February 15, 2026

सासाराम में दर्दनाक हादसा, ट्रेनी सिपाही और पिता को ट्रक ने कुचला, मौके पर हुई मौत

रोहतास। बिहार के रोहतास जिले के सासाराम में सोमवार देर रात एक हृदयविदारक सड़क हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। यह हादसा राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर ताराचंडी मंदिर के पास हुआ, जहां एक तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक ने बाइक सवार पिता-पुत्र को बेरहमी से कुचल दिया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान 24 वर्षीय ट्रेनी सिपाही जितेंद्र शर्मा और उनके 65 वर्षीय पिता गणेश शर्मा के रूप में हुई है। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए बल्कि पूरे गांव के लिए गहरा आघात लेकर आई है।
घर लौटे थे छुट्टी पर, पिता के इलाज के लिए निकले थे दोनों
मिली जानकारी के अनुसार, जितेंद्र शर्मा हाल ही में बिहार पुलिस में चयनित हुए थे और मुजफ्फरपुर जिले में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। नेपाल सीमावर्ती इलाके में उनकी ट्रेनिंग चल रही थी। वे कुछ दिनों की छुट्टी लेकर अपने पैतृक गांव भानस ओपी के मचखोरा मठिया पहुंचे थे। परिवार के सूत्रों के अनुसार, जितेंद्र अपने पिता गणेश शर्मा के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थे, क्योंकि वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। सोमवार की रात दोनों डेहरी-ऑन-सोन के एक निजी क्लीनिक में इलाज कराने गए। पिता का इलाज करवाने के बाद देर रात वे बाइक से वापस घर लौट रहे थे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
तेज रफ्तार ट्रक ने कुचला, मौके पर हुई मौत
जब दोनों ताराचंडी मंदिर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-19 से गुजर रहे थे, तभी अचानक एक ट्रक तेज रफ्तार में पीछे से आया और बाइक को टक्कर मार दी। ट्रक चालक ने ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे जा घुसा। टक्कर इतनी भयानक थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने शोर मचाया, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। धौड़ाढ थाना की टीम ने ट्रक को जब्त कर लिया और चालक को हिरासत में ले लिया है।
परिवार और गांव में मचा कोहराम
हादसे की खबर जैसे ही गांव पहुंची, परिवार में कोहराम मच गया। जितेंद्र की मां और अन्य परिजन बेसुध हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि जितेंद्र बेहद शांत और संस्कारी युवक थे, जिन्होंने हाल ही में परिवार का नाम रोशन किया था। चचेरे भाई अनिल तिवारी ने बताया कि “जितेंद्र ने अभी-अभी नौकरी पाई थी। वह अपने पिता की तबीयत को लेकर चिंतित था और छुट्टी लेकर आया था। यह सोचना भी मुश्किल है कि पिता के इलाज के लिए निकले दोनों एक साथ दुनिया छोड़ जाएंगे।” गांव में हर किसी की आंखें नम हैं और घर-घर से शोक की लहर फैल गई है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
धौड़ाढ थाना प्रभारी ने बताया कि शवों को कब्जे में लेकर सासाराम सदर अस्पताल भेज दिया गया है, जहां पोस्टमार्टम के बाद उन्हें परिजनों को सौंपा जाएगा। एसपी रोहतास रौशन कुमार ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि हादसे की गहन जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ट्रक चालक की गलती थी या सड़क पर कोई तकनीकी कमी हादसे का कारण बनी।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ती रफ्तार का खतरा
इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बिहार के राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाएं क्यों नहीं रुक रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। तेज रफ्तार, ओवरलोड ट्रक, सड़क पर अंधेरा और सिग्नल व्यवस्था की कमी इन हादसों के प्रमुख कारण माने जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों पर पर्याप्त स्पीड ब्रेकर और चेतावनी संकेत नहीं हैं। इसके अलावा, ट्रक चालकों की उचित ट्रेनिंग की कमी और लंबे समय तक ड्राइविंग करने के कारण होने वाली थकान भी दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बनती जा रही है।
जिम्मेदारी और सुरक्षा पर सवाल
सरकार और प्रशासन लगातार सड़क सुरक्षा को लेकर योजनाएं बना रहे हैं, लेकिन जमीन पर उनकी प्रभावशीलता संदिग्ध है। सासाराम जैसे घटनाओं में यह स्पष्ट होता है कि ट्रैफिक नियमों का पालन न होना और निगरानी की कमी कितनी खतरनाक साबित हो सकती है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ताराचंडी मंदिर के आसपास पुलिस गश्त बढ़ाई जाए, ताकि रात के समय तेज रफ्तार वाहनों पर नियंत्रण रखा जा सके।
एक परिवार की टूटी उम्मीदें
जितेंद्र शर्मा का पुलिस सेवा में चयन उनके परिवार के लिए गर्व का क्षण था। गांव के लोग बताते हैं कि वे मेहनती और ईमानदार युवक थे, जिन्होंने अपने परिवार को खुशियां देने के लिए कड़ी मेहनत की थी। लेकिन नियति ने उन्हें अपने पिता के साथ छीन लिया। उनकी यह असमय मौत न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति है। सासाराम की यह दुर्घटना एक बार फिर यह चेतावनी देती है कि सड़क पर लापरवाही और रफ्तार का कोई स्थान नहीं होना चाहिए। जितेंद्र और उनके पिता की मौत केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि यह उस व्यवस्था पर सवाल है जो सड़क सुरक्षा को लेकर संवेदनशील नहीं दिखती। अब प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि ऐसे हादसे दोबारा न हों। लेकिन तब तक जितेंद्र और गणेश शर्मा की दर्दनाक मौत की यादें लोगों के दिलों में बनी रहेंगी, एक चेतावनी के रूप में कि रफ्तार की गलती कभी-कभी पूरी जिंदगी पर भारी पड़ जाती है।

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