पटना में मध्य प्रदेश की युवती को रेड लाइट एरिया में बेचा, पुलिस ने किशनगंज से छुड़ाया, तीन और को भी कराया मुक्त
पटना। बिहार के किशनगंज जिले के बहादुरगंज थाना क्षेत्र के प्रेमनगर रेड लाइट एरिया से मानव तस्करी और देह व्यापार से जुड़ा एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। इस क्षेत्र में लंबे समय से देह व्यापार का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, जहां भोली-भाली युवतियों को नौकरी और बेहतर जिंदगी का सपना दिखाकर जाल में फंसाया जाता है। ताजा मामला मध्य प्रदेश की एक 23 वर्षीय युवती का है, जिसने बड़ी मुश्किल से इस दलदल से भागकर अपनी जान बचाई। उसके खुलासे के बाद तीन और युवतियों को भी मुक्त कराया जा सका।
नौकरी का झांसा देकर फंसाया
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले की रहने वाली युवती एक महीने पहले बेहतर शिक्षा और नौकरी की तलाश में पटना आई थी। पटना के एक मॉल में उसकी मुलाकात दो लड़कियों से हुई जो खुद को दोस्ताना स्वभाव वाली बताती थीं। इन युवतियों ने उसे भरोसे में लेकर कहा कि वे उसे अच्छी नौकरी दिला सकती हैं और पटना के बिशनपुर इलाके में लेकर चली गईं। कुछ दिनों बाद उसे किशनगंज के बहादुरगंज के प्रेमनगर इलाके में पहुंचा दिया गया, जहां युवती को एहसास हुआ कि वह धोखे का शिकार हो चुकी है। इसके बाद उसे जबरन देह व्यापार करने के लिए मजबूर किया जाने लगा।
पीड़िता का साहस और भागने की कोशिश
लगातार धमकियों और प्रताड़ना के बावजूद युवती ने हिम्मत नहीं हारी। शुक्रवार की देर रात, करीब 10 बजे, वह किसी तरह मौका पाकर रेड लाइट एरिया से भाग निकली। अर्ध-नग्न अवस्था में भागती हुई युवती राष्ट्रीय राजमार्ग 327 पर स्थित आर. हुसैन चौक पहुंची। यहां नगर पार्षद प्रतिनिधि वसीकूर रहमान की नजर उस पर पड़ी। उन्होंने युवती की हालत देखकर तुरंत उसकी मदद की और उससे पूरी घटना के बारे में पूछा। युवती ने रोते हुए बताया कि किस तरह उसे धोखे से इस दलदल में फंसाया गया और जबरन अवैध धंधे में धकेला गया।
पुलिस की तत्परता और कार्रवाई
घटना की गंभीरता समझते हुए नगर पार्षद प्रतिनिधि ने तुरंत पुलिस को मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही बहादुरगंज थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। युवती की शिकायत और उसकी निशानदेही के आधार पर पुलिस ने देर रात प्रेमनगर रेड लाइट एरिया में छापेमारी की। पुलिस की दबिश के दौरान तीन अन्य युवतियों को भी देह व्यापार के चंगुल से मुक्त कराया गया। पुलिस ने इस पूरे प्रकरण में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि यह सिर्फ देह व्यापार का मामला नहीं, बल्कि एक संगठित मानव तस्करी गिरोह की करतूत है। यह गिरोह भोली-भाली और आर्थिक रूप से कमजोर युवतियों को आसान नौकरी और अच्छी जिंदगी का लालच देकर जाल में फंसाता था। जैसे ही युवतियां इनके चंगुल में आतीं, उन्हें किशनगंज के इस रेड लाइट एरिया में बेच दिया जाता था, जहां से निकलना लगभग असंभव होता था। बहादुरगंज थाना अध्यक्ष संदीप कुमार ने बताया कि युवतियों की पहचान कराने वाले और उन्हें तस्करों तक पहुंचाने वाले एजेंटों की भी तलाश की जा रही है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि इस पूरे नेटवर्क का खुलासा कर जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
प्रेमनगर रेड लाइट एरिया में वर्षों से चल रहा धंधा
नगर पार्षद प्रतिनिधि वसीकूर रहमान ने बताया कि बहादुरगंज-ठाकुरगंज मुख्य मार्ग स्थित प्रेमनगर रेड लाइट एरिया में यह अवैध गतिविधि कई वर्षों से चल रही है। स्थानीय लोग भी इससे परेशान रहते हैं, लेकिन डर के कारण कोई खुलकर आवाज नहीं उठाता। उन्होंने कहा कि यहां कई लड़कियों को शारीरिक और मानसिक यातना के साथ जबरन इस धंधे में धकेला जाता है। उन्होंने जिला प्रशासन से इस अवैध नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है।
पीड़िताओं की पुनर्वास प्रक्रिया
चारों पीड़िताओं को पुलिस संरक्षण में रखा गया है। उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराया जा रहा है और प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित आश्रय दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही मध्य प्रदेश पुलिस से भी संपर्क कर पीड़ित युवती के परिजनों को सूचना दी जा रही है। यह मामला न सिर्फ देह व्यापार, बल्कि संगठित मानव तस्करी के खतरनाक नेटवर्क को उजागर करता है। सिंगरौली की युवती का साहस और समय रहते पुलिस की कार्रवाई ने कई और युवतियों को इस अंधेरी दुनिया से बचा लिया। अब जरूरी है कि प्रशासन इस मामले को उदाहरण बनाकर पूरे रेड लाइट एरिया और तस्करी गिरोह के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में कोई और युवती धोखे का शिकार न बने।


