भागलपुर में आवारा कुत्तों का आतंक, अबतक छह लोगों को काटा, बच्चों की हालत गंभीर
भागलपुर। जिले के नारायणपुर ब्लॉक में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक चरम पर है। सोमवार को अलग-अलग गांवों में कुत्तों के हमले में छह से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इनमें एक मासूम बच्चा भी शामिल है, जिसकी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। इस घटना से ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है और लोग अपने बच्चों को घर से बाहर निकलने नहीं दे रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नारायणपुर प्रखंड के मनोहरपुर, रायपुर, नगरपारा, भवानीपुर और आशा टोल समेत कई गांवों में आवारा कुत्तों ने स्थानीय निवासियों पर हमला किया। इन हमलों में घायल हुए लोगों में मनोहरपुर के सार्थक कुमार, रायपुर के उत्तम कुमार, नगरपारा के भोला कुमार, भवानीपुर के विष्णु कुमार और आशा टोल के वकील शर्मा शामिल हैं। वहीं, नारायणपुर के ही रहने वाले ऋषभ कुमार नामक बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई है, जिसे बेहतर इलाज के लिए मायागंज मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से आवारा कुत्तों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कुत्तों के हमलों के डर से लोग सुबह-शाम अपने खेतों और काम पर जाने से कतरा रहे हैं। विशेषकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। इस पूरे मामले को लेकर नारायणपुर पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विनोद कुमार ने जानकारी दी कि सभी घायलों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें एंटी-रेबीज इंजेक्शन दिया गया है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में एंटी-रेबीज टीके उपलब्ध हैं और घबराने की जरूरत नहीं है। उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि वे झोलाछाप डॉक्टरों या निजी क्लीनिकों के चक्कर में न पड़ें। सरकारी अस्पतालों में इस तरह के मामलों का मुफ्त और सुरक्षित इलाज किया जा रहा है। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और नगर निकाय से आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो स्थिति और भयावह हो सकती है। पंचायत प्रतिनिधियों ने भी इस समस्या को लेकर जल्द बैठक बुलाने और समाधान निकालने की बात कही है। फिलहाल इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। लोगों ने बच्चों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया है और महिलाओं ने घर से बाहर निकलने में संकोच जताया है। प्रशासन के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह जल्द से जल्द उचित कार्रवाई कर ग्रामीणों को राहत प्रदान करे, ताकि आम जनजीवन सामान्य हो सके।


