January 23, 2026

ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नजर, कहा- किसी देश ने कब्जा रोका तो टैरिफ लगाएंगे, कनाडा बोली- हम ग्रीनलैंड के साथ

नई दिल्ली। अमेरिकी राजनीति और वैश्विक कूटनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर बेहद सख्त और आक्रामक रुख अपनाया है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर किसी देश ने ग्रीनलैंड को अमेरिका के प्रभाव में लाने की उनकी योजना का विरोध किया, तो उस देश पर टैरिफ लगाए जाएंगे। इस बयान के बाद न सिर्फ यूरोप बल्कि पूरे नाटो खेमे में चर्चा तेज हो गई है।
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का सख्त संदेश
व्हाइट हाउस में एक बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर अमेरिका को वहां नियंत्रण नहीं मिला, तो रूस और चीन जैसे देश अपने प्रभाव का विस्तार कर सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर नाटो से बातचीत कर रहा है और सहयोगी देशों को अमेरिका का साथ देना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन देशों पर टैरिफ लगाया जाएगा और इसके लिए वे किस कानूनी प्रावधान का इस्तेमाल करेंगे।
गोल्डन डोम प्रोजेक्ट और ग्रीनलैंड की भूमिका
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका के महत्वाकांक्षी मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट गोल्डन डोम से भी जोड़ा है। यह परियोजना इजराइल के आयरन डोम से प्रेरित बताई जाती है। गोल्डन डोम का उद्देश्य चीन और रूस जैसे देशों से आने वाले मिसाइल खतरों से अमेरिका को बचाना है। ट्रंप का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में स्थित ग्रीनलैंड इस रक्षा रणनीति के लिए एक अहम कड़ी बन सकता है।
कनाडा का कड़ा रुख
ट्रंप के बयानों के जवाब में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने साफ कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला अमेरिका नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड और डेनमार्क की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए। नाटो सहयोगी होने के नाते कनाडा ग्रीनलैंड के साथ खड़ा है। बीजिंग में पत्रकारों से बातचीत में कार्नी ने कहा कि ग्रीनलैंड का भविष्य वहां के लोगों और डेनमार्क का निर्णय है।
नाटो और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ग्रीनलैंड डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है और डेनमार्क नाटो का सदस्य है। ट्रंप के बयान के बाद यूरोपीय देशों ने डेनमार्क के समर्थन में कदम बढ़ाए हैं। फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड, नीदरलैंड और ब्रिटेन ने ग्रीनलैंड में सुरक्षा सहयोग के तहत सीमित संख्या में सैनिक भेजने की योजना बनाई है। जर्मनी ने कहा है कि वह निगरानी मिशन के लिए एक विशेष टीम भेजेगा, जबकि स्वीडन ने डेनमार्क के अनुरोध पर सैन्य अभ्यास के लिए अधिकारियों को ग्रीनलैंड भेजा है।
अमेरिकी सांसदों का दौरा
ट्रंप के बयान के समय अमेरिकी संसद का एक द्विदलीय प्रतिनिधिमंडल ग्रीनलैंड के दौरे पर था। इस 11 सदस्यीय टीम का नेतृत्व डेमोक्रेट सीनेटर क्रिस कून्स कर रहे थे। इस दल में रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस और लिसा मर्कोव्स्की भी शामिल थीं। प्रतिनिधिमंडल ने ग्रीनलैंड के सांसदों, डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन से मुलाकात की। इस दौरे का मकसद स्थानीय लोगों की राय जानना और वॉशिंगटन तथा कोपेनहेगन के बीच बढ़ते तनाव को कम करना बताया गया।
ग्रीनलैंड के नेताओं की चिंता
ग्रीनलैंड की सांसद आजा चेमनित्ज ने कहा कि अमेरिका 2019 से लगातार दबाव बना रहा है। उन्होंने माना कि यह एक लंबी राजनीतिक लड़ाई है और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जितना ज्यादा मिलेगा, उतना बेहतर होगा। ग्रीनलैंड के नेता चाहते हैं कि उनके भविष्य का फैसला बाहरी दबाव के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से हो।
अमेरिका के भीतर भी मतभेद
अमेरिका के भीतर भी ग्रीनलैंड को लेकर एकराय नहीं है। सीनेटर लिसा मर्कोव्स्की ने संसद में एक बिल पेश किया है, जिसमें ग्रीनलैंड को जबरन अमेरिका में शामिल करने के खिलाफ प्रावधान रखा गया है। वहीं, एक रिपब्लिकन सांसद ने इसके उलट ग्रीनलैंड को जोड़ने के पक्ष में बिल पेश किया है। इससे साफ है कि यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में भी विवाद का विषय बना हुआ है।
डेनमार्क का स्पष्ट विरोध
डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोक्के रासमुसेन ने ट्रंप के विचारों को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ ग्रीनलैंड को लेकर असहमति बनी हुई है और यह डेनमार्क के हित में नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर बातचीत संभव है, जिसमें ग्रीनलैंड में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की संख्या बढ़ाने जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।
टैरिफ को कूटनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल
ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में टैरिफ को एक कूटनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं। वे इसे सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रखकर भू-राजनीतिक मुद्दों, क्षेत्रीय नियंत्रण और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की टैरिफ धमकियां अक्सर बातचीत में दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा होती हैं। ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप का आक्रामक रुख वैश्विक राजनीति में नए तनाव का संकेत दे रहा है। जहां अमेरिका इसे अपनी सुरक्षा से जोड़ रहा है, वहीं कनाडा और यूरोपीय देश ग्रीनलैंड की संप्रभुता के पक्ष में मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं। आने वाले हफ्तों में संयुक्त वर्किंग ग्रुप की बैठकों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं से यह साफ होगा कि यह मुद्दा किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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