अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को लेकर भारत में कई जगहों पर अलर्ट, सुरक्षा बढ़ाई गई, हिंसा की आशंका
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इस तनाव का असर भारत पर न पड़े, इसे लेकर केंद्र सरकार सतर्क हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को एक औपचारिक पत्र जारी कर कानून-व्यवस्था की स्थिति पर विशेष नजर रखने और संभावित सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने को कहा है।
विदेशी घटनाक्रम का घरेलू असर
गृह मंत्रालय द्वारा 28 फरवरी को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि विदेशों में घट रही घटनाओं का असर भारत के अंदर भी देखने को मिल सकता है। मंत्रालय ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया है कि धार्मिक आयोजनों, सार्वजनिक सभाओं और उपदेशों के दौरान दिए जाने वाले भाषणों पर नजर रखी जाए। आशंका जताई गई है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को आधार बनाकर कुछ तत्व भड़काऊ बयानबाजी कर सकते हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है। हाल के दिनों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद भारत के कुछ शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। हालांकि ये प्रदर्शन सीमित रहे, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मौजूदा हालात में स्थिति संवेदनशील बनी रह सकती है।
खुफिया तंत्र को सक्रिय रखने के निर्देश
गृह मंत्रालय की सलाह में राज्यों से कहा गया है कि वे खुफिया सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित करें। किसी भी संभावित तनाव के संकेत मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस तुरंत कार्रवाई करें। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि भड़काऊ भाषण देने वाले ईरान समर्थक उपदेशकों और अन्य संदिग्ध तत्वों की पहचान कर उन पर नजर रखी जाए। दिल्ली में उच्चस्तरीय अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर चिंता व्यक्त की गई है कि अंतरराष्ट्रीय संकट का फायदा उठाकर कुछ चरमपंथी समूह स्थानीय स्तर पर अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं। इसीलिए राज्यों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।
ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ता सैन्य तनाव
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद क्षेत्र में हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका और इजरायल ने रविवार को ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए। इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइल अड्डों पर बमबारी की गई और कुछ युद्धपोतों को भी निशाना बनाया गया। ईरानी नेतृत्व के अनुसार, इन हमलों में 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें वरिष्ठ सैन्य अधिकारी भी शामिल हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक पत्रिका ‘द अटलांटिक’ को दिए साक्षात्कार में संकेत दिया कि वह ईरान के नए नेतृत्व से बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यदि ईरान वार्ता चाहता है तो अमेरिका संवाद के लिए तैयार है। हालांकि, ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने सामाजिक माध्यम ‘एक्स’ पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे अमेरिका से बातचीत नहीं करेंगे।
क्षेत्रीय विस्तार का खतरा
यह संघर्ष केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रह गया है। लेबनान के चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला ने इजरायल पर हमले करने का दावा किया है, जिसके जवाब में इजरायल ने भी कार्रवाई की। खाड़ी देशों ने भी चेतावनी दी है कि यदि उनके हितों को नुकसान पहुंचा तो वे जवाबी कदम उठा सकते हैं। हालिया हमलों में कम से कम पांच आम नागरिकों की मौत की भी खबर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और फैला तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और सुरक्षा संतुलन पर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए, जिनके पश्चिम एशिया से गहरे आर्थिक और सामरिक संबंध हैं, यह स्थिति विशेष रूप से संवेदनशील है।
भारत में सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश के भीतर शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त बढ़ाएं और किसी भी अफवाह पर तुरंत कार्रवाई करें। धार्मिक नेताओं और सामुदायिक संगठनों से भी संवाद बनाए रखने को कहा गया है, ताकि गलतफहमियों को समय रहते दूर किया जा सके। गृह मंत्रालय की यह पहल एहतियाती कदम के तौर पर देखी जा रही है। सरकार का मानना है कि समय रहते सतर्कता बरतने से किसी भी संभावित तनाव को रोका जा सकता है। फिलहाल देशभर में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वैश्विक राजनीति और सैन्य संघर्षों का प्रभाव सीमाओं से परे जाकर अन्य देशों की आंतरिक शांति को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में प्रशासनिक सतर्कता और सामाजिक संयम दोनों की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है।


