सूरत की डाइंग मिल में दर्दनाक हादसा, टैंक में दम घुटने से तीन बिहारी मजदूरों की मौत
सूरत। गुजरात के सूरत शहर में एक दर्दनाक औद्योगिक हादसा सामने आया है, जिसमें बिहार के तीन प्रवासी मजदूरों की जहरीली गैस के कारण दम घुटने से मौत हो गई, जबकि एक अन्य मजदूर की हालत गंभीर बनी हुई है। यह हादसा सूरत के पांडेसरा औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक डाइंग मिल में हुआ। बताया जा रहा है कि मजदूरों को मिल के भूमिगत टैंक की सफाई के लिए उतारा गया था, जहां अचानक जहरीली गैस के प्रभाव में आने से उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे बेहोश हो गए। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि टैंक के अंदर मौजूद जहरीली गैस के कारण मजदूरों का दम घुट गया, जिससे तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
पांडेसरा औद्योगिक क्षेत्र की डाइंग मिल में हुआ हादसा
यह हादसा सूरत शहर के पांडेसरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित पारस प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड नामक डाइंग मिल में हुआ। पुलिस के अनुसार मिल में स्थित अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र के भूमिगत टैंक की सफाई का काम कराया जा रहा था। इसी काम के लिए मजदूरों को टैंक के अंदर भेजा गया था। बताया जा रहा है कि टैंक के अंदर पहले से ही जहरीली गैस भरी हुई थी। जैसे ही मजदूर टैंक के अंदर पहुंचे, गैस के संपर्क में आने से उनका दम घुटने लगा। कुछ ही देर में वे बेहोश हो गए। जब अन्य मजदूरों को इस घटना की जानकारी हुई तो उन्होंने तुरंत उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक तीन मजदूरों की मौत हो चुकी थी।
तीन मजदूरों की मौत, एक की हालत गंभीर
इस हादसे में जिन मजदूरों की मौत हुई है उनकी पहचान 23 वर्षीय सोनू पासवान, 19 वर्षीय दिलीप पासवान और 23 वर्षीय संदीप पासवान के रूप में की गई है। तीनों की मौत जहरीली गैस के कारण दम घुटने से हुई बताई जा रही है। वहीं इस घटना में एक अन्य मजदूर महेंद्र पासवान भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत गंभीर बनी हुई है और चिकित्सकों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है। सभी मजदूर बिहार के निवासी बताए जा रहे हैं। वे रोजगार की तलाश में सूरत आए थे और डाइंग मिल में काम कर रहे थे।
घटना की सूचना देर से मिलने पर जांच शुरू
इस मामले की जानकारी देते हुए पुलिस निरीक्षक जे आर चौधरी ने बताया कि यह घटना 5 मार्च की रात की है। हालांकि पुलिस को इस घटना की सूचना अगले दिन शुक्रवार को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने बताया कि घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मजदूरों को किस परिस्थिति में टैंक के अंदर उतारा गया था और क्या वहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था मौजूद थी या नहीं।
टैंक में जहरीली गैस होने की आशंका
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि टैंक के अंदर जहरीली गैस मौजूद थी, जिसके कारण मजदूरों का दम घुट गया। औद्योगिक टैंकों में अक्सर रासायनिक प्रक्रियाओं के कारण खतरनाक गैसें जमा हो जाती हैं। ऐसे स्थानों पर काम करते समय विशेष सुरक्षा उपकरणों और सावधानियों की आवश्यकता होती है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मजदूरों को टैंक के अंदर भेजने से पहले क्या गैस की जांच की गई थी या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि मजदूरों को सुरक्षा उपकरण जैसे ऑक्सीजन मास्क या अन्य सुरक्षा साधन उपलब्ध कराए गए थे या नहीं। यदि जांच में यह पाया जाता है कि मिल प्रबंधन ने सुरक्षा नियमों की अनदेखी की है, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अक्सर देखा जाता है कि मजदूरों को खतरनाक परिस्थितियों में बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के काम करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक क्षेत्रों में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाना जरूरी है। मजदूरों को जोखिम भरे कार्यों के दौरान सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना और काम से पहले आवश्यक जांच करना बेहद जरूरी होता है।
मृतकों के परिवारों को दी गई सूचना
पुलिस ने बताया कि इस हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। परिवार के लोग इस दुखद खबर से बेहद सदमे में हैं। प्रशासन की ओर से आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है। इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा मानकों को और सख्ती से लागू किया जाएगा।


