आरसीपी सिंह पर श्रवण कुमार का हमला, ऐसे लोगों की जदयू में जरूरत नहीं, उनकी कोई विचारधारा नहीं
पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी और आरोप–प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे आरसीपी सिंह की संभावित वापसी को लेकर चल रही चर्चाओं पर जनता दल यूननाइटेड के नेताओं ने सख्त रुख अपना लिया है। जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं के बाद अब राज्य सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने भी दो टूक शब्दों में साफ कर दिया है कि आरसीपी सिंह जैसे नेताओं की पार्टी में कोई जरूरत नहीं है। उनके इस बयान के बाद यह लगभग स्पष्ट हो गया है कि आरसीपी सिंह की जेडीयू में वापसी की राह आसान नहीं, बल्कि लगभग बंद मानी जा रही है।
आरसीपी सिंह के बयान से बढ़ी सियासी हलचल
बीते दिनों आरसीपी सिंह ने मीडिया से बातचीत के दौरान यह कहकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी कि वह कभी जेडीयू से अलग हुए ही नहीं थे। जब उनसे पार्टी में वापसी को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसे आने वाले समय पर छोड़ दिया। उनके इस बयान को कई लोग जेडीयू में दोबारा एंट्री की कोशिश के रूप में देखने लगे। इससे पहले भी आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार के रिश्तों को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगती रही हैं।
ललन सिंह पहले ही कर चुके हैं इनकार
आरसीपी सिंह के बयान के बाद जेडीयू सांसद और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने सबसे पहले पार्टी का रुख साफ कर दिया था। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा था कि जिन लोगों ने पार्टी को कमजोर किया, उनके लिए जेडीयू में कोई जगह नहीं है। ललन सिंह ने यह भी आरोप लगाया था कि आरसीपी सिंह के दौर में पार्टी की सीटें 72 से घटकर 42 रह गई थीं, जबकि समर्पित कार्यकर्ताओं और नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी ने बाद में वापसी करते हुए 85 सीटें हासिल कीं। उनके मुताबिक, ऐसे लोग जो पार्टी को नुकसान पहुंचा चुके हों, वे दोबारा क्या योगदान देंगे।
श्रवण कुमार का तीखा हमला
अब बिहार सरकार में परिवहन मंत्री और जेडीयू नेता श्रवण कुमार ने भी आरसीपी सिंह पर खुलकर हमला बोला है। श्रवण कुमार ने कहा कि कल तक आरसीपी सिंह खुद नीतीश कुमार की सेहत और कार्यक्षमता पर सवाल उठा रहे थे। वे यह कहते थे कि नीतीश कुमार बीमार हैं और काम करने लायक नहीं रहे। ऐसे बयान देने वाले लोग आज उसी नेता के पास लौटने की कोशिश कर रहे हैं, यह समझ से परे है। उन्होंने आगे कहा कि आरसीपी सिंह जिस पार्टी में गए थे, वहां के नेता भी नीतीश कुमार को खत्म करने की बातें कर रहे थे। यहां तक कहा गया था कि अगर नीतीश कुमार की पार्टी को 25 सीटें भी मिल जाएं तो वे राजनीति छोड़ देंगे। लेकिन जब चुनाव नतीजे आए और जेडीयू ने 85 सीटें जीतकर मजबूत स्थिति बना ली, तब वही लोग फिर से नीतीश कुमार के दरवाजे पर खड़े नजर आ रहे हैं।
विचारधारा पर उठाए सवाल
श्रवण कुमार ने आरसीपी सिंह की राजनीतिक विचारधारा पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आरसीपी सिंह ने पहले अपनी पार्टी बनाई, लेकिन जब वह पार्टी नहीं चली तो वे दूसरी पार्टी में चले गए। इसके बाद भी वहां टिक नहीं पाए। उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं की कोई स्थायी विचारधारा नहीं होती। वे सिर्फ अपने राजनीतिक भविष्य के लिए जगह तलाशते रहते हैं। श्रवण कुमार का कहना था कि नीतीश कुमार की राजनीति स्पष्ट है और उनकी विचारधारा भी तय है। जनता ने बार-बार उन पर भरोसा जताया है। ऐसे में जो लोग पहले नीतीश कुमार को कमजोर बताकर उन्हें खत्म करने की बातें कर रहे थे, वे अब किस नैतिकता के आधार पर जेडीयू में लौटना चाहते हैं, यह सवाल उठना लाजमी है।
जेडीयू में संदेश साफ
इन बयानों के बाद जेडीयू के भीतर और बाहर यह संदेश साफ हो गया है कि पार्टी नेतृत्व फिलहाल किसी भी तरह की वापसी के मूड में नहीं है। पार्टी यह दिखाना चाहती है कि संगठन के प्रति निष्ठा और विचारधारा से समझौता नहीं किया जाएगा। जेडीयू के नेताओं का मानना है कि जो लोग मुश्किल समय में पार्टी छोड़कर गए, उन्हें दोबारा स्वीकार करना कार्यकर्ताओं के मनोबल के खिलाफ होगा।
राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज
हालांकि, राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं माना जाता, लेकिन फिलहाल आरसीपी सिंह की जेडीयू वापसी की संभावना बेहद कमजोर दिख रही है। एक के बाद एक वरिष्ठ नेताओं के तीखे बयानों ने यह संकेत दे दिया है कि पार्टी अब पुराने विवादों और असंतोष को दोबारा हवा नहीं देना चाहती। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में भी चर्चा में बना रहेगा, क्योंकि आरसीपी सिंह की आगे की राजनीतिक रणनीति और नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया दोनों पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। श्रवण कुमार के इस बयान ने जेडीयू के रुख को और मजबूत कर दिया है। पार्टी यह स्पष्ट करना चाहती है कि अवसरवाद की राजनीति के लिए उसके दरवाजे बंद हैं और संगठन में वही लोग रहेंगे, जो उसकी विचारधारा और नेतृत्व के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं।


