January 29, 2026

राजेश वर्मा बनाए गये लोजपा (रा) के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, चुनाव से पहले चिराग ने दी बड़ी जिम्मेदारी

पटना। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) में संगठनात्मक स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने खगड़िया के सांसद राजेश वर्मा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह निर्णय चुनाव से ठीक पहले आया है, जिससे पार्टी की रणनीति और चुनावी तैयारी को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
राजेश वर्मा का आभार प्रकट करना
राजेश वर्मा ने अपनी नियुक्ति पर खुशी जताते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि वे राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के आभारी हैं जिन्होंने उन पर विश्वास जताया है। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि वे पूर्ण समर्पण भाव से अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे। इसके साथ ही राजेश वर्मा ने एक तस्वीर भी साझा की जिसमें वे चिराग पासवान और पार्टी के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल खालिक के साथ दिखाई दे रहे हैं।
चुनाव से पहले अहम कदम
बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा कुछ ही दिनों में होने वाली है। ऐसे समय में यह नियुक्ति पार्टी की संगठनात्मक मजबूती और वित्तीय प्रबंधन को और सुदृढ़ करने का प्रयास है। चुनाव के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के लिए कोषाध्यक्ष की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि यही व्यक्ति चुनावी चंदा, रैलियों और प्रचार-प्रसार से जुड़ी आर्थिक व्यवस्था को संभालता है।
राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष का महत्व
किसी भी पार्टी में राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष का पद अत्यंत जिम्मेदारियों से भरा होता है। यह केवल खजांची का काम नहीं होता, बल्कि पार्टी की पूरी आर्थिक रीढ़ इसी पद पर टिकी रहती है। कोषाध्यक्ष को पार्टी को मिलने वाले दान और चंदे का हिसाब रखना पड़ता है। चुनाव प्रचार, विज्ञापन, यात्रा, संगठनात्मक गतिविधियों और कार्यालय खर्च जैसे सभी पहलुओं की वित्तीय निगरानी करना उनकी जिम्मेदारी होती है।
वित्तीय अनुशासन की जिम्मेदारी
कोषाध्यक्ष को पार्टी के सालाना और चुनावी बजट की रूपरेखा तैयार करनी होती है और उसे नेतृत्व के सामने प्रस्तुत करना पड़ता है। इसके अलावा, आयकर विभाग और चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को समय-समय पर वित्तीय रिपोर्ट और ऑडिट रिपोर्ट जमा करना भी आवश्यक होता है। इससे पार्टी पर अवैध फंडिंग या काले धन के इस्तेमाल का आरोप न लगे और संगठन की पारदर्शिता बनी रहे।
पार्टी की तिजोरी का रखवाला
कहा जाता है कि किसी भी राजनीतिक दल का कोषाध्यक्ष उसकी तिजोरी का रखवाला होता है। यह तय करना कि पैसा कहाँ से आएगा और कहाँ खर्च होगा, उसकी जिम्मेदारी होती है। चुनावी रैलियों, विज्ञापन अभियानों, संगठन विस्तार और जनसंपर्क से जुड़ी गतिविधियों के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध हो सके, इसका ध्यान कोषाध्यक्ष ही रखता है।
चिराग पासवान की रणनीति
चिराग पासवान ने जिस तरह से चुनाव से पहले खगड़िया के सांसद को यह अहम पद सौंपा है, उससे साफ झलकता है कि वे संगठनात्मक और वित्तीय मोर्चे पर कोई ढील नहीं देना चाहते। यह कदम इस बात का संकेत भी है कि लोजपा (रा) चुनाव में पूरी तैयारी के साथ उतरना चाहती है और इसके लिए मजबूत वित्तीय ढांचे की जरूरत है।
राजेश वर्मा के लिए नई चुनौती
राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष का पद संभालना राजेश वर्मा के लिए एक नई चुनौती भी है। उन्हें अब यह साबित करना होगा कि वे पार्टी की उम्मीदों पर खरे उतर सकते हैं। वित्तीय संसाधनों का पारदर्शी और अनुशासित उपयोग सुनिश्चित करना उनके लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी। चुनाव जैसे अवसर पर जहां पैसों का बड़ा प्रवाह होता है, वहां एक छोटी सी गलती भी पार्टी की छवि को प्रभावित कर सकती है। राजेश वर्मा की यह नियुक्ति लोजपा (रा) के लिए चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा है। इससे न केवल संगठन में उत्साह बढ़ेगा बल्कि चुनावी रणनीति को भी मजबूती मिलेगी। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका पार्टी की वित्तीय स्थिति को संभालने और उसे पारदर्शिता के साथ संचालित करने में महत्वपूर्ण साबित होगी। आने वाले विधानसभा चुनाव में यह नियुक्ति पार्टी के लिए कितना लाभकारी होगी, यह तो समय बताएगा, लेकिन इतना निश्चित है कि चिराग पासवान ने चुनावी मैदान में उतरने से पहले संगठन को मजबूत करने का बड़ा कदम उठा लिया है।

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