January 8, 2026

बांग्लादेश में फिर दो हिंदू युवकों की हत्या, कट्टरपंथियों की भीड़ ने बनाया निशाना

नई दिल्ली। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बीते कुछ हफ्तों में एक के बाद एक हत्याओं और अत्याचार की खबरों ने न सिर्फ देश के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर चिंता पैदा कर दी है। कट्टरपंथी भीड़ द्वारा किए जा रहे हमलों के कारण हिंदू समुदाय के लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। ताजा घटनाओं में दो और हिंदू युवकों की हत्या की खबर सामने आई है, जिसने हालात की गंभीरता को और उजागर कर दिया है।
राणा प्रताप बैरागी की हत्या के बाद दूसरी वारदात
सोमवार को पहले राणा प्रताप बैरागी नाम के एक हिंदू युवक की हत्या की सूचना सामने आई थी। इस घटना की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि कुछ ही घंटों बाद एक और हिंदू युवक की हत्या की खबर आ गई। यह सिलसिला दिखाता है कि हिंसा किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लगातार बढ़ती जा रही है। राणा प्रताप बैरागी की हत्या के बाद समुदाय में पहले से मौजूद भय और गहरा गया था, वहीं दूसरी हत्या ने लोगों को और स्तब्ध कर दिया।
मोनी चक्रवर्ती पर धारदार हथियारों से हमला
सोमवार देर रात 5 जनवरी 2026 को बांग्लादेश के नरसिंग्दी जिले के पोलाश उपजिला स्थित चोर्सिंदूर बाजार में यह दूसरी घटना हुई। यहां मोनी चक्रवर्ती नाम के एक हिंदू दुकानदार पर बदमाशों ने अचानक धारदार हथियारों से हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमला इतना अचानक और हिंसक था कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही हमलावर फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल मोनी चक्रवर्ती को इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन चोटों की वजह से उनकी मौत हो गई।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मोनी चक्रवर्ती, मदन चक्रवर्ती के सबसे बड़े बेटे थे। उनकी हत्या की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि मोनी एक सामान्य दुकानदार थे और उनका किसी भी तरह के विवाद से कोई लेना-देना नहीं था। उनकी मौत ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर आम नागरिकों को इस तरह क्यों निशाना बनाया जा रहा है।
लगातार बढ़ रही हिंसक घटनाएं
राणा प्रताप बैरागी और मोनी चक्रवर्ती की हत्या से पहले भी बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ कई हिंसक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कुछ समय पहले दीपू चंद्र दास नाम के एक हिंदू फैक्ट्री कर्मचारी को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। इसके बाद अमृत मंडल नाम के एक अन्य हिंदू युवक की हत्या की खबर आई। मयमनसिंह जिले में बजेंद्र बिस्वास नाम के युवक को उसके ही साथी गार्ड ने गोली मार दी थी। वहीं खोकन दास नाम के एक हिंदू कारोबारी की भी भीड़ के हमले में गंभीर चोट लगने के बाद मौत हो गई थी।
तीन हफ्तों में छठी हत्या
इन सभी घटनाओं को जोड़कर देखा जाए तो पिछले तीन हफ्तों में यह छठी ऐसी वारदात बताई जा रही है, जिसमें किसी हिंदू युवक की जान गई है। इतनी कम अवधि में इतनी अधिक घटनाएं यह संकेत देती हैं कि स्थिति बेहद गंभीर है। हिंदू समुदाय के लोगों का कहना है कि वे लगातार भय के साये में जीने को मजबूर हैं और सामान्य जीवन जीना मुश्किल होता जा रहा है।
महिलाओं के खिलाफ भी बढ़ती दरिंदगी
हत्याओं के साथ-साथ महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। हाल ही में बांग्लादेश के झेनैदाह जिले के कालिगंज इलाके से एक हिंदू विधवा महिला के साथ गैंगरेप की दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। आरोप है कि नादिपारा इलाके में दो बदमाशों ने महिला के रिश्तेदारों को एक कमरे में बंद कर दिया और महिला के साथ बलात्कार किया। इसके बाद उसे पेड़ से बांधकर पीटा गया और उसके बाल काट दिए गए।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने का आरोप
इस घटना में आरोपियों ने दरिंदगी की हदें पार करते हुए पूरे कृत्य का वीडियो भी बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। महिला के साथ हुई इस बर्बरता के बाद वह बेहोश हो गई थी। स्थानीय लोगों ने उसे सदर अस्पताल में भर्ती कराया। होश में आने के बाद महिला ने आरोपियों शाहीन और उसके एक साथी के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
मानवाधिकार और सुरक्षा पर सवाल
इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार हो रही हत्याएं और महिलाओं के खिलाफ हिंसा यह दर्शाती हैं कि कानून-व्यवस्था को लेकर स्थिति संतोषजनक नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की नजर भी अब इन घटनाओं पर टिक गई है।
समुदाय में भय और असुरक्षा
लगातार हमलों के कारण हिंदू समुदाय के लोगों में गहरा भय व्याप्त है। कई परिवार अपने बच्चों और युवाओं को लेकर चिंतित हैं। बाजार, दुकान और कार्यस्थल तक जाना भी जोखिम भरा महसूस होने लगा है। समुदाय के लोग सरकार और प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। राणा प्रताप बैरागी और मोनी चक्रवर्ती की हत्या, साथ ही एक हिंदू विधवा के साथ हुई अमानवीय घटना, यह स्पष्ट करती है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा एक गंभीर और लगातार बढ़ती समस्या बन चुकी है। यह केवल कुछ अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि एक ऐसे माहौल की ओर इशारा करती हैं, जहां डर और असुरक्षा हावी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन घटनाओं पर क्या कदम उठाता है और पीड़ितों को न्याय व सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है।

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