उपेंद्र कुशवाहा ने सीएम नीतीश से की मुलाकात, राज्यसभा चुनाव को लेकर किया जीत का दावा

पटना। बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। यह मुलाकात पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर हुई, जहां जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा भी मौजूद थे। इस बैठक के बाद राज्य की राजनीति में नए कयासों का दौर शुरू हो गया है। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा चुनाव को लेकर विश्वास जताया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सभी पांच सीटों पर जीत हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि गठबंधन के सभी दल आपसी समन्वय के साथ चुनाव की तैयारी कर रहे हैं और परिणाम भी उनके पक्ष में ही आएगा।
मुलाकात को बताया सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया
उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री से अपनी मुलाकात को सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में शामिल दलों के बीच लगातार संवाद चलता रहता है और इसी क्रम में मुख्यमंत्री से उनकी मुलाकात हुई है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से मिलना कोई नई बात नहीं है। वे पहले भी कई बार मुख्यमंत्री से मिलते रहे हैं और राज्य के विभिन्न राजनीतिक और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते रहे हैं। इस बार की मुलाकात भी उसी परंपरा का हिस्सा है। कुशवाहा ने यह भी कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर सहयोगी दलों के बीच लगातार विचार-विमर्श हो रहा है ताकि गठबंधन की रणनीति मजबूत बनी रहे।
निशांत कुमार के राजनीति में आने पर प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने की संभावनाओं को लेकर भी उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे पहले व्यक्ति थे जिन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि निशांत कुमार को राजनीति में आना चाहिए।
उनके अनुसार यदि निशांत कुमार राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं तो यह एक सकारात्मक कदम हो सकता है। कुशवाहा का कहना था कि नई पीढ़ी के नेताओं के आने से राजनीति में नए विचार और ऊर्जा का संचार होता है। हाल के दिनों में बिहार की राजनीति में यह चर्चा भी तेज हुई है कि नीतीश कुमार के बाद पार्टी की कमान कौन संभालेगा। इसी संदर्भ में निशांत कुमार के नाम की चर्चा भी सामने आती रही है।
नीतीश कुमार के दिल्ली जाने पर कही यह बात
मीडिया से बातचीत के दौरान उपेंद्र कुशवाहा से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि यदि नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं तो बिहार के लोगों को उनका अभाव महसूस होगा। कुशवाहा ने कहा कि अभी तक नीतीश कुमार बिहार में रहकर राजनीति करते रहे हैं और राज्य की राजनीति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लेकिन यदि वे दिल्ली में रहकर राजनीति करेंगे तो स्वाभाविक रूप से बिहार के लोगों को उनकी कमी महसूस होगी। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार का अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर भी उपयोगी साबित हो सकता है।
राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गणित
दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया है। इसके बाद से बिहार की राजनीति में यह चर्चा तेज हो गई है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं और राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है। राज्यसभा चुनाव के संदर्भ में राजनीतिक समीकरण भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। बिहार विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के पास 202 विधायक हैं। इस संख्या बल के आधार पर गठबंधन चार सीटों पर जीत सुनिश्चित कर सकता है। हालांकि पांचवीं सीट के लिए मुकाबला थोड़ा कठिन माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस सीट पर जीत के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता पड़ सकती है।
तीन अतिरिक्त विधायकों की जरूरत
पांचवीं सीट पर जीत के लिए उपेंद्र कुशवाहा को कुछ अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। जब पत्रकारों ने उनसे इस बारे में सवाल किया कि यदि तीन विधायकों की जरूरत पड़ी तो वे विपक्ष से समर्थन कैसे प्राप्त करेंगे, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे पत्रकारों से ही विधायक मांग लेंगे। उनके इस जवाब से वहां मौजूद लोगों के बीच हल्की मुस्कान भी देखने को मिली। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पांचवीं सीट पर जीत तभी संभव होगी जब विपक्षी खेमे में क्रॉस वोटिंग की स्थिति बने।
फिलहाल बनी हुई है चुनौतीपूर्ण स्थिति
वर्तमान राजनीतिक स्थिति को देखते हुए यह कहा जा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा के लिए राज्यसभा चुनाव पूरी तरह आसान नहीं है। संख्या बल के हिसाब से उनकी जीत सुनिश्चित नहीं मानी जा रही है। ऐसे में चुनाव परिणाम काफी हद तक विपक्षी दलों की रणनीति और संभावित क्रॉस वोटिंग पर निर्भर करेगा। यही कारण है कि बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर लगातार हलचल बनी हुई है। फिलहाल सभी दल अपने-अपने स्तर पर चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि राज्यसभा की पांचवीं सीट किसके खाते में जाती है और बिहार की राजनीति में इसका क्या असर पड़ता है।

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