेलने की अनुमति नहीं दी और अंततः उन्हें टीम से रिलीज कर दिया गया।
अब दोस्ती की पहल
इन तमाम घटनाओं के बाद बांग्लादेश के नए खेल मंत्री का बयान अहम माना जा रहा है। अमीनुल हक ने कहा कि वह बीसीसीआई से सीधे बातचीत करना चाहते हैं और इस पूरे मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि खेल को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए और क्रिकेट को देशों के बीच रिश्ते सुधारने का माध्यम बनना चाहिए।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर
क्रिकेट भारत और बांग्लादेश दोनों देशों में सिर्फ खेल नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ा विषय है। हालिया विवादों ने दोनों देशों के खेल संबंधों को नुकसान पहुंचाया है। अब बांग्लादेश की नई सरकार की ओर से आई यह पहल संकेत दे रही है कि रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बीसीसीआई और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के बीच संवाद शुरू होता है, तो टी-20 विश्व कप और आईपीएल से जुड़े विवादों का हल निकल सकता है। इससे न सिर्फ क्रिकेट संबंध सुधरेंगे, बल्कि भारत और बांग्लादेश के बीच भरोसा भी मजबूत होगा। बांग्लादेश के नए खेल मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच रिश्तों में तल्खी चरम पर रही है। अब देखना यह होगा कि बातचीत की यह पहल आगे ठोस नतीजों में बदलती है या नहीं।


