दानापुर में निर्माणाधीन पुल गिरा, दो मजदूर मलबे में दबे
- निर्माण गुणवत्ता और निगरानी पर उठे सवाल, एक मजदूर की हालत गंभीर
- ग्रामीणों का आरोप, बिना मजबूत आधार और सरिया के हो रहा था निर्माण कार्य
पटना। बिहार में पुलों के गिरने की घटनाओं के बीच एक बार फिर चिंताजनक मामला सामने आया है। राजधानी पटना के दानापुर स्थित ढिबरा इलाके में निर्माणाधीन पुल का ढांचा अचानक भरभराकर गिर गया, जिससे दो मजदूर मलबे में दब गए। इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार विजय सिंह पथ से ढिबरा तक सड़क और पुल निर्माण का कार्य चल रहा था। इसी दौरान निर्माणाधीन पुल का ढांचा अचानक ताश के पत्तों की तरह ढह गया। घटना के समय वहां काम कर रहे मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और दो मजदूर मलबे में दब गए। स्थानीय लोगों की मदद से बचाव कार्य शुरू किया गया। मलबे में फंसे एक मजदूर को जेसीबी मशीन की सहायता से कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। उसे गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है। वहीं दूसरा मजदूर किसी तरह पुलिया के नीचे छिपकर अपनी जान बचाने में सफल रहा। इस घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों ने निर्माण कार्य में भारी अनियमितता और लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल का निर्माण बिना किसी मजबूत आधार और पिलर के सीधे मिट्टी पर किया जा रहा था। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य में सरिया का पर्याप्त उपयोग नहीं किया गया और घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था। ग्रामीणों के अनुसार इलाके में इसी तरह के दो पुल बनाए जा रहे थे, जिनमें से एक पुल गिर चुका है, जबकि दूसरा पुल भी उसी तकनीक और तरीके से तैयार किया जा रहा है। लोगों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो दूसरा पुल भी कभी भी गिर सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है। इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य की नियमित जांच होती और गुणवत्ता का ध्यान रखा जाता, तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। स्थानीय लोगों ने संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि दूसरे निर्माणाधीन पुल की तत्काल जांच कराई जाए और जब तक उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित न हो जाए, तब तक निर्माण कार्य को रोक दिया जाए। लोगों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से न केवल सरकारी धन की बर्बादी होती है, बल्कि लोगों की जान भी खतरे में पड़ जाती है। उल्लेखनीय है कि बिहार में पहले भी कई पुलों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हाल ही में विक्रमशिला सेतु की जर्जर स्थिति को लेकर भी चर्चा तेज रही है। ऐसे में दानापुर की यह घटना राज्य में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर चिंता और बढ़ा देती है। प्रशासन की ओर से फिलहाल घटना की जांच की बात कही जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के कारणों का पता लगाया जाएगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही निर्माण कार्य में अपनाए गए मानकों की भी जांच की जाएगी। दानापुर में निर्माणाधीन पुल के गिरने की यह घटना न केवल निर्माण कार्य में लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि प्रशासनिक निगरानी की कमजोरियों को भी सामने लाती है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं, जो जनहित के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं।


