मसौढ़ी जेल से कैदियों का शराब पीते वीडियो वायरल, जेलर की सफाई, डीआईजी ने दिए जांच के आदेश

मसौढ़ी। बिहार के पटना जिले से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित मसौढ़ी उपकारा एक बार फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने पूरे जेल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि जेल के अंदर कुछ कैदी खुलेआम शराब पी रहे हैं और गांजा भी पीते नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, कैदियों के हाथ में मोबाइल फोन भी दिख रहा है, जिससे वे खुद इस पूरी गतिविधि को रिकॉर्ड कर रहे हैं। वीडियो में एक कैदी स्पष्ट रूप से कहता है कि मसौढ़ी जेल में खुलेआम दारू चल रही है। यह बयान न केवल जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि जेल के अंदर हो रही गैरकानूनी गतिविधियों की ओर भी इशारा करता है। वीडियो के सोशल मीडिया पर तेजी से फैलते ही हड़कंप मच गया और मामले ने तूल पकड़ लिया।
जेल प्रशासन की सफाई
मामला सामने आने के बाद मसौढ़ी उपकारा के जेलर उमाशंकर शर्मा ने इस पर सफाई दी। उन्होंने बताया कि वीडियो में दिख रहे कैदियों से पूछताछ की गई है। पूछताछ में कैदियों ने दावा किया कि यह पूरा वीडियो एक ‘नाटक’ था जिसका मकसद जेल के कुछ सिपाहियों को बदनाम करना था। कैदियों के अनुसार, उन्होंने जो ग्लास में पीया था वह शराब नहीं, बल्कि पानी था। वहीं जो गांजा जैसा दिख रहा था, वह असल में तुलसी की पत्तियां थीं। जेलर उमाशंकर शर्मा ने यह भी कहा कि इस तरह के झूठे वीडियो बनाकर कुछ कैदी जेल प्रशासन को बदनाम करना चाहते हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सच्चाई जांच के बाद सामने आ जाएगी और दोषियों को उचित सजा दी जाएगी।
जांच के आदेश और आगे की कार्रवाई
इस पूरे प्रकरण पर अब बिहार जेल प्रशासन हरकत में आ गया है। डीआईजी नीरज कुमार झा, जो कि बेउर जेल के सुपरवाइजर ऑफिसर भी हैं, ने इस वीडियो का संज्ञान लिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि इस मामले की गहराई से जांच करवाई जाएगी और जो भी इसमें दोषी पाए जाएंगे, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। डीआईजी ने कहा कि यह गंभीर मामला है क्योंकि इससे जेल प्रशासन की साख पर सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वीडियो की प्रमाणिकता की जांच की जाएगी और यह देखा जाएगा कि यह वास्तव में मसौढ़ी जेल का ही है या किसी और जगह का। अगर वीडियो असली पाया गया, तो जेल के अंदर मोबाइल, नशा और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल कैदियों और जेलकर्मियों दोनों पर कार्रवाई की जाएगी।
जेल व्यवस्था पर सवाल
यह मामला बिहार की जेल व्यवस्था की पोल खोलता नजर आ रहा है। जेल, जो कि सुधारगृह के रूप में काम करने चाहिए, वहां इस तरह की गतिविधियों का होना यह दर्शाता है कि व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं। मोबाइल फोन, शराब और गांजा जैसी चीजों का जेल के अंदर पहुंचना अपने आप में एक बड़ा सवाल है। अगर कैदियों के पास मोबाइल फोन है और वे सोशल मीडिया पर वीडियो डाल पा रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर जेल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। साथ ही यह भी सोचने की जरूरत है कि क्या कुछ जेलकर्मी इस तरह की गतिविधियों में शामिल हैं या उन्हें नजरअंदाज कर रहे हैं। मसौढ़ी उपकारा का यह मामला सिर्फ एक वीडियो का नहीं है, बल्कि यह जेल व्यवस्था के भीतर छिपी गंभीर समस्याओं की एक झलक है। जांच से सच्चाई चाहे जो भी निकले, लेकिन यह साफ है कि जेलों की निगरानी प्रणाली को और सख्त करने की जरूरत है। साथ ही, यह भी आवश्यक है कि दोषी चाहे कैदी हों या जेलकर्मी, उन्हें उचित दंड दिया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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